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सोमवार, 24 अप्रैल 2023

महान हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक बड़े गुलाम अली खान साहब की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि

महान हिन्दुस्तानी शास्त्रीय गायक बड़े गुलाम अली खान साहब की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि

उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ की गणना भारत के महानतम गायकों व संगीतज्ञों में की जाती है। वे विलक्षण मधुर स्वर के स्वामी थे। इनके गायन को सुनकर श्रोता अपनी सुध-बुध खोकर कुछ समय के लिए स्वयं को खो देते थे। भारत के कोने-कोने से संगीत के पारखी लोग ख़ाँ साहब को गायन के लिए न्यौता भेजते थे। क्या राजघराने क्या मामूली स्कूल के विद्यार्थी, ख़ाँ साहब की मखमली आवाज़ सभी को मंत्रमुग्ध कर देती थी दिल को छू जाने वाली आवाज़ के मालिक उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ ने नवेली शैली के ज़रिए ठुमरी को नई आब और ताब दी।
जानकारों के मुताबिक उस्ताद ने अपने प्रयोगधर्मी संगीत की बदौलत ठुमरी को जानी-पहचानी शैली की सीमाओं से बाहर निकाला। 

बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ साहब का जन्म 2 अप्रॅल ,1902 को पाकिस्तानी पंजाब के मशहूर शहर लाहौर के पास स्थित गाँव केसुर में हुआ था। बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ ने मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति संगीत से ही प्राप्त की थी और यही कारण था कि उनके बोलचाल और हावभाव से यह ज़ाहिर हो जाता था कि यह शख़्सियत संगीत के प्रचार-प्रसार के लिए धरती पर अवतरित हुई है। 
इनका परिवार संगीतज्ञों का परिवार था। इनके पिताजी का नाम अली बख्श ख़ाँ है। दिलचस्प है कि संगीत की दुनिया में उनकी शुरुआत सारंगी वादक के रूप
में हुई। उन्होंने अपने पिता अली बख्श ख़ाँ और चाचा काले ख़ाँ से संगीत की बारीकियाँ सीखीं। इनके पिता महाराजा कश्मीर के दरबारी गायक थे और वह घराना "कश्मीरी घराना" कहलाता था। जब ये लोग पटियाला जाकर रहने लगे तो यह घराना " पटियाला घराना " के नाम से जाना जाने लगा। दिखने में बेहद कड़क मिज़ाज और मज़बूत डील-डौल वाले बड़े ग़ुलाम अली ने सबरंग नाम से कई बंदिशें रचीं। उनकी सरगम का अंदाज़ बिल्कुल निराला था। साल 1947 में भारत के विभाजन के बाद बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ पाकिस्तान चले गए थे लेकिन संगीत के इस उपासक को पाकिस्तान का माहौल क़तई पसंद नहीं आया। नतीजतन वह जल्द ही भारत लौट आए।  अपने सधे हुए कंठ के कारण बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ ने बहुत प्रसिद्धि पाई। 1919 में लाहौर के संगीत सम्मेलन में इन्होंने अपनी कला का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया। फिर कोलकाता और इलाहाबाद के संगीत सम्मेलनों में इन्हें देशव्यापी ख्याति प्रदान की।भारतीय संगीत के फलक पर 1930 के दशक में सितारे की तरह चमके इस गायक ने साल 1938 में तत्कालीन कलकत्ता में हुए एक कार्यक्रम में दुनिया के सामने पहली बार अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा था। उसके बाद वह संगीत को आगे बढ़ाने और उसे समृद्ध करने की मुहिम में रम गए। ख़ाँ साहब किंवदंती गायक थे। गायन से ऐसा मोहजाल बुनते कि आपको उसमें उलझना ही है। मुग़ले आजम फ़िल्म में गाने के लिए उन्होंने एक गाने के 25 हज़ार रुपए माँग लिए थे क्योंकि वे फ़िल्म में गाना नहीं चाहते थे। निर्देशक के. आसिफ ने 25 हज़ार रुपए देना स्वीकार कर लिया जबकि उस जमाने में लता मंगेशकर और मुहम्मद रफ़ी को एक गाने के पाँच सौ रुपए से भी कम मिलते थे। बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ के मुंह से एक बार ‘राधेकृष्ण बोल’भजन सुनकर महात्मा गांधी बहुत प्रभावित हुए थे।

ख़ाँ साहब को भारत सरकार के पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी सम्मान से भी नवाज़ा गया है।

हैदराबाद के नवाब जहीरयारजंग के बशीरबाग़ महल में चाँदनी और रेशम की शोभा वाली उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली ख़ाँ की आवाज़ 25 अप्रैल , 1968 को सो गई और बीते युग के पटियाला घराने का एक सुरीला एपिसोड समाप्त हो गया।

शनिवार, 1 अप्रैल 2023

अजय देवगन


प्रसिद्ध अभिनेता अजय देवगन के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

अजय देवगन  भारतीय बॉलीवुड फिल्‍मों के मशहूर अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं। वे हिन्‍दी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं। अजय देवगन को बेहतरीन अभिनय करने के लिए अपने कॅरियर में दो बार राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्हें 'फ़िल्मफेयर अवॉर्ड्स', 'नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर' और इसके अतिरिक्त भारत सरकार की तरफ़ से साल 2016 में 'पद्मश्री' से भी सम्मानित किया जा चुका है। वे ऐसे संजीदा अभिनेता हैं, जो अपनी आँखों से सारा अभिनय कर देते हैं। वे बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में से एक हैं, जिनके पास यातायात के लिए अपना निजी जेट है। अपनी अदाकारी से सब के दिल जीतने वाले अजय देवगन गंभीर अभिनय करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी एक और खास बात यह है कि जब उनकी फ़िल्म रिलीज़ होती है तो ही शो में आते हैं, अन्यथा ग्लैमर की दुनिया से दूर बस अपने काम में मशगूल रहते हैं।

परिचय

अजय देवगन का जन्म 2 अप्रॅल, 1969 को दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। वह मूल रूप से पंजाब के अमृतसर से आते हैं। अजय देवगन का जन्म का नाम विशाल वीरू देवगन है। उनके पिता वीरू देवगन हिन्दी फ़िल्मों के स्टंटमैन और एक्शन फ़िल्म डायरेक्टर भी थे। अजय की माँ वीणा देवगन ने कुछ फ़िल्मों का निर्माण किया था। उनका एक भाई भी है, जिसका नाम अनिल देवगन है। अजय ने स्नातक की पढ़ाई मुंबई के मिट्ठी भाई कॉलेज से पूरी की थी।

विवाह

अजय देवगन ने हिन्दी सिनेमा की ही सुप्रसिद्ध अभिनेत्री काजोल से विवाह किया। काजोल अपने समय की प्रसिद्ध अभिनेत्री तनूजा की पुत्री हैं। पहली बार अजय और काजोल की जोड़ी 1995 में प्रदर्शित फ़िल्म 'हलचल' में नजर आई थी। 1995 में अजय देवगन और काजोल फ़िल्म 'गुंडाराज' के बाद से आपसी रिश्ते में दिखाई दिए। उस समय मीडिया उन्हें 'एन अनलाइकली पेयर' कहता था, क्योंकि उन दोनों के रंग में काफ़ी फर्क था। 24 फरवरी, 1999 को वे दोनों पारंपरिक महाराष्ट्रियन रीति-रिवाजों से अजय देवगन के ही घर में विवाह बंधन में बंध गये।अजय देवगन एक पुत्री तथा एक पुत्र के पिता हैं। पुत्री का नाम 'न्यासा' और पुत्र का नाम 'युग' है।

फ़िल्मी_शुरुआत

अजय देवगन के पिता वीरू देवगन और माँ वीणा देवगन फ़िल्मों से जुड़े थे, इसीलिए अजय की रुचि भी फ़िल्मों की ओर गई और वे फ़िल्म निर्देशक बनने का सपना देखने लगे। अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे फ़िल्म निर्देशक शेखर कपूर के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम करने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात कुक्कु कोहली से हुई जो उन दिनों नई फ़िल्म 'फूल और कांटे' के निर्माण में व्यस्त थे और एक ऐसे अभिनेता की तलाश में थे जो रूमानी भूमिका के साथ-साथ एक्शन दृश्य भी कर सके। इस दौरान उन्होंने अजय देवगन के बारे में सुना कि वे एक्शन और नृत्य करने में माहिर हैं। कुक्कु कोहली ने उनसे फ़िल्म का नायक बनने की पेशकश की। अपनी पहली ही फ़िल्म 'फूल और काँटे' की सफलता के बाद अजय देवगन दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। इसके बाद अजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए।

#सफलताएँ

अजय देवगन की फिल्‍म ‘फूल और कांटे’ उस समय की सबसे चर्चित सुपरहिट फ़िल्म थी। इस फिल्‍म में दो मोटर साइकिल पर पैर रखकर उनके द्वारा की गई एंट्री आज तक चर्चा का विषय बनी रहती है। इस फ़िल्म के ज़रिए अजय देवगन ने बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री मारी। 'फूल और काँटे' के बाद आई उनकी फिल्‍म ‘जिगर’ भी हिट रही थी। इसके बाद उनकी कई फिल्‍में आईं, जिन्‍होंने बॉक्‍स ऑफिस पर अच्‍छा व्‍यवसाय किया। फिल्‍म ‘हम दिल दे चुके सनम’ उनके कॅरियर का टर्निंग प्‍वाइंट रही, जिसके लिए उन्‍हें कॉफी प्रशंसा मिली। वर्ष 1999 में उन्हें महेश भट्ट निर्देशित फ़िल्म ‘जख्म’ और 2002 में राजकुमार संतोषी निर्देशित फ़िल्म 'द लेजेंड ऑफ़ भगत सिंह' के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। 2011 में आई उनकी फ़िल्म 'सिंघम' में वे एक्सन हीरो के रूप में छा गये। ये फ़िल्म सुपरहिट रही थी और इसने कारोबार भी अच्छा किया था। फिर 'सिंघम' का अगला पार्ट 'सिंघम रिटर्न' 2014 में आया। हालाँकि ये कहना ग़लत होगा कि अजय देवगन सिर्फ़ एक्सन हीरो हैं। वे लगभग हर शैली की फ़िल्मों मे परफ़ेक्ट अभिनय करते हैं। उनके अभिनय का अंदाज़ही जुदा है। उन्होंने लगभग हर शैली की फ़िल्में की हैं, चाहे एक्सन हो या रोमांटिक या कॉमेडी; सभी में अजय देवगन फिट बैठते हैं। उन्होंने लगभग सभी तरह की फ़िल्में हिट की हैं। अजय देवगन ने 100 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया है, जिसमें उन्होंने कई यादगार फ़िल्में दी हैं।

अभिनेता दीपक पराशर


अभिनेता दीपक पराशर के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

दीपक पराशर (जन्म 2 अप्रैल 1952) एक भारतीय अभिनेता और पूर्व मॉडल हैं।  वह 2006 में बिग बॉस की प्रतियोगी थे

उनका जन्म 2 अप्रैल 1952 को पुणे, भारत में शोभा और विश्वनाथ पाराशर के घर हुआ था।  उनकी शादी 1985 में सरिता से हुई और उनकी एक बेटी राधिका है।

दीपक पाराशर सोप ओपेरा कहीं तो होगा में दिखाई दिए, और कॉस्ट्यूम ड्रामा चंद्रमुखी में मुगल बादशाह के "शाही लिबास" को धारण किया

1976 में, उन्हें मिस इंडिया के रूप में नफीसा अली को मिस इंडिया और पूनम ढिल्लो को मिस दिल्ली के रूप मे (ए पर्सनैलिटी कॉन्टेस्ट) में ताज पहनाया गया।70 के दशक के उत्तरार्ध उन्होंने विमल के लिए विज्ञापन किया   1980 के दशक की शुरुआत में, पराशर ने कई हिंदी फिल्मों में काम किया  जिनमें शराबी, इंसाफ़ का तराजू, निकाह, पूरानी हवेली और आप तो ऐसे न थे  शामिल हैं।  आज तक निकाह उनकी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाली फिल्म है और इंसाफ का तराजू उनकी सबसे अच्छी सहायक भूमिकाओं में से एक है।  2006 में, वह रियलिटी टीवी शो बिग बॉस में दिखाई दिए, जब तक कि उन्हें दूसरे सप्ताह में निकाल नहीं दिया गया।  वह दूरदर्शन टीवी धारावाहिक स्वाभिमान में महेंद्र मल्होत्रा ​​के रूप में भी दिखाई दिए।

आशा भोसले

आशा भोसले 🎂08 सितंबर 1933 ⚰️12 अप्रैल 2026 जन्म की तारीख और समय: 8 सितंबर 1933, सांगली मृत्यु की जगह और तारीख: 12 अप्रैल 2026 ब...