रविवार, 12 अप्रैल 2026

आशा भोसले


आशा भोसले
🎂08 सितंबर 1933
⚰️12 अप्रैल 2026

जन्म की तारीख और समय: 8 सितंबर 1933, सांगली
मृत्यु की जगह और तारीख: 12 अप्रैल 2026
बच्चे: हेमन्त भोंसले, वर्षा भोंसले, आनंद भोंसले
भाई: लता मंगेशकर, उषा मंगेशकर, महेंद्र कपूर, हृदयनाथ मंगेशकर, मीना मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी
इनाम: पद्म विभूषण, फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका, ज़्यादा जानकारी देखें
पति: राहुल देव बर्मन (विवा. 1980–1994), गणपतराव भोसले (विवा. 1949–1960)
माता-पिता: दीनानाथ मंगेशकर, शीवंती मंगेशकर
पोते या नाती: Zanai Bhosle, चैतन्य भोंसले
लंबाई: 1.57 मी

आशा गणपतराव भोसले (जन्म: 8 सितम्बर 1933 to 12 अप्रैल 2026) फ़िल्मों की मशहूर पार्श्वगायिका हैं। लता मंगेशकर की छोटी बहन और दिनानाथ मंगेशकर की पुत्री आशा ने फिल्मी और गैर फिल्मी लगभग 15-16 हजार गाने गाये हैं और इनकी आवाज़ के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, मलयालम, अंग्रेजी और रूसी भाषा के भी अनेक गीत गाए हैं। आशा भोंसले ने अपना पहला गीत वर्ष 1948 में सावन आया फिल्म चुनरिया में गाया। 

आशा की विशेषता है कि इन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल और पॉप संगीत हर क्षेत्र में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है और एक समान सफलता पाई है। उन्होने आर॰ डी॰ बर्मन से दूसरा विवाह किया था।


आशा भोसले का जन्म 08 सितम्बर 1933 को महाराष्ट्र के ‘सांगली’ जिले एक मराठी परिवार में हुआ। इनके पिता दिनानाथ मंगेशकर प्रसिद्ध गायक एवं नायक थे। जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा काफी छोटी उम्र में ही आशा जी को दी। आशा जी जब केवल 9 वर्ष की थीं, इनके पिता का स्वर्गवास हो गया । पिता के मरणोपरांत, इनका परिवार पुणे से कोल्हापुर और उसके बाद मुंबई आ गया। परिवार की सहायता के लिए आशा और इनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने गाना और फिल्मों में अभिनय शुरू कर दिया। 1943 में इन्होंने अपनी पहली मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ में गीत गाया। यह गीत ‘चला चला नव बाळा...’ दत्ता डावजेकर के द्वारा संगीतबद्ध किया गया था। 1948 में हिन्दी फिल्म ‘चुनरिया’ का गीत ‘सावन आया।..’ हंसराज बहल के लिए गाया। दक्षिण एशिया की प्रसिद्ध गायिका के रूप में आशा जी ने गीत गाए। फिल्म संगीत, पॉप, गज़ल, भजन, भारतीय शास्त्रीय संगीत, क्षेत्रीय गीत, कव्वाली, रवीन्द्र संगीत और नजरूल गीत इनके गीतों में सम्मिलित है। इन्होंने 14 से ज्यादा भाषाओं में गीत गाए यथा– मराठी, आसामी, हिन्दी, उर्दू, तेलगू, मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, भोजपुरी, तमिल, अंग्रेजी, रशियन, जाइच, नेपाली, मलय और मलयालम। 12000 से अधिक गीतों को आशा जी ने आवाज दी।महान गायक किशोर कुमार आशा जी के सबसे मनपसंद गायक थे।
12 अप्रैल 2026 को उनकी मृत्यु हो गई


16 वर्ष की उम्र में अपने 31 वर्षीय प्रेमी ‘गणपतराव भोसले’ (1916-1966) के साथ घर से पलायन कर पारिवारिक इच्छा के विरूद्ध विवाह किया। इस वजह से उनके रीश्तो में दरार आई ।गणपत राव लता जी के निजी सचिव थे। यह विवाह असफल रहा। पति एवं उनके भाइयों के बुरे वर्ताव के कारण इस विवाह का दु:खान्त हो गया। 1960 के आसपास विवाह विच्छेद के बाद आशा जी अपनी माँ के घर दो बच्चों और तीसरे गर्भस्थ शिशु (आनन्द) के साथ लौट आईं। 1980 ई. में आशा जी ने सचिन देव बर्मण के बेटे ‘राहुल देव बर्मन’(पंचम) से विवाह किया। यह विवाह आशा जी ने राहुल देव वर्मन के अंतिम सांसो तक सफलतापूर्वक निभाया।

आशा जी का घर दक्षिण मुम्बई, पेडर रोड क्षेत्र में प्रभुकुंज अपार्टमेंट में स्थित है। इनके तीन बच्चे हैं। साथ ही पाँच पौत्र भी है। इनका सबसे बड़ा लड़का हेमंत भोसले है। हेमंत ने पायलट के रूप में अधिकांश समय बिताया। आशाजी की बेटी जो हेमंत से छोटी है “वर्षा”। वर्षा ने ‘द सनडे ऑबजरवर’ और ‘रेडिफ’ के लिए कॉलम लिखने का काम किया। आशाजी का सबसे छोटा पुत्र आनन्द भोसले है। आनन्द ने बिजनेस और फिल्म निर्देशन की पढाई की। आनन्द भोसले ही आशा के करियर की इन दिनों देखभाल कर रहे हैं। हेमंत भोसले के सबसे बड़े पुत्र चैतन्या (चिंटु) “बॉय बैण्ड” के सफल सदस्य के रूप में विश्व संगीत से जुड़े हुए है। अनिका भोसले (हेमंत भोसले की पुत्री) सफल फोटोग्राफर के रूप में कार्य कर रही है। आशा जी की बहनें लता मंगेसकर और उषा मंगेसकर गायिका है। इनकी अन्य दो सहोदर बहन मीना मंगेसकर और भाई हृदयनाथ मंगेसकर संगीत निर्देशक है। आशाजी गायिका के अलावा बहुत अच्छी कुक (रसोईया) है। कुकिंग इनका पसंदीदा शौक है। बॉलीवुड के बहुत सारे लोग आशा जी के हाथों से बनें ‘कढाई गोस्त’ एवं ‘बिरयानी’ के लिए अनुरोध करते हैं। आशा जी भी इनकार नहीं करती है। बॉलीवुड के ‘कपुर’ खानदान में आशा जी द्वारा बनाए गये ‘पाया करी’, ‘गोझन फिश करी’ और ‘दाल’ काफी प्रसिद्ध है। एक बार जब ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक साक्षात्कार में पुछा गया कि यदि आप गायिका न होती तो क्या करती? आशा जी ने जबाब दिया कि मैं एक अच्छी रसोईया (कुक) बनती। आशा जी एक सफल रेस्तरॉ संचालिका है। इनके रेस्तरॉ दुबई और कुवैत में आशा नाम से प्रसिद्ध है।‘वाफी ग्रुप’ द्वारा संचालित रेस्तरॉ में आशा जी के 20% भागीदारी है। वाफी सीटी दुबई और दो रेस्तरॉ कुवैत में पारम्परिक उत्तर भारतीय व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। आशा जी ने ‘कैफ्स’ को स्वंय 6 महीनो का ट्रेंनिग दिया है। दिसम्बर 2004 ‘मेनु मैगजीन’ के रिपोर्ट के अनुसार ‘रसेल स्कॉट’ जो ‘हैरी रामसदेन’ के प्रमुख है आने वाले पाँच सालो में आशा जी के ब्रैण्ड के अंतर्गत 40 रेस्तरॉ पूरे यू॰के॰ के अन्दर खोलने की घोषणा की है। इसी क्रम में आशा जी की की रेस्तरॉ ‘बरमिंगम’ यू॰के॰ में खोला गया है। आशा जी की फैशन और पहनावे में सफेद साड़ी चमकदार किनारो वाली, गले में मोतियों के हार और हीरा प्रसिद्ध है। आशा जी एक अच्छी ‘मिमिक्री’ अदाकारा भी है।

एक समय जब प्रसिद्ध गायिका यथा- गीता दत्त , शमशाद बेगम और  लता मंगेशकर का जमाना था। चारों ओर इन्ही का प्रभुत्व था। आशा जी गाना चाहती थी पर इन्हे गाने का मौका तक नहीं दिया जाता था। आशा जी सिर्फ दुसरे दर्जे की फिल्मों के लिए ही गा पाती थी। 1950 के दशक में बॉलीवुड के अन्य गायिकाओं की तुलना में आशा जी ने कम बजट की ‘बी’ और ‘सी’ ग्रेड फिल्मों के लिए बहुत से गीत गाए। इनके गीतो के संगीतकार ए. आर. कुरैशी (अल्ला रख्खा खान), सज्जाद हुसैन और गुलाम मोहम्मद थे। जो काफी असफल रहे। 1952 ई. में  दलीपकुमार अभिनीत फिल्म ‘संगदिल’ जिसके संगीतकार सज्जाद हुसैन थे, ने प्रसिद्धि दिलाई। परिणाम स्वरूप  बिमल राय ने एक मौका आशा जी को अपनी फिल्म ‘परिणीता’ (1953) के लिए दिया।  राजकपूर ने गीत ‘नन्हे मुन्ने बच्चे।...’ के लिए   मुहम्मद रफी के साथ फिल्म ‘बुट पॉलिश्’(1954) के लिए अनुबंधित किया जिसने काफी प्रसिद्धि आशा जी को दिलाई। ओ.पी. नैयर ने आशा जी को बहुत बड़ा अवसर ‘सी. आई. डी.’(1956) के गीत गाने के लिए दिया। इस प्रकार 1957 की फिल्म ‘नया दौर’ बी आर. चोपड़ा ने नैयर साहब के संगीतकार रूप में आशा जी को बी. आर. चोपड़ा से पहली सफलता प्राप्त हुई। इस साझेदारी ने कई प्रसिद्ध गीतो को जनमानस के बीच लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। फिर सचिन देव बर्मनऔर  रवि जैसे संगीतकारो ने भी आशा जी को मौका दिया। 1966 ई. में संगीतकार आर. डी. वर्मन की सफलतम फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ में आशा जी ने आर. डी. वर्मन के साथ काफी प्रसिद्धि बटोरी। 1960 से 1970 के बीच प्रसिद्ध डॉसर हेलन की आवाज बनी। ऐसा कहा जाता है कि जब भी आशा जी गाती थी तो हेलन रिकाडिंग के समय मौजुद रहती थी ताकि गाने को अच्छी तरह समझ सके और अच्छी तरह नृत्य उस गाने पर कर सके। आशा जी और हेलन के प्रसिद्ध गीतों में ‘पिया तु अब तो आजा...’(कारवॉ), ‘ ओ हसीना जुल्फो वाली...’(तीसरी मंजिल) और ‘ये मेरा दिल...(डॉन) शामिल है। 1981 में उमराव जान और इजाजत (1987) में पारम्परिक गज़ल गाकर आशा जी ने आलोचकों को करारा जबाब दिया। अपनी गायन प्रतिभा का लोहा मनवाया। इन्ही दिनो इन्हे उपर्युक्त दोनों फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ‘बेस्ट फिमेल प्लेबैक सिंगर’ मिला। आशा जी 1990 तक लगातार गाती रही। 1995 की हिट फिल्म ‘रंगीला’ से एक बार पुन: अपनी दुसरी पारी का आरंभ किया। 2005 में 72 वर्षीय आशा जी ने तमिल फिल्म ‘चन्द्रमुखी’ और पॉप संगीत ‘लक्की लिप्स...’ सलमान खान अभिनित के लिए गाया जो चार्ट बस्टर में प्रसिद्ध रहा। अक्टूबर 2004,’द वेरी बेस्ट ऑफ आशा भोसले’, ‘द क्वीन ऑफ बॉलीवुड’ आशा जी के द्वारा गाए गीतो का एलबम (1966-2003) रिलिज किया गया।


आशा भोसले जी के गायिकी के कैरियर में चार फिल्मे मिल का पत्थर, साबित हुई— नया दौर (1957), तीसरी मंजिल (1966), उमरॉव जान (1981) और रंगीला (1995)। नया दौर (1957):— आशा भोसले जी की पहली बड़ी सफल फिल्म बी. आर. चोपड़ा की ‘नया दौर’(1957) थी। मो. रफी के साथ गाए उनके गीत यथा ‘माँग के हाथ तुम्हारा....’, ‘साथी हाथ बढ़ाना...’ और ‘उड़े जब जब जुल्फे तेरी...’ शाहिओ. पी. नैयर द्वरा संगीतबद्ध एक खास पहचान दी। आशा जी ने ओ.पी. नैयर के साथ पहले भी काम किया था पर यह पहली फिल्म थी जिसके सारे गीत आशा जी प्रमुख अभिनेत्री के लिए गाई थी। प्रोड्यूसर बी. आर. चोपडा ने नया दौर में उनकी प्रतिभा की पहचान कर आने वाली बाद की फिल्मों में पुन: मौका दिया। उनमे प्रमुख फिल्म— वक्त, गुमराह, हमराज, आदमी और इंसान और धुंध आदि है। तीसरी मंजिल (1966):- आशा भोसले ने राहुल देव वर्मन की ‘तीसरी मंजिल’(1966) से काफी प्रसिद्ध हुई। जब पहले उन्होने गाने की धुन सुनी तो गीत ‘आजा आजा...’ इस गीत को गाने से इनकार कर दिया था, जो वेस्टर्न डांस नम्बर पर आधारित थी। तब आर. डी. वर्मन ने संगीत को बदलने का प्रस्ताव आशा जी को दिया किंतु आशा जी ने यह चैलेंज स्वीकार करते हुए गीत गाए। 10 दिन के अभ्यास के बाद जब अंतिम तौर पर यह खास गीत आशा जी ने गाए तो खुशी के कायल आर. डी. वर्मन ने 100 रूपये के नोट आशा जी के हाथ में रख दिए। आजा आजा.... और इस फिल्म के अन्य गीत – ओ हसीना जुल्फो वाली... और ओ मेरे सोना रे.... ये सभी गीत रफी जी के साथ तहलका मचा दिया। शम्मी कपूर इस फिल्म के नायक ने एक बार कहा था “यदि में पास मो. रफी इस फिल्म के गीतो को गाने के लिए नहीं होते तो मै आशा भोसले को यह कार्य देता”। उमराव जान (1981):- रेखा अभिनित ‘उमराव जान’(1981) आशा जी ने गज़ल गाया यथा- दिल चीज क्या है।..., इन आँखों की मस्ती के..., ये क्या जगह है दोस्तों... और जुस्त जु जिसकी थी।..। इन गज़लों के संगीतकार खय्याम थे जिन्होने आशा जी से सफलतापूर्वक गज़लो को गाने के लिए स्वरों के उतार चढाव को समझाया। आशा जी स्वयं आश्चर्यचकित थी कि वह इन गज़लो को सफलतापूर्वक गाई है। इन गज़लों ने आशा जी को प्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया और उनकी बहुमुखी प्रतिभा साबित हुई। रंगीला (1995):- सन 1995 में 62 वर्षीय आशा जी ने युवा अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर के लिए फिल्म रंगीला में गाई। इन्होंने फिर अपने चाहनेवालों को आश्चर्यचकित कर दिया। सुपर हिट गीत यथा- तन्हा तन्हा... और रंगीला रे... गीत ए. आर. रहमान के संगीत निर्देशन में गाई जो काफी प्रसिद्ध हुआ। बाद में कई अन्य गीतों को ए. आर. रहमान के निर्देशन में गाई। तन्हा तन्हा... गीत काफी प्रसिद्ध हुआ और आज भी लोग गुनगुनाते हैं।

निजी एल्बम

8 सितम्बर 1987 आशा जी के जन्म दिवस पर “दिल पड़ोसी है” नामक एलबम, गुलजार द्वारा रचित और आर.डी.वर्मन द्वारा संगीतबद्ध जारी किया गया। आशा जी उस्ताद अली अकबर खान से 1995 में विशेष रूप से मिली, बाद में आशा जी ने उस्ताद अली अकबर खान के साथ ग्यारह बंदिसे रिकार्ड की ’कैलीफिर्निया मे’। जो ग्रेमी अवार्ड के लिए नामांकित हुआ। 1990 में आर.डी.वर्मन द्वारा संगीतबद्ध गीतो को आशा जी ने ‘रिमिक्स’ कर प्रयोगात्मक अनुभव किया जो कई लोगों द्वारा आलोचना का विषय बना। संगीतकार खय्याम ने भी इसकी आलोचना की। किंतु ‘राहुल और मै’ नामक एलबम काफी प्रसिद्ध रही। इंडोपॉप एलबम ‘जानम समझा करो’ लेस्ली लुईस के साथ काफी प्रसिद्ध रहा। कई पुरस्कारो सहित 1997 एम.टी.वी. एवार्ड इस खास एलबम को मिला। 2002 ई. में अपनी एलबम ‘आप की आशा’ जो आठ गीतों वाला वीडियो एलबम था, खुद आशा जी ने संगीत तैयार किया। इसके गीत मुजरूह सुल्तांनपुरी द्वारा रचित (अंतिम रचना सुलतान पुरी द्वारा) था। 21 मई 2001 को सचिन तेन्दुलकर द्वारा मुम्बई में एक खास पार्टी में यह एलबम जारी किया गया।

जब पाकिस्तानी गायक अदनान सामी सिर्फ 10 वर्ष के थे तब आशा जी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। आशा जी ने अदनान सामी को गायन प्रतिभा विकसित कर आगे बढने के लिए प्रेरित किया। जब अदनान बड़े हुए तब आशा जी के साथ’कभी तो नज़र मिलाओ’ एलबम में गीत गाए जो काफी प्रसिद्ध रहा। फिर ‘बरसे बादल’ नामक एलबम में भी अदनान सामी के साथ गाई। आशा जी ने कई एलबमों के लिए गज़ल गाई यथा-मीराज-ए-गज़ल, अबशहर-ए-गज़ल और कशीश। 2005 में आशा जी ने एलबम ‘आशा’ जो चार गज़ल गायको को समर्पित था- मेंहदी हसन, गुलाम अली, फरीदा खानम और जगजीत सिंह जारी किया। इस एलबम में आशा जी के आठ पसंदीदा गजल यथा- फरीदा खानम की ‘आज जाने की जिद ना करो..., गुलाम अली की ‘चुपके चुपके...’, ‘आवारगी...’ और ‘दिल में एक लहर...’ जगजीत सिह की ‘आहिस्ता आहिस्ता...’, मेहदी हसन की ‘रंजीश है सही...’,’रफ्ता रफ्ता...’ और ‘मुझे तुम नज़र से...’ शामिल था। इसके संगीतकार पंडित सोमेश माथुर थे जिन्होने युवाओ के ध्यान में रखते हुए संगीत दिए। आशाजी के 60वें जन्मदिवस पर इ.एम.आई. इंडिया ने तीन कैसेट जारी किए- ‘बाबा मै बैरागन होंगी (भक्ति गीत)’, ‘द गोलडेन कलैक्सन-गज़ल (संगीतकार गुलाम अली, आर.डी.वर्मन और नज़र हुसैन)’ और ‘द गोलडेन कलेक्शन- द एवर भरसाटाइल आशा भोसले’ जो 44 प्रसिद्ध गीतो का संग्रह था। 2006 में आशा जी ने ‘आशा एण्ड फ्रैण्डस’ नामक एलबम रिकार्ड किया जिनमे युगल गीत संजय दत्त और उर्मिला मातोंडकर के साथ गाए साथ ही प्रसिद्ध क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ आशा जी ने ‘यू आर द वन फॉर मी (हाँ मै तुम्हारी हूँ)’ गीत गाए। इन गीतो के संगीतकार समीर टण्डन थे। इसका विडियो निर्माण एस. रामचन्द्रन ने किया (जो पत्रकार से निर्देशक् बने थे)।

फिल्म फेयर बेस्ट फिमेल प्लेबैक अवार्ड


1968-“गरीबो की सुनो...”(दस लाख - 1966)
1969-“परदे में रहने दो...”(शिकार - 1968)
1972- “पिया तु अब तो आजा...”(कारवाँ - 1971)
1973-“दम मारो दम...”(हरे रामा हरे कृष्णा - 1972)
1974-“होने लगी है रात...”(नैना - 1973)
1975-“चैन से हमको कभी...”(प्राण जाये पर वचन ना जाये - 1974)
1979-”ये मेरा दिल...”(डॉन - 1978)

अन्य पुरस्कार

1996-स्पेशल अवार्ड (रंगीला- 1995)
2001-फिल्म फेयर लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
1981- “दिल चीज क्या है।..”(उमरॉव जान)
1986 “मेरा कुछ सामान...”(इजाजत)
अन्य यादगार पुरस्कार
1987- नाइटीनेंगल ऑफ एशिया अवार्ड (इंडो पाक एशोशिएशन यु.के.)
1989- लता मंगेस्कर अवार्ड (मध्य प्रदेश सरकार)  
1997- स्क्रीन वीडियोकॉन अवार्ड (जानम समझा
करो- एलबम के लिए)

1997- एम.टी.वी. अवार्ड (जानम समझा करो- एलबम के लिए)
1997- चैनल वी अवार्ड (जानम समझा करो- एलबम के लिए)
1998- दयावती मोदी अवार्ड
1999- लता मंगेस्कर अवार्ड (महाराष्ट्र सरकार)
2000- सिंगर ऑफ द मिलेनियम (दुबई)
 2000- जी गोल्ड बॉलीवुड अवार्ड (मुझे रंग दे- फिल्म तक्षक के लिए)
2001- एम.टी.वी. अवार्ड (कमबख्त इशक – के लिए) 
2002- बी.बी.सी. लाइफटाइम एचीवमेंट अवार्ड (यू॰के॰ प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के द्वारा प्रदत) 
2002- जी सीने अवार्ड फॉर बेस्ट प्लेबैक सिंगर - फिमेल (राधा कैसे न जले..-फिल्म लगान के लिए)

2002- जी सीने स्पेशल अवार्ड फॉर हॉल ऑफ फेम 
2002- स्क्रीन वीडियोकॉन अवार्ड (राधा कैसे न जले..-फिल्म लगान के लिए)

2002-सैनसुई मुवी अवार्ड (राधा कैसे न जले..-फिल्म लगान के लिए)

2003- सवराल्या येशुदास अवार्ड (भारतीय संगीत में उत्कृष्ट योगदान के लिए) 2004- लाईविग लीजेंड अवार्ड (फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर ऑग कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के द्वारा)

2005- एम.टी.वी. ईमीज, बेस्ट फीमेल पॉप ऐक्ट (आज जाने की जिद न करो। .) 2005- मोस्ट स्टाइलिश पीपुल इन म्यूजिक

 
सम्मान एवं विशेष पहचान

1997 मई आशा जी पहली भारतीय गायिका बनी जो ‘ग्रेमी अवार्ड के लिए नामांकित की गई (उस्ताद अली अकबर खान के साथ एक विशेष एलबम के लिए)
आशा जी “सत्तरहवी महाराष्ट्र स्टेट अवार्ड” प्राप्त की।
भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए सन 2000 में “दादा साहेब फाल्के अवार्ड” से सम्मानित की गई।
आशा जी को साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि से अमरावती विश्वविद्यालय एवं जलगाँव विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया गया।
“द फ्रिडी मरकरी अवार्ड” कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए आशा जी को इस खास पुरस्कार से सममानित किया गया।
नवम्बर 2002 में आशा जी को “बर्मिंघम फिल्म फेस्टिवल” विशेष रूप से समर्पित किया गया।
“पद्मविभूषण” के द्वारा राष्टपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने 5 मई 2008 को आशा जी को सम्मानित किया। यह सम्मान भारत सरकार के महत्वपूर्ण सम्मानो में है।

सोमवार, 1 दिसंबर 2025

प्रीति गांगुली


●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

*जन्म की तारीख और समय: 17 मई 1953, मुम्बई*

*मृत्यु की जगह और तारीख: 2 दिसंबर 2012, मुम्बई*

*भाई: भारती जाफ़री, रूपा गाँगुली, अरूप गाँगुली*

*माता-पिता: अशोक कुमार, शोभा देवी*

●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●

प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार की बेटी अभिनेत्री प्रीति गांगुली के जन्मदिन पर हार्दिक श्रधांजलि
प्रीति गांगुली हिंदी सिनेमा की चरित्र अभिनेत्री थीं, जिन्होंने 1970 और 1980 के दशक में बॉलीवुड में कई कॉमिक भूमिकाएं निभाई थीं।

प्रीति गांगुली का जन्म 17 मई, 1953 को मुम्बई में हुआ था। वह प्रसिद्ध भारतीय फ़िल्म अभिनेता अशोक कुमार और शोभा देवी की बेटी थीं। गायक किशोर कुमार और अभिनेता अनूप कुमार उनके चाचा थे।रूपा गांगुली और अरुप गांगुली उनके भाई-बहन हैं।वह बेहद प्रतिभाशाली थीं और कॉमेडी भूमिकाओं में बहुत अच्छी तरह से प्रदर्शन करती थीं।1993 में उन्होंने अपने पिता 'अशोक कुमार की अकादमी ऑफ़ नाटक कला' के नाम पर एक अभिनय स्कूल की शुरुआत की।प्रीति गांगुली का निधन 2 दिसंबर, 2012 को मुंबई में हो गया

प्रीति गांगुली की मुख्य फ़िल्में इस प्रकार हैं-

तुम हो ना (2005)

आशिक बनाया आपने (2005)
उत्तर दक्षिण (1987)
सुपरमैन (1987)
प्यार के काबिल (1987)
वक्त की दीवार (1981)
बंदिश (1980)
थोड़ी सी बेवफाई (1980)
झूठा कहीं का (1979)
दामाद (1978)
अनमोल तस्वीर (1978)
खट्टा मीठा (1978)
तृष्णा (1978)
दिल्लगी (1978)
आहूति (1978)
अनुरोध (1977)
बालिका बधू (1976)
रानी और लालपरी (1975)
परिणय (1974)


शुक्रवार, 14 जून 2024

मिथुन चक्रवर्ती


*🎂जन्म: 16 जून 1950*

कोलकाता
बच्चे: महाक्षय चक्रवर्ती, नमाशी चक्रवर्ती, दिशानी चक्रवर्ती, ज़्यादा
पत्नी: योगिता बाली (विवा. 1979), हेलेना लूक (विवा. 1979–1979)
बहन: कल्याणी बैनर्जी
माता-पिता: बसँतोकुमार चक्रवर्ती, सांतिरानी चक्रवर्ती
🔛

*मिथुन चक्रवर्ती (बांग्ला: মিঠুন চক্রবর্তী, / मिठुन चक्रवर्ती) (बचपन का नाम गौरांग चक्रवर्ती) का जन्म 16 जून, 1950 को हुआ। ये भारत के एक फिल्म अभिनेता, सामाजिक कार्यकर्ता, उद्यमी और राज्यसभा के सदस्य[4] हैं। मिथुन ने अपने अभिनय की शुरुआत कला फिल्म मृगया (1976) से की, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पहला राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। 1980 के दशक के अपने सुनहरे दौर में एक डांसिंग स्टार के रूप में उनके बहुत सारे प्रसंशक बने और खुद को उन्होंने भारत के सबसे लोकप्रिय प्रमुख अभिनेता के रूप में स्थापित किया, विशेष रूप से 1982 में बहुत बड़ी हिट फिल्म डिस्को डांसर में स्ट्रीट डांसर जिमी की भूमिका ने उन्हें लोकप्रिय बनाया। 1980s के दशक मे अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा लोकप्रिय कलाकार थे।*

🔛कुल मिलाकर बॉलीवुड की 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय के अलावा उन्होंने बांग्ला, ओड़िया और भोजपुरी में भी बहुत सारी फिल्में की। मिथुन मोनार्क ग्रुप के मालिक भी हैं जो होस्पिटालिटी सेक्टर में कार्यरत है।

🔛अभी बीजेपी में है

🔛यह बहुत ही कम लोगों को ज्ञात है कि मिथुन फिल्म उद्योग में प्रवेश करने से पहले एक कट्टर नक्सली थे। लेकिन उनके परिवार को कठिनाई का सामना तब करना पड़ा जब उनके एकमात्र भाई की मौत दुर्घटनावश बिजली के करंट लगने से हो गयी। इसके बाद मिथुन अपने परिवार में लौट आये और नक्सली आन्दोलन से खुद को अलग कर लिया, हालांकि ऐसा करने के कारण नक्सलियों से उनके जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता था, क्योंकि नक्सलवाद को वन-वे रोड माना जाता रहा। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और जीवन में उन्हें एक आइकोनिक दर्जा प्रदान करने में प्रमुख कारण बना। यह बात भी कम लोग ही जानते हैं कि उन्होंने मार्शल आर्ट में महारत हासिल की है।

मिथुन ने भारतीय अभिनेत्री योगिता बाली से शादी की और वे चार बच्चे, तीन बेटे और एक बेटी के पिता हैं। ज्येष्ठ पुत्र, मिमो चक्रवर्ती; जिन्होंने 2008 में बॉलीवुड फिल्म जिमी से अपने अभिनय जीवन की शुरुआत की; उनका दूसरा बेटा, रिमो चक्रवर्ती जिसने फिल्म फिर कभी में छोटे मिथुन की भूमिका में अभिनय किया। मिथुन के अन्य दो बच्चे नमाशी चक्रवर्ती और दिशानी चक्रवर्ती अभी पढाई कर रहे हैं।

कई सूत्रों का दावा है कि चक्रवर्ती का 1986 से 1987 तक श्रीदेवी नाम की एक अभिनेत्री के साथ एक रिश्ता था, लेकिन श्रीदेवी ने मिथुन से अपना संबंध तब ख़त्म कर दिया जब उन्हें पता चला कि उनका अपनी पहली पत्नी योगिता बाली से तलाक नहीं हुआ है। माना जाता है कि चक्रवर्ती और श्रीदेवी ने गोपनीय रूप से शादी की है और बाद में यह सम्बन्ध रद्द हो गया।

🔛1980 आखिरी इंसाफ
1980 कस्तूरी
1980 ख़्वाब
1980 द नक्सेलाइटस
1980 टैक्सी चोर
1979 तराना
1979 अमर दीप
1979 प्रेम विवाह
1979 सुरक्षा
1978 फूल खिले हैं गुलशन गुलशन
1978 हमारा संसार
1978 मेरा रक्षक
1977 मुक्ति
1976 दो अनजाने
1976 मृग्या

बुधवार, 22 मई 2024

कोवेलामुदी राघवेंद्र राव


*🎂जन्म 23 मई 1942*


प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता निर्देशक एवं पटकथा लेखक के राघवेंद्र राव के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

कोवेलामुदी राघवेंद्र राव (जन्म 23 मई 1942) एक भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता हैं, जिन्हें मुख्य रूप से तेलुगु सिनेमा में और कुछ हिंदी फिल्मों का निर्देशन करने के लिए जाना जाता है

के राघवेंद्र राव का जन्म 23 मई 1942 को अनुभवी फ़िल्म निर्देशक के.एस. प्रकाश राव और कोटेश्वरम्मा के घर हुआ था वह अभिनेता से फिल्म निर्माता बने प्रकाश कोवेलामुदी के पिता भी हैं।  राघवेंद्र राव 2015 से 2019 तक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड में कार्यकारी सदस्य थे

उन्होंने चार राज्य नंदी पुरस्कार और पांच फिल्मफेयर दक्षिण पुरस्कार प्राप्त किए हैं। चार दशकों से अधिक के फ़िल्मी करियर में, राव ने रोमांटिक कॉमेडी, फ़ैंटेसी, मेलोड्रामा, एक्शन थ्रिलर, जीवनी और रोमांटिक फ़िल्मों जैसी कई शैलियों में सौ से अधिक फ़ीचर फ़िल्मों का निर्देशन किया है। 

के राघवेन्द्र राव को बोब्बिली ब्राह्मण (1984), और पेली संदादी (1996) जैसी फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राज्य नंदी पुरस्कार मिला  उन्होंने ड्रामा फिल्म प्रेमा लेखलु (1977), फ़ंतासी फ़िल्म जगदेका वीरुडु अथिलोका सुंदरी (1990) और रोमांटिक फ़िल्म अल्लारी प्रियुडु (1993) के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक - तेलुगु के लिए फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार प्राप्त किया  राव को अन्नमय्या (1997) जैसी जीवनी संबंधी फिल्मों में उनके काम के लिए जाना जाता है, जिसने दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते, और 1998 के भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्यधारा के खंड में भी प्रदर्शित किया गया था।राव को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए नंदी पुरस्कार, फिल्म में उनके काम के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला श्री मंजूनाथ (2001), श्री रामदासु (2006), शिरडी साईं (2012) और ओम नमो वेंकटेशय (2017) जैसी उनकी अन्य जीवनी संबंधी कृतियों को कई राजकीय सम्मान प्राप्त हुए।

1987 की सामाजिक समस्या वाली फिल्म अग्नि पुत्रुडु और 1988 की एक्शन थ्रिलर आखिरी पोराटम जैसी उनकी मुख्यधारा की फिल्मों को क्रमशः 11वें और 12वें भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्यधारा के खंड में प्रदर्शित किया गया था 1992 में, उन्होंने मेलोड्रामा घराना मोगुडु का निर्देशन किया, जिसका प्रीमियर 1993 के भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्यधारा के खंड में हुआ यह बॉक्स ऑफिस पर ₹10 करोड़ (US$1.3 मिलियन) से अधिक की कमाई करने वाली पहली तेलुगू फिल्म बन गई इसके बाद, उन्होंने तत्काल हिट अल्लारी प्रियुडु (1993) का निर्देशन किया, जिसका प्रीमियर 1994 के भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्यधारा के खंड में भी हुआ था

उन्हें श्रीदेवी, तब्बू, तापसी पन्नू, मांचू
लक्ष्मी, श्रीलीला, वेंकटेश, महेश बाबू, अल्लू अर्जुन, एस.एस. राजामौली, और मार्तंड के. वेंकटेश जैसे तेलुगु फिल्म उद्योग में कई अभिनेताओं, अभिनेत्रियों और तकनीशियनों को पेश करने का श्रेय भी दिया जाता है।

बुधवार, 15 मई 2024

सोनल चौहान

जन्म तिथि: 16-मई -1985

जन्म स्थान: नोएडा, उत्तर प्रदेश, भारत

पेशा: अभिनेत्रि, मॉडल

राष्ट्रीयता: भारतीय फ़िल्म कलाकार संरक्षण केंद्र 

सोनल चौहान (जन्म 16 मई 1987) एक भारतीय अभिनेत्री, गायिका और मॉडल हैं, जो मुख्य रूप से तेलुगु और हिंदी फिल्मों में काम करती हैं।

सोनल चौहान

सोनल चौहान एक भारतीय फैशन मॉडल, गायिका और अभिनेत्री हैं जो मुख्य रूप से तेलुगु और हिंदी सिनेमा में काम करती हैं।
उन्होंने कई सौंदर्य प्रतियोगिता जीती हैं और फिल्म जन्नत में एक अभिनेत्री के रूप में अपनी शुरुआत की है।

🔴चौहान का जन्म एक राजपूत परिवार में हुआ था । उन्होंने नोएडा में दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की । [इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में गार्गी कॉलेज में दर्शनशास्त्र सम्मान का अध्ययन किया। 

📽️   वह पहली बार पर्दे पर हिमेश रेशमिया की आप का सुरूर में दिखाई दी थीं ।  वह इमरान हाशमी के साथ दिखाई दी । उन्होंने भट्ट परिवार के साथ तीन फिल्मों का करार भी किया है, जिनमें से दो लंबित हैं। उन्होंने केके के साथ फिल्म 3जी में "कैसे बताऊं" गाने के लिए एक युगल गीत भी गाया ।

उन्होंने नंदमुरी बालकृष्ण की सह-अभिनीत एक तेलुगु फिल्म लीजेंड में अभिनय किया और टॉलीवुड में अपनी वापसी की । उनकी अगली परियोजना पंडगा चेसको थी । 2015 की शुरुआत में, उसने दो तेलुगु फिल्में साइन कीं: आर्य के साथ साइज जीरो और नंदामुरी कल्याण राम के साथ शेर । 

जुलाई 2015 की शुरुआत में, उसने एक और तेलुगु फिल्म, डिक्टेटर साइन की । 

2008 जन्नत जोया माथुर हिंदी 
इंद्रधनुष स्वप्ना तेलुगू 
2010 चेलुवे निन्ने नोडालु प्रकृति कन्नडा 
2011 बुड्डा... होगा तेरा बाप हिंदी 
2012 पहला सितारा 
2013 3जी शीना 
2014 दंतकथा स्नेहा तेलुगू 
2015 पंडगा चेस्को अनुष्का (स्वीटी) 
शेर नंदिनी 
आकार शून्य सिमरन द्विभाषी फिल्म 
इंजी इडुप्पाझगी तामिल 
2016 तानाशाह आईएनडीयू तेलुगू 
2018 पल्टन मेजर बिशन सिंह की पत्नी हिंदी 
जैक और दिल शिल्पा वालिया हिंदी 
2019 शासक हरिका तेलुगू 
2021 शक्ति चांदनी हिंदी 
2022 F3: मज़ा और निराशा अमेरिकी लड़की तेलुगू 
भूत प्रिया 
2023 आदिपुरुष Not yet released हिंदी द्विभाषी फिल्म; 
तेलुगू

🎬टेलीविजन🎬

2019 आकाश में आग जैसा दृश्य मीनाक्षी पीरजादा ZEE

📽️🎶वीडियो संगीत

2006 समझो ना कुछ तो समझो ना हिमेश रेशमिया टी-सीरीज़ 
2016 फुर्सत अर्जुन कानूनगो सोनी म्यूजिक इंडिया
 
बदतमीज अंकित तिवारी टी-सीरीज़ 
2018 कुछ नहीं ज्योतिका टांगरी ज़ी म्यूजिक कंपनी 
2019 मेरे आस पास यासिर देसाई , ज्योतिका टांगरी ज़ी म्यूजिक कंपनी

💐पुरस्कार एवं नामांकन🎈

2009 54वां फिल्मफेयर अवॉर्ड सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण जन्नत मनोनीत 
स्टारडस्ट पुरस्कार कल का सुपरस्टार - महिला मनोनीत 
2012 निर्णायक प्रदर्शन - महिला बुड्डा... होगा तेरा बाप मनोनीत 
2016 ज़ी तेलुगु अप्सरा अवार्ड्स राइजिंग स्टार ऑफ द ईयर पंडगा चेस्को और साइज जीरो मनोनीत
2017 टीएसआर-टीवी9 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सबसे होनहार अभिनेत्री तानाशाह  जीत लिया गया 👏

मंगलवार, 7 मई 2024

राज खोसला

राज खोसला
राज खोसला हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक हैं।
*🎂जन्म की तारीख और समय: 31 मई 1925, रोहन*
*🕯️मृत्यु की जगह और तारीख: 9 जून 1991, मुंबई*

बच्चे: सुनील खोसला भल्ला, मिलन लुथरिया

भाई: बोलू खोसला

प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक राज खोसला के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

राज खोसला 1950 से 1980 के दशक तक हिंदी फ़िल्मों में शीर्ष निर्देशक, निर्माणकर्ता और पटकथाकारों में से एक थे। उन्हें देव आनंद जैसे अभिनेताओं की सफलता के लिए श्रेय दिया जाता है। गुरु दत्त के तहत अपना कॅरियर शुरू करने के बाद, वह सी.आई.डी की की तरह हिट फ़िल्में बनाते रहे। 'वो कौन थी'? (1964), 'मेरा साया' (1966), 'दोस्ताना' (1980) और मुख्य फ़िल्म 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' (1978) थी, जिसने उन्हें फ़िल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ मूवी पुरस्कार दिलाया था।

परिचय

राज खोसला का जन्म 31 मई, 1925 को पंजाब के लुधियाना शहर में हुआ था। उनका बचपन से ही गीत संगीत की ओर रूझान था और वे प्लेबैक सिंगर बनना चाहते थे। आकाशवाणी में बतौर उद्घोषक और पार्श्वगायक का काम करने के बाद राज खोसला 19 वर्ष की उम्र में अपने पिता के साथ पार्श्वगायक की तमन्ना लिए मुंबई आ गए। उनके चाचा देवानंद के पिता किशोरी आनंद के गहरे दोस्त थे। राज खोसला की प्रारंभिक शिक्षा अंजुमन इस्लामिक स्कूल में हुई। उन्होंने एलिफोस्टन कॉलेज से अंग्रेज़ी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

फ़िल्मी_कॅरियर_की_शुरुआत

मुंबई आने के बाद राज खोसला ने रंजीत स्टूडियों में अपना स्वर परीक्षण कराया और इस कसौटी पर वह खरे भी उतरे लेकिन रंजीत स्टूडियों के मालिक सरदार चंदू लाल ने उन्हें बतौर पार्श्वगायक अपनी फ़िल्म में काम करने का मौका नहीं दिया। उन दिनों रंजीत स्टूडियो की स्थिती ठीक नही थी और सरदार चंदूलाल को नए पार्श्वगायक की अपेक्षा मुकेश पर ज़्यादा भरोसा था अतः उन्होंने अपनी फ़िल्म में मुकेश को ही पार्श्वगायन करने का मौका देना उचित समझा।

मुख्य_फ़िल्में

राज खोसला निर्देशित फ़िल्में

राज खोसला द्वारा निर्देशित अन्य फ़िल्मों में 'मैं तुलसी तेरे आंगन की', 'दो रास्ते' 'सोलहवां साल' 'काला पानी' 'एक मुसाफिर एक हसीना', 'चिराग', 'मेरा साया' आदि प्रमुख हैं। उनकी कुछ फ़िल्में ऐसी थी, जो अस्सी के दशक में व्यावसायिक तौर पर सफल नहीं रही। इन फ़िल्मों में 'दासी' (1981), 'तेरी मांग सितारों से भर दूं', 'मेरा दोस्त मेरा दुश्मन' (1984) और 'माटी मांगे खून' शामिल है। हांलाकि वर्ष 1984 में प्रदर्शित फ़िल्म 'सन्नी' ने बॉक्स ऑफ़िस पर और व्यापार किया। वर्ष 1989 में प्रदर्शित फ़िल्म 'नकाब' राज खोसला के सिने कॅरियर की अंतिम फ़िल्म साबित हुई।

निधन

अपने दमदार निर्देशन से लगभग चार दशक तक सिनेप्रेमियों का भरपूर मनोरंजन करने वाले महान् निर्माता निर्देशक राज खोसला 9 जून, 1991 को इस दुनिया अलविदा कह गए।

फिल्मे

बुधवार, 1 मई 2024

ब्रह्मानंद एस सिंह एक भारतीय फिल्‍म निर्माता, निर्देशक ओर स्‍क्रीन राइटर हैं।



*Date Of Birth : 03 May*

1

ब्रह्मानंद एस सिंह एक भारतीय फिल्‍म निर्माता, निर्देशक ओर स्‍क्रीन राइटर हैं। जो बॉलीवुड में अपने बेहतरीन निर्देशन के लिये पहचाने जाते हैं। और अब तक कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किये जा चुके हैं। उन्‍हें मुख्‍यत: फिल्‍म कागज की कश्‍ती जो कि जगजीत सिंह की बॉयोग्राफी भी है के लिये जाना जाता है। 


जन्म

3 मई 1965 (आयु 57)

पूर्णिया , बिहार, भारत।

राष्ट्रीयता

भारतीय

व्यवसाय

फिल्म निर्माता, लेखक और लाइफ कोच

उल्लेखनीय कार्य

पंचम अनमिक्स्ड, कागज़ की कश्ती, झलकी

पुरस्कार

सर्वश्रेष्ठ जीवनी फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार


रेक्स कर्मवीर चक्र पुरस्कार


ब्रह्मानंद एस सिंह पूर्णिया , बिहार में पले-बढ़े । बाद में वह अपने अंग्रेजी साहित्य परास्नातक के लिए सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची और अंततः कोलकाता विश्वविद्यालय चले गए। सिनेमा में उनका सफर, हालांकि, 1993 में उनके मुंबई  जाने के एक साल के भीतर शुरू हुआ ।


ब्रह्मानंद ने 1980 के दशक में कला और सिनेमा के बारे में लिखना शुरू किया, द टेलीग्राफ , स्टेट्समैन , टाइम्स ऑफ इंडिया , द हिंदू , इंडियन एक्सप्रेस और द इंडिपेंडेंट जैसे प्रकाशनों में लेख प्रकाशित किए । उन्होंने डॉटकॉम बूम के दौरान ऑनलाइन काम भी प्रकाशित किया । ब्रह्मानंद ने 3,000 से अधिक लेख और विशेषताएँ, निबंध, कविताएँ और लघु कथाएँ, साथ ही साथ तीन जीवनी पुस्तकें, स्ट्रिंग्स ऑफ़ इटरनिटी , डायमंड्स एंड रस्ट और लाइटनेस ऑफ़ बीइंग प्रकाशित की हैं ।


उन्होंने 1990 के दशक के अंत में फिल्में बनाना शुरू किया, मुख्य रूप से जीवनी संबंधी वृत्तचित्र और स्वतंत्र फिल्मों का निर्माण किया। वह आरडी बर्मन और जगजीत सिंह (पंचम अनमिक्स्ड और कागज़ की कश्ती) जैसी शख्सियतों पर अपनी अनुभवात्मक बायोपिक के लिए जाने जाते हैं।


उन्होंने सामाजिक प्रभाव परियोजनाओं और आशा के विचारों के माध्यम से जीवन को बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ साझेदारी में रेक्स-कर्मवीर-चक्र पुरस्कार भी जीता है। सिंह की नवीनतम फीचर परियोजना, झलकी , एक फीचर फिल्म है जो बाल तस्करी और बाल श्रम के बारे में सार्वजनिक जागरूकता पैदा करने का प्रयास करती है। 


वह विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों और पुरस्कार प्लेटफार्मों के जूरी में भी बैठे हैं, और फिल्म निर्माण और पटकथा लेखन कार्यशालाओं का आयोजन करते हैं

एक निर्देशक और/या निर्माता के रूप में।


वर्ष शीर्षक

1997 अशगरी बाई

1998 प्यार का बोझ

1999 प्रकृति की ओर वापसी

2002 शरीर को खोलना

2005 कूड़ा बीनने वाले 

2008 पंचम अमिश्रित 

2011 चिड़िया रेन बसेरा

2012 शांति के राजदूत

2015 पंचम को जानना 

2015 हमारी आँखों से 

2016 सूर्य की किरण पर सवार 

2017 कागज की कश्ती 

2019 झलकी


वर्ष पुरस्कार वर्ग के लिए

2003 अप्सरा फिल्म प्रोड्यूसर्स गिल्ड अवार्ड्स सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म शरीर को खोलना

2008 IFFLA आलोचकों का विशेष उल्लेख पंचम अमिश्रित

2008 वाशिंगटन डीसी फिल्म महोत्सव ऑडियंस च्वाइस अवार्ड पंचम अमिश्रित

2009 57वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ संकलन फिल्म (निर्देशक) पंचम अमिश्रित

2009 57वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ संकलन फिल्म (निर्माता) पंचम अमिश्रित

2010 एआइएफएफ सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र पंचम अमिश्रित

2016 वैंकूवर इंटरनेशनल साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल ऑडियंस च्वाइस अवार्ड कागज़ की कश्ती

2016 वैंकूवर इंटरनेशनल साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र पुरस्कार कागज़ की कश्ती

2019 अंतर्राष्ट्रीय स्क्रीन पुरस्कार (आईएसए 2019) अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म के लिए प्लेटिनम पुरस्कार झलकी

2019 वाशिंगटन डीसी दक्षिण एशियाई फिल्म महोत्सव (DCSAFF 2019) सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार झलकी

2019 इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ सिनसिनाटी (IFFCINCY 2019)  सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार झलकी

2019 इंडियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ बोस्टन (IIFFB 2019)  सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कारण फिल्म का पुरस्कार झलकी

2019 अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्र फिल्म पुरस्कार लॉस एंजिल्स (IIFA 2019) बेस्ट कॉन्सेप्ट प्लेटिनम विनर्स झलकी

2019 अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्र फिल्म पुरस्कार लॉस एंजिल्स (IIFA 2019) सर्वश्रेष्ठ पटकथा प्लेटिनम विजेता झलकी

2019 बोस्टन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (बीआईएफएफ 2019) सर्वश्रेष्ठ मूल पटकथा पुरस्कार झलकी

2019 रेक्स-कर्मवीर-चक्र कर्मवीर चक्र पुरस्कार लागू नहीं

जन्म 3 मई 

रविवार, 28 अप्रैल 2024

रमेश शास्त्री

संस्कृत के विद्वान बहुत कम जाने सुने गये फिल्मी गीतकार रमेश शास्त्री के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

*●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
कवि और गीतकार डॉ. रमेश शास्त्री

02 अगस्त 1935-

30 अप्रैल 2010) को आज उनकी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि।
●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
  ꧁

हवा में उड़ता जाये
मेरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी, हो जी
इधर उधर लहराये
मेरा लाल दुपट्टा मलमल का हो जी, हो जी

थर थर थर थर हवा चली
हाय जियरा डगमग डोले
फर फर फर फर उड़े चुनरिया
घूँघट मोरा खोले
हवा में उड़ता जाये   ...

झर झर झर झर झरना बहता
ठण्डा ठण्डा पानी
घूँघरू बाजे ठुमक ठुमक
चाल हुई मस्तानी
हवा में उड़ता जाये   ...

गीतकार रमेश शास्त्री के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है,

उनका हिंदी सिनेमा में एक यादगार हालांकि अल्पकालिक कैरियर था।  यह सब तब शुरू हुआ जब अभिनेता-फिल्म निर्माता राज कपूर अपनी दूसरी फिल्म बरसात (1949) बना रहे थे, और उन्होंने प्रतिभा को आकर्षित करने का एक नया तरीका अपनाया उन्होंने अखबारों में एक विज्ञापन देते हुए कहा कि वह अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए गानों की तलाश में हैं।

बॉम्बे की चकाचौंध और ग्लैमर से दूर, बनारस में संस्कृत के एक युवा विद्वान, रमेश शास्त्री ने विज्ञापन पढ़ा और कुछ गीतों को राजकपूर के पास भेजा, जिनमें से एक अमर गीत 'हवा में उड़ता जाये मेरा लाल दुपट्टा मलमल का'' था यह राजकपूर को बहुत पसंद आया यह गीत फ़िल्म के लिये चुन लिया गया और लता मंगेशकर द्वारा गाए गए अब तक के सबसे यादगार गीतों में से एक बन गया यह गीत अभिनेत्री पुष्पा विमला पर फिल्माया गया था

बरसात एक ब्लॉकबस्टर हिट बन गई, जिसने हिंदी सिनेमा की पहली ब्लॉकबस्टर, ज्ञान मुखर्जी की किस्मत (1943) को  बॉक्स-ऑफिस कमाई के आंकड़ों को तोड़ दिया, जिसमें अशोक कुमार और मुमताज शांति ने अभिनय किया था  बरसात की सफलता का एक बड़ा हिस्सा इसके सुपरहिट गीतों को दिया जा सकता है जो आज भी लोकप्रिय हैं

हालांकि इस फ़िल्म को हसरत जयपुरी और शैलेंद्र के गीतों के लिये याद किया जाता है, फिल्म में दो गाने ऐसे थे जो उनके द्वारा नहीं लिखे गए थे और फिर भी बहुत लोकप्रिय हुए।  एक थी 'हवा में उड़ता जाए' यह गीत रमेश शास्त्री ने लिखा था और दूसरी थी 'मुझसे किसी प्यार हो गया' यह गीत जलाल मलिहाबादी ने लिखा था, जिसे लता मंगेशकर ने  गाया था।  इस फिल्म से संगीत निर्देशक जोड़ी शंकर जयकिशन ने अपने कैरियर की शुरुआत की थी जो जयकिशन की मृत्यु तक राज कपूर की फिल्म टीम का एक अभिन्न अंग बन रहे

रमेश शास्त्री का जन्म तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी में 2 अगस्त 1935 में आधुनिक गुजरात के गांव डियोर भावनगर में हुआ था
वह संस्कृत की शिक्षा लेने के लिए बनारस चले आये जहां उन्होंने संस्कृत विशारद की डिग्री हासिल की बाद में  रमेश शास्त्री ने संस्कृत में अपनी पीएचडी पूरी की और संस्कृत के शिक्षक बन गए अपने सरल जीवन से संतुष्ट, उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में मिली शानदार सफलता के बावजूद बहुत कम फिल्मी गीतों को लिखा राजकपूर ने उन्हें बार बार बॉम्बे बुलाने की कोशिश की और बॉम्बे में सेटल होने के लिए कहा मगर उन्होंने बनारस छोड़ने से मना कर दिया

फ़िल्म उषा हरन (1949), राम विवाह (1949), हर हर महादेव (1950) और जय महाकाली (1951) जैसी कुछ फिल्मों में उन्होंने गीत लिखे लेकिन वह 'हवा में उड़ता जाए' की सफलता को दोहराने में असमर्थ रहे।  उनके द्वारा लिखा गया एकमात्र अन्य गीत जिसने लोकप्रियता हासिल की, वह गीता रॉय द्वारा गाया गया हर हर महादेव का 'कंकड़ कंकड़ से मैं पूछूं' था।  फिल्म का निर्देशन जयंत देसाई ने किया था और इसमें त्रिलोक कपूर और निरूपा रॉय ने अभिनय किया था

उनके कुछ प्रसिद्ध गीत हैं
गुन गुंजन करता भंवरा गीता दत्त द्वारा गाया
टिम टिमाटिम टिम टिमाते तारे,मन ना माने,दुनिया मेरी बसाने वाले आशा भोंसले द्वारा गाया आज मेरे जीवन के नभ में छाई अंधियारी,रात सुहानी खिली चाँदनी नील गगन लहराये,रूप अनूप सुहाये कमरिया नागिन सी

शास्त्री ने रेडियो पर प्रसारित होने वाले कुछ भक्ति गीतों के बोल भी लिखे।  उन्होंने कॉलेज में पढ़ाना जारी रखा और 1990 में सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। 30 अप्रैल 2010 को उनका निधन हो गया।

सोमवार, 1 अप्रैल 2024

अयाज खान

#01april 

अयाज़ खान

🎂01 अप्रैल 1979 
मुंबई , महाराष्ट्र

व्यवसाय
अभिनेता, मॉडल
सक्रिय वर्ष
2005-अब तक
जीवनसाथी
जन्नत खान
अयाज़ खान का जन्म 1 अप्रैल, 1979 को मुंबई , महाराष्ट्र में हुआ था । उनका पैतृक परिवार शेरानी पश्तून वंश का था।
वह जाने तू... या जाने ना जैसी हिंदी फिल्मों में नजर आ चुके हैं ।उन्होंने स्टार वन मेडिकल ड्रामा दिल मिल गए में शुभंकर राय का किरदार निभाया । 2011 में, वह घोस्ट घोस्ट ना रहा में राहुल बोस और ईशा देओल के साथ दिखाई दिए और कोयल मलिक के साथ अपना सा में शुरुआत की ।  वह 12 मार्च 2010 को रिलीज़ हुई हिड एंड सीक के कलाकारों का भी हिस्सा हैं। वर्तमान में वह कलर्स टीवी पर परिचय में गौरव की भूमिका निभा रहे हैं।

खान ने 1990 के दशक के अंत में एक मॉडल के रूप में काम करना शुरू किया। वह अपने मॉडलिंग करियर के दौरान 300 से अधिक प्रिंट और टेलीविजन विज्ञापनों में दिखाई दिए हैं।
🎥 और 📺

2005 ब्लफ़मास्टर! 
2006 आप का सुरूर (समझो ना कुछ तो समझो ना)
2007 कुछ देर तक कुछ दूर संगीत वीडियो 
2007दिल मिल गये
2007हनीमून ट्रेवल्स प्रा. लिमिटेड मधु का बॉयफ्रेंड
2007कुलवधू
2008 जाने तू... या जाने ना 
2010 लुका-छिपी
2011 परिचय  
2011भूत-प्रेत ना रहा 
2011अपना सा
2013 पुनर्विवाह - एक नई उम्मीद
2013 चश्मे बद्दूर 
2014–2015 लौट आओ तृषा
2018 कैसी ये यारियां
2019 बॉस: विशेष सेवाओं के बाप 
2019केसरी नंदन
2019श्रीमद्भागवत: महापुराण
2020 आपराधिक न्याय: बंद दरवाजे के पीछे
2022 कैसी ये यारियां 
2023 स्कूप

पलक जैन

#01april 
पलक जैन
🎂जन्म 01 अप्रैल 1994 , इंदौर , मध्य प्रदेश , भारत
पति: तपस्वी मैहता (विवा. 2019)
पेशा
अभिनेत्री
पलक जैन एक भारतीय टेलीविजन अभिनेत्री हैं जिन्हें सुनैना- मेरा सपना सच हुआ और वीर शिवाजी जैसे टेलीविजन कार्यक्रमों में भूमिकाओं के लिए जाना जाता है।
जुलाई 2012 से वह चैनल वी इंडिया के द बडी प्रोजेक्ट में अपने सह-कलाकार कुणाल जयसिंह के साथ पंछी रस्तोगी की भूमिका निभा रही हैं।
वह 2015 में सोनी टीवी के धारावाहिक इतना करो ना मुझे प्यार का भी हिस्सा थीं, इसके बाद 2016 में एक दूजे के वास्ते का भी हिस्सा थीं।
उन्होंने सीरियल लाडो 2 में जान्हवी का किरदार भी निभाया था।
लेकिन अब शो में उनका कैरेक्टर खत्म हो गया है.
🎥

2003 तहजीब अज्ञात
2005 पहेली किशन का चचेरा भाई
बरसात युवा काजल
वाह! लाइफ हो तो ऐसी! पलक
2006 कच्ची सड़क अज्ञात

रविवार, 31 मार्च 2024

कपिल शर्मा

🎂जन्म 2 अप्रैल 1981 को अमृतसर में हुआ था।
कपिल शर्मा एक भारतीय कॉमेडी कलाकार है, वास्तविक जन्म 2 अप्रैल 1981 को अमृतसर में हुआ था। यह भारत का प्रसिद्ध हास्य कलाकार है। सोनी टीवी पर प्रचलित हास्य कार्यकर्म द कपिल शर्मा शो भारत का नंबर वन कॉमेडी शो है। एक बेहतरीन हास्य कलाकार की वजह से कपिल शर्मा को कॉमेडी का बादशाह कहा जाता है। करोडो लोगों के चेहरे पर मुस्कान आने वाले कपिल शर्मा को 2014 में आईटीए किंग ऑफ कॉमेडी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

कपिल शर्मा की जीवनी

नाम/नाम कपिल शर्मा
डीओबी / जन्म तिथि 2 अप्रैल 1981
पेशा / पेशा भारतीय कॉमेडी कलाकार
माता-पिता / माता - पिता जितेंद्र कुमार/ जनक रानी
पत्नी / पत्नी गिन्नी शर्मा
आयु/उम्र 40 साल (2021)
नेट-वर्थ/कुल मूल्य $ 38 मिलियन
शो / शो कपिल शर्मा शो और अन्य
राष्ट्रीयता/राष्ट्रीयता भारतीय
कपिल शर्मा की जीवन कहानी हिंदी में
कॉमेडी का झटका पिक्चर शर्मा का जन्म 2 अप्रैल 1981 को पंजाब में स्थित अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। इनके पिता जीतेंद्र कुमार पंजाब पुलिस में एक हेड कांस्टेबल में शामिल थे। और उनकी माँ जनक रानी एक हाउस वाइफ है।

कपिल शर्मा से ही एक दुष्ट और अन्य लोगों की नक़ल करने में पकड़े हुए थे, लेकिन उस दौरान पिता की मृत्यु के कारण कपिल के परिवार में मानो दुखों का संकट आ खड़ा हो। इससे पहले कपिल शर्मा ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पीसीओ (पब्लिक कॉल ऑफिस) में काम किया था, बाद में कपिल ने हिंदू कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई की।

🔛कॉमेडी करियर की शुरुआत –
जैसा कि बताया गया है कि, बचपन के बचपन से लोगों की नकल करने में यादगारी हासिल हुई थी। अपनी जूनून को आगे ले जाते हुए कपिल शर्मा ने अपना करियर कॉमेडी के क्षेत्र में बनाने का फैसला लिया और सपोर्ट के लिए कपिल के साथ उनके परिवार ने खूब दिया। अब बारी थी सिर्फ कॉमेडी के क्षेत्र में गिरने का।

इस दौरान कपिल शर्मा ने हंसीते नई हंसीते जैसे एक कॉमेडी शो में काम किया। इसके बाद उन्होंने उस समय का प्रमुख शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में अपना हाथ आगे बढ़ाया, दुर्भाग्य से उन्हें अस्वीकार कर दिया गया, लेकिन कपिल शर्मा कहा गया था, कपिल ने दुबारा उसी शो में अपना हाथ अलग किया और चुना। कहते हैं की, किसी का आज देखकर उनका कल डिसाइड नहीं करते, कुछ ऐसा ही हुआ कपिल शर्मा के साथ।

द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में न का चयन किया बल्कि फाइनल भी अपना नाम किया, जिसके लिए कपिल शर्मा को 10 लाख रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया गया। इसके बाद कपिल शर्मा ने 2011 में कॉमेडी सर्कस में एक कॉम्पटमेंट के रूप में भाग लिया, जहां उन्होंने साल 2011 और 2012 के विनर की घोषणा की। और अपना नाम और काम को लोगों के बीच लाये।

🔛सभी शो (2011 – 2021)
साल (वर्ष) शो (शो) रोल (रोल)
2007 द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज प्रतियोगी
2011 कॉमेडी सर्कस प्रतियोगी
2013 कॉमेडी नाइट्स विद कपिल मेज़बान
2016 द कपिल शर्मा शो सीजन 1 मेज़बान
2018-वर्तमान द कपिल शर्मा शो सीजन 2 मेज़बान
पुरस्कार और उपलब्धियों -
साल (वर्ष) पुरस्कार (पुरस्कार) श्रेणी (श्रेणी) परिणाम (नतीजा)
2014 ITA किंग ऑफ़ कॉमेडी अवार्ड भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार विजेता
2013-2021 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए ITA अवार्ड - कॉमेडी भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार विजेता
2014 कॉमिक रोल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए इंडियन टेली अवार्ड इंडियन टेली अवार्ड्स विजेता
2014-2013 बिग स्टार सबसे मनोरंजक टेलीविजन रियलिटी शो बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवार्ड्स विजेता
2016 सर्वश्रेष्ठ पुरुष पदार्पण के लिए गिल्ड अवार्ड गिल्ड अवार्ड्स विजेता
2013 मनोरंजन में सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर सीएनएन-न्यूज18 इंडियन ऑफ द ईयर विजेता
2013 सर्वश्रेष्ठ मेजबान के लिए गोल्डन पेटल अवार्ड गोल्डन पेटल अवार्ड्स विजेता
2013 गोल्डन पल के लिए गोल्डन पेटल अवार्ड्स गोल्डन पेटल अवार्ड्स विजेता
2014 सर्वश्रेष्ठ एंकर के लिए इंडियन टेली अवार्ड इंडियन टेली अवार्ड्स विजेता
2014 बिग स्टार मोस्ट एंटरटेनिंग जूरी/होस्ट (टीवी) बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवार्ड्स विजेता
2021 लोकप्रिय टीवी शो के लिए ITA अवार्ड भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार विजेता


कपिल शर्मा शो देखे यहां

सोमवार, 18 मार्च 2024

गीत कार योगेश

#29may
#19marche 
प्रसिद्ध गीतकार योगेश 

 🎂19 मार्च, 1943, लखनऊ, उत्तर प्रदेश; 

⚰️मृत्यु- 29 मई, 2020, मुम्बई, महाराष्ट्र) 

प्रसिद्ध भारतीय गीतकार और लेखक थे। उन्हें विशेष रूप से फ़िल्म 'आनंद' के गीत 'कहीं दूर जब दिन ढल जाये' और 'ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाए'; 'रिमझिम गिरे सावन' (फ़िल्म- मंज़िल), 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' (फ़िल्म- रजनीगंधा) जैसे सुपरहित गीतों के लिए प्रसिद्धि प्राप्त है। भारतीय हिंदी सिनेमा में उनके दिये योगदान के लिए उन्हें 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' के अलावा 'यश भारती पुरस्कार' भी दिया गया।

जीवन परिचय

हिन्दी फ़िल्मों के सुपरिचित गीतकार योगेश गौड उर्फ़ योगेश का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। आरंभिक शिक्षा लखनऊ के संस्कृति संपन्न माहौल में हुई, इस तरह योगेश का बचपन और किशोरावस्था यहीं बीते। पिता की असामयिक मृत्यु के कारण पढाई बीच में ही रोक कर रोज़गार की तलाश में लग गए। परिवार, मित्रों की सलाह पर मायानगरी मुंबई का रुख किया, मकसद इतना था कि जल्द-से-जल्द कोई काम मिले। मुंबई फ़िल्म उद्योग में पहला लक्ष्य नहीं था, महानगर की परिस्थितियों में योगेश को समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह एक शुरुआत होगी। इस क्रम में उन्होंने कहानी लेखन को चुना और सफ़र पर निकल पड़े, धीरे-धीरे पटकथाएं और संवाद लिखकर सिने-जीवन का आगाज़ किया

गीत एवं पटकथा लेखन

योगेश जी के मुंबई में आरंभिक संघर्ष को मित्र व सहयोगी सत्यप्रकाश ने साथ दिया, दोनों में सच्ची दोस्ती सा रिश्ता बना। भाई सत्यप्रकाश योगेश के सलाहकार, प्रेरक और संकट-मोचक रहे। मित्र के साथ ‘चाल’ में गुज़रा यह वक्त प्रेरणा का वरदान सा बन गया। आत्म-निर्भर पहचान के लिए अपने नाम से ‘गौड’ हटाने का फ़ैसला उनके व्यक्तित्व विकास के लिए अवसरों के नए द्वार लेकर आया, कहानी, पटकथा, संवाद के बाद कविता और गीत-लेखन की ओर उन्मुख हुए। यहां पर बचपन में कविता लिख कर याद करने का अभ्यास काम आया। लखनऊ का साहित्य-सांस्कृतिक सांचा और आत्मबल योगेश को कवि-गीतकार रूप दे गया।

योगेश जी को सगीत निर्देशक की ‘धुनों’ पर गीत लिखना पसंद नहीं था। गीत-लेखन की तकनीकी मांगों से अपरिचित होकर फ़िल्मकार रोबिन बैनर्जी के पास काम मांगा। उस समय सगीत धुनों पर ही गीत लिखने का चलन था। रोबिन बैनर्जी उन दिनों फ़िल्म ‘मासूम’ (1963) पर काम कर रहे थे। योगेश को रोबिन जी ने इस फ़िल्म के गीत लिखने को कहा। इस अनुभव ने उनकी आँखें खोल दी। अब वह संगीत धुनों पर लिखने को समझ चुके थे। रोबिन बैनर्जी-योगेश का सफ़र सखी रौबिन, मारवेल मैन, फ़्लाइंग सर्कस, रौबिनहुड समेत लगभग दर्जन भर फ़िल्मों तक रहा।

फ़िल्म 'आनंद' से मिली सफलता

प्रसिद्ध संगीत निर्देशक सलिल चौधरी बहु-चर्चित फ़िल्म ‘आनंद’ (1971) पर काम कर रहे थे, उन्हें इस फ़िल्म के लिए एक सुलझे हुए गीतकार की तलाश थी। मशहूर शैलेन्द्र की कमी में योगेश का चयन किया। आनंद की सफ़लता से ‘योगेश’ देशभर में विख्यात होकर सलिल चौधरी के साथ अपने कैरियर की ‘सफ़लतम’ यात्रा पर निकल पड़े। सलिल दा-योगेश ने आनंद के अलावे ‘अनोखादान’, ‘अन्नदाता’, ‘आनंद महल’, ‘रजनीगंधा’ और ‘मीनू’ जैसी फ़िल्मों में साथ काम किया। सलिल दा की जलेबीदार, कठिन संगीत धुनों के लिए गीत लिखना योगेश के लिए बहुत ही ‘चुनौतीपूर्ण’ कार्य रहा। निस दिन, रजनीगंधा फूल तुम्हारे, प्यास लिए मनवा जैसे गीतों में गीतकार की ‘कविताई’ निखर कर सामने आई। इस तरह सलिल दा के मापदंडों पर एक गीतकार ‘कवि’ भी बन सका।

योगेश ने अपने कैरियर में संगीतकार घरानों के ‘पिता-पुत्र’ संगीतकारों के साथ काम किया, इस परम्परा में सलिल एवं संजय चौधरी और सचिन देव एवं राहुल देव बर्मन के लिए गीत लिखे। जाने-माने संगीतकार सचिन देव बर्मन की ‘उसपार’ तथा ‘मिली’ योगेश के यादगार ‘प्रोजेक्ट’ रहे, इन फ़िल्मों का जीवंत गीत-संगीत इस साथ की सुनहरी याद है। 'मिली' अभी पूरी भी न हुई थी कि सचिन देव बीच में ‘बीमार’ पड़ गए, पिता की आधी फ़िल्म को राहुल देव बर्मन ने ‘बडी सूनी-सूनी है ज़िंदगी’ और ‘मैने कहा फूलों से’ रिकार्ड कर पूरा किया। संगीतकार राहुल की ‘लिस्ट’ में योगेश का नम्बर पाँचवीं पायदान पर आता था, फिर भी राहुल देव-योगेश की जोड़ी 8 से 10 फ़िल्मों में साथ आई।

फ़िल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन मे बनी ‘आनंद’ (1971) के बाद योगेश को सिने जगत् में उचित सम्मान मिला, फ़िल्म के कभी ना भुलाए जा सकने वाले गीत आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं। कहा जाता है कि ऋषिकेश जी को ‘आनंद’ बनाने की प्रेरणा मूलत: एक जापानी फ़िल्म से मिली, कहानी से इस क़दर प्रोत्साहित हुए कि केन्द्र में ‘महिला’ को रखकर ‘मिली’ भी बनाई। योगेश जी ने दोनों फ़िल्मों के गीत लिखकर ऋषिकेश दा की ‘सबसे बड़ा सुख’, ‘रंग-बिरंगी’ और ‘किसी से ना कहना’ के गीत समेत अनेक फ़िल्मों के गीत लिखे।[1]

प्रसिद्ध गीत

कहीं दूर जब दिन ढल जाये (आनंद)
रिमझिम गिरे सावन (मंज़िल)
रजनीगंधा फूल तुम्हारे (रजनीगंधा)
ज़िन्दगी कैसी है पहेली (आनंद)
ना बोले तुम, ना मैने कुछ कहा (बातों बातों में)
कई बार यूँ भी देखा है (रजनीगंधा)
कहा तक ये मन को अंधेरे छलेंगे (बातों बातों में)
आए तुम याद मुझे, गाने लगी हर धडकन (मिली)
न जाने क्यों होता है, ये जिंदगी के साथ (छोटी सी बात)

मृत्यु

गीतकार तथा लेखक योगेश का निधन 29 मई, 2020 को बसई, मुम्बई में हुआ।

हिंदी सिनेमा की महान कलाकार लता मंगेशकर ने उनके निधन पर लिखा- "मुझे अभी पता चला कि दिल को छूने वाले गीत लिखने वाले कवि योगेश जी का आज स्वर्गवास हो गया है। ये सुनकर मुझे बहुत दु:ख हुआ। योगेश जी के लिखे गीत मैंने गाए। योगेश जी बहुत शांत और मधुर स्वभाव के इंसान थे। मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं"। योगेश के साथ लता मंगेशकर ने कई फिल्मों में काम किया था।
🎥
  • (1993)चोर और चांद
  •  (1994)दुलारा
  • (1995) बेवफा सनम 

शनिवार, 16 मार्च 2024

नकीतिन धीर


#17march 
निकितिन धीर
🎂: 17 मार्च 1980 (आयु 44 वर्ष), मुम्बई
पत्नी: कृतिका सेंगर (विवा. 2014)
लंबाई: 1.93 मी
माता-पिता: पंकज धीर, अनीता धीर

निकितिन धीर एक भारतीय अभिनेता हैं जो बॉलीवुड फिल्मों और हिंदी शो में काम करते हैं।
उन्होंने व्यावसायिक रूप से सफल पीरियड रोमांस जोधा अकबर (2008) में मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में अपनी फिल्म की शुरुआत की।
इस सफलता के बाद उन्होंने रेडी (2011), दबंग 2 (2012), चेन्नई एक्सप्रेस (2013), और हाउसफुल 3 (2016) सहित कई सर्वाधिक कमाई करने वाली एक्शन कॉमेडी में खलनायक की भूमिका निभाई।
धीर ने रियलिटी-स्टंट आधारित शो फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 5 (2014) में भी भाग लिया है।
उन्होंने कई टेलीविजन शो में भी काम किया, जिनमें फंतासी नाटक नागार्जुन - एक योद्धा (2016-17) और इश्कबाज़ (2017-18) शामिल हैं।
2019 से, वह बालाजी टेलीफिल्म्स की अलौकिक/फंतासी थ्रिलर नागिन 3 में हुकुम के रूप में काम कर रहे हैं।

धीर ने 3 सितंबर 2014 को कृतिका सेंगर से अरेंज मैरिज की । दंपति की एक बेटी है। 

🎥
2008 जोधा अकबर 
2008मिशन इस्तांबुल
2011 तैयार 
2012 दबंग 2
2013 चेन्नई एक्सप्रेस 
2015 कांचे 
2016 हाउसफुल 3 
2016अजीब अली 
2017 गौतम नंदा 
2017श्रीमान
2018 पाक 
2018 शेरशाह
2022एंटीम: द फाइनल ट्रुथ दया बगारे 
2022 खिलाड़ी 
2022 सर्कस

गुरुवार, 29 फ़रवरी 2024

टाइगर श्राफ

नये जमाने के अभिनेता टाइगर श्रॉफ के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

टाइगर श्रॉफ़ (जन्म ; जय हेमन्त श्रॉफ़ ; 2 मार्च 1990 ) एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता तथा मार्शल आर्टिस्ट है।  इन्होंने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत साजिद नाडियाडवाला की एक्सन रोमेंटिक फ़िल्म हीरोपंती से 2014 में की थी। इस फ़िल्म के तौर पर इन्हें फ़िल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट मेल डेब्यू के लिए चुना गया था।  इसके बाद एक बार फिर साजिद नाडियाडवाला ने बागी (2016) फ़िल्म का ऑफर दिया , फ़िल्म में इनकी को-स्टार श्रद्धा कपूर है। बागी फ़िल्म ने ₹1 बिलियन (US$14.6 मिलियन) कमाए है।

टाइगर श्रॉफ का जन्म 2 मार्च 1990 को जैकी श्रॉफ के घर हुआ ,इनके बचपन का नाम जय हेमन्त श्रॉफ़ था जो बाद में बदल दिया। इनके पिता का नाम जैकी श्रॉफ है जो कि स्वयं फ़िल्म अभिनेता है और माता का नाम आयेशा दत्त है।टाइगर अपनी बहिन कृष्णा श्रॉफ से तीन साल बड़े है।श्रॉफ गुजराती वैश्य बनिया परिवार से है। और अगर ममेरे रिश्ते के हिसाब से देखें तो बंगाली है। 

इन्होंने अपनी विद्यालयी शिक्षा अमेरिकन स्कूल ऑफ़ बॉम्बे ,मुम्बई से की थी फिर बाद में एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ना शुरू किया। श्रॉफ ने धूम 3 फ़िल्म में आमिर ख़ान का अच्छी बॉडी बनाने में मदद की थी इन्होंने मार्शल आर्ट में कई डिग्रीयां ली है।

बाग़ी फ़िल्म के प्रचार के दौरान श्रद्धा कपूर के साथ
सितम्बर 2009 में श्रॉफ ने कहा था की वो फ़ौजी धारावाहिक में मुख्य किरदार निभाएंगे I जनवरी 2010 में एक रिपोर्ट के अनुसार सुभाष घई हीरो 1983 की पुनर्निमित फ़िल्म करेंगे जिसमें टाइगर को मौका मिल सकता है। लेकिन टाइगर श्रॉफ ने यह ऑफर ठुकरा दिया था। अंततः जून 2012 में श्रॉफ ने साजिद नाडियाडवाला की फ़िल्म हीरोपंती के लिए हस्ताक्षर कर दिए थे जो कि टाइगर की पहली फ़िल्म थीं। हीरोपंती जो कि 23 मई 2014 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही थी। उस फ़िल्म में टाइगर की को-स्टार कृति सैनॉन थी। 

टाइगर श्रॉफ नृत्य तथा अपने करतब अर्थात स्टंट काफी अच्छे से करते है , हीरोपंती तथा बागी दोनों फ़िल्मों में देखने को मिला है।इस कारण बॉलीवुड हंगामा टीवी के तरुण आदर्श ने इन्हें (टाइगर रजिस्टर्स एन इम्पेक्ट इन सेवरल सीक्वेंस) कहा है।इनकी लेटेस्ट फ़िल्म बागी जिसका निर्देशन भी साजिद नाडियाडवाला ने किया है जो कि 100 करोड़ के क्लब में शामिल हुई।

शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

अदिति गोवित्रिकर



अदिति गोवित्रिकर

जन्म तिथि: 21-मई -1974

जन्म स्थान: पनवेल, महाराष्ट्र, भारत

पेशा: अभिनेता, मॉडल, टेलीविजन अभिनेता, सौंदर्य प्रतियोगिता प्रतियोगी

राष्ट्रीयता: भारत

अदिति गोवित्रिकर (जन्म 14 मई 1972) एक भारतीय मॉडल, अभिनेत्री और डॉक्टर हैं।
1997 से 2004 तक, गोवित्रिकर चिकित्सा चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक योग्यता दोनों के साथ एकमात्र भारतीय सुपरमॉडल बने रहे।
उन्हें हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा "ब्यूटी विद ब्रेन" कहा गया है।
वह एक शाकाहारी और उत्साही विपश्यना व्यवसायी हैं।
वह 2009 में बिग बॉस की प्रतियोगी थीं। उन्होंने 1996 में ग्लैडरैग्स मेगामॉडल प्रतियोगिता जीती और ग्लैडरैग्स मिसेज इंडिया प्रतियोगिता जीती।
2000 में भारत, बाद में श्रीमती जीता।
2001 में विश्व प्रतियोगिता।
श्रीमती गोवित्रिकर पहली और एकमात्र भारतीय महिला हैं जिन्होंने मिसेज वर्ल्ड अवार्ड जीता है।
विश्व खिताब। गोवित्रिकर ने अभिनय में तब कदम रखा जब उन्होंने थम्मुडु (1999) में मुख्य भूमिका निभाई, जो एक हिट फिल्म थी।
उन्होंने पहेली (2005) सहित कई फिल्मों में अभिनय किया, जो 79 वें अकादमी पुरस्कारों में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि और दे दना दन (2009) थी, जिसने अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार जीता।
उन्होंने अदनान सामी और आशा भोसले (1997) द्वारा कभी तो नज़र मिलाओ और जगजीत सिंह (2000) द्वारा आइना जैसे कई सुपर हिट संगीत वीडियो में भी प्रमुख भूमिका निभाई। गोवित्रिकर ने भारत में PETA लॉन्च किया और कोका-कोला, चोपार्ड, फेंडी और हैरी विंस्टन जैसे शीर्ष स्तरीय अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों का भी समर्थन किया।

🔛अदिति गोवित्रिकर (जन्म 14 मई 1972) एक भारतीय मॉडल, अभिनेत्री और डॉक्टर हैं।
1997 से 2004 तक, गोवित्रिकर चिकित्सा चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक योग्यता दोनों के साथ एकमात्र भारतीय सुपरमॉडल बने रहे।
उन्हें हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा "ब्यूटी विद ब्रेन" कहा गया है।
वह एक शाकाहारी और उत्साही विपश्यना व्यवसायी हैं।
वह 2009 में बिग बॉस की प्रतियोगी थीं। उन्होंने 1996 में ग्लैडरैग्स मेगामॉडल प्रतियोगिता जीती और ग्लैडरैग्स मिसेज इंडिया प्रतियोगिता जीती।
2000 में भारत, बाद में श्रीमती जीता।
2001 में विश्व प्रतियोगिता।
श्रीमती गोवित्रिकर पहली और एकमात्र भारतीय महिला हैं जिन्होंने मिसेज वर्ल्ड अवार्ड जीता है।
विश्व खिताब। गोवित्रिकर ने अभिनय में तब कदम रखा जब उन्होंने थम्मुडु (1999) में मुख्य भूमिका निभाई, जो एक हिट फिल्म थी।
उन्होंने पहेली (2005) सहित कई फिल्मों में अभिनय किया, जो 79 वें अकादमी पुरस्कारों में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि और दे दना दन (2009) थी, जिसने अंतर्राष्ट्रीय भारतीय फिल्म अकादमी पुरस्कार जीता।
उन्होंने अदनान सामी और आशा भोसले (1997) द्वारा कभी तो नज़र मिलाओ और जगजीत सिंह (2000) द्वारा आइना जैसे कई सुपर हिट संगीत वीडियो में भी प्रमुख भूमिका निभाई। गोवित्रिकर ने भारत में PETA लॉन्च किया और कोका-कोला, चोपार्ड, फेंडी और हैरी विंस्टन जैसे शीर्ष स्तरीय अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों का भी समर्थन किया।

🔛श्रीमती मधुलिका राज मैथ्यूज हिंदी
16 दिसंबर सोनल जोशी हिंदी
2003 बाज़: ए बर्ड इन डेंजर सौंदर्य प्रतियोगिता के विजेता हिंदी
धुंधः कोहरा सिमरन मल्होत्रा हिंदी
2005 पहेली कमली हिंदी [ उद्धरण वांछित ]
2006 मनोरंजन: मनोरंजन माया/सलमा हिंदी
2007 विक्टोरिया नंबर 203 बेबीजी हिंदी
कैसे कहें... नेहा सरल हिंदी
2009 दे दना दन पम्मी चड्डा हिंदी

2011 भेजा फ्राई 2 रवीना कपूर हिंदी
हम तुम शबाना न्यायाधीश हिंदी
2014 खुद घेंट अदिति (मासी) हिंदी
2017 मेरे पिता की पहली पत्नी कौन है स्वाति हिंदी
2021 कोई जाने ना सुहाना की मां हिंदी

आशा भोसले

आशा भोसले 🎂08 सितंबर 1933 ⚰️12 अप्रैल 2026 जन्म की तारीख और समय: 8 सितंबर 1933, सांगली मृत्यु की जगह और तारीख: 12 अप्रैल 2026 ब...