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रविवार, 30 अप्रैल 2023

मन्ना डे

मना डे

मन्ना दा का जन्म कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में 1 मई 1919 को महामाया व पूरन चन्द्र डे के यहाँ हुआ था।

मृत्यु 24 अक्टूबर 2013 को सुबह 4 बजकर 30 मिनट

मन्ना दा का जन्म कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में 1 मई 1919 को महामाया व पूरन चन्द्र डे के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा इन्दु बाबुर पाठशाला से पूरी करने के पश्चात स्कॉटिश चर्च कॉलेज में प्रवेश लिया। कॉलेज के दिनों वे कुश्ती और मुक्केबाजी जैसी प्रतियोगिताओं में खूब भाग लेते थे। उनके पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे। उन्होंने विद्यासागर कॉलेज से स्नातक किया। कुश्ती के साथ मन्ना फुटबॉल के भी काफी शौकीन थे। संगीत के क्षेत्र में आने से पहले इस बात को लेकर लम्बे समय तक दुविधा में रहे कि वे वकील बनें या गायक। आखिरकार अपने चाचा कृष्ण चंद्र डे  से प्रभावित होकर उन्होंने तय किया कि वे गायक ही बनेंगे।

मन्ना डे ने संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा अपने चाचा केoसीo डे से हासिल की। उनके बचपन के दिनों का एक दिलचस्प वाकया है। उस्ताद बादल खान और मन्ना डे के चाचा एक बार साथ-साथ रियाज कर रहे थे। तभी बादल खान ने मन्ना डे की आवाज सुनी और उनके चाचा से पूछा - "यह कौन गा रहा है?" जब मन्ना डे को बुलाया गया तो उन्होंने उस्ताद से कहा - "बस ऐसे ही गा लेता हूँ।" लेकिन बादल खान ने मन्ना डे की छिपी प्रतिभा को पहचान लिया। इसके बाद वह अपने चाचा से संगीत की शिक्षा लेने लगे। मन्ना डे 40 के दशक में अपने चाचा के साथ संगीत के क्षेत्र में अपने सपनों को साकार करने के लिये मुंबई आ गये। और फिर यहीं के होकर रह गये।वह जुहू विले पार्ले में रहते थे।

8 जून 2013 को सीने में संक्रमण के बाद उन्हें बंगलोर के एक अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती कराया गया।9 जून 2013 को अचानक उनकी मौत की खबर आयी, किन्तु चिकित्सकों ने कहा कि वे अभी जिन्दा हैं और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। संक्रमण से बचाने हेतु वेन्टिलेटर पर गहन   चकित्स्कीय परीक्षण किये जा रहे हैं। 9 जुलाई 2013को उनका स्वास्थ्य ठीक हो गया था और चिकित्सकों द्वारा सूचना दी गयी कि उन्हें वेन्टिलेटर से हटा दिया गया है। उन्हें साँस में तकलीफ के साथ गुर्दे की भी समस्या थी। वह डायलिसिस के दौर से भी गुजर रहे थे।24 अक्टूबर 2013 को सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर शरीर के कई अंगों के काम न करने से अस्पताल में ही उनका देहान्त हो गया। अन्तिम समय में मन्ना डे के पास उनकी पुत्री शुमिता व दामाद ज्ञानरंजन देव मौजूद थे।
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प्रबोध चंद्र डे (1 मई 1919 - 24 अक्टूबर 2013), जिन्हें उनके मंच नाम मन्ना डे के नाम से जाना जाता है, एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित भारतीय पार्श्व गायक, संगीत निर्देशक, संगीतकार और भारतीय शास्त्रीय गायक थे। उन्हें हिंदी फिल्म उद्योग के सबसे बहुमुखी और प्रसिद्ध गायकों में से एक माना जाता है। वह हिंदी व्यावसायिक फिल्मों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की सफलता का श्रेय पार्श्व गायकों में से एक थे। उन्होंने 1942 में तमन्ना फिल्म से शुरुआत की। एसडी बर्मन द्वारा रचित गीत "ऊपर गगन विशाल" के बाद उन्होंने सफलता देखी और 2013 तक 4,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए। भारत सरकार ने उन्हें 1971 में पद्म श्री से सम्मानित किया। 2005 में पद्म भूषण और 2007 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार। डे ने सभी प्रमुख क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में गाया, हालांकि मुख्य रूप से हिंदी और बंगाली में। डे ने भोजपुरी, मगधी में भी गाया, मैथिली, पंजाबी, असमिया, उड़िया, कोंकणी, सिंधी, गुजराती, मराठी, कन्नड़, मलयालम और नेपाली। हिंदी पार्श्व गायन में उनका चरम काल 1953 से 1976 तक था।
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प्रीति गांगुली

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