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गुरुवार, 20 जुलाई 2023

प्रसिद्ध अभिनेता शिवाजी गणेशन की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि


जन्म🎂01अक्तूबर 1927
मृत्यु ⚰️21 जुलाई 2001
विल्लुपुरम चिन्नैयापिल्लई गणेशन  मुख्य रूप से शिवाजी गणेशन के नाम से प्रसिद्ध हैं। तमिल सिनेमा की प्रमुख हस्तियों में से एक शिवाजी गणेशन संवाद अदायगी से दर्शकों को मुग्ध कर देने वाले सुपरस्टार थे। शिवाजी गणेशन ने रंगमंच के साथ-साथ फ़िल्मों में भी अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं बाद की पीढ़ी के अभिनेताओं को भी अपनी अभिनय शैली से प्रेरित किया। दक्षिण भारत के कई सितारों ने स्वीकार किया है कि उनकी अभिनय शैली शिवाजी गणेशन से प्रभावित थी। शिवाजी गणेशन का मूल नाम विल्लुपुरम चिन्नैयापिल्लई गणेशन था और उन्होंने सी. एन. अन्नादुराई द्वारा लिखित,' शिवाजी कांड हिन्दू राज्यम' नाटक में छत्रपति शिवाजी की भूमिका निभायी। इस नाटक में उनके अभिनय की काफ़ी सराहना हुई और उन्हें 'शिवाजी गणेशन' का नाम मिल गया।  

जीवन_परिचय

1 अक्तूबर 1927 को पैदा हुए शिवाजी गणेशन का फ़िल्मों में प्रवेश 1952 में हुआ और 'पराशक्ति' उनकी पहली फ़िल्म थी। दर्शकों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया और उनकी अभिनय शैली ख़ासकर संवाद अदायगी से मुग्ध हो गए। 1954 में प्रदर्शित उनकी फ़िल्म 'अंधानाल' तमिल सिनेमा की दिशा तय करने वाली साबित हुई। इसमें एक ओर कोई गाना नहीं था वहीं गणेशन एंटी हीरो की भूमिका में थे। बचपन से ही उनकी याददाश्त काफ़ी अच्छी थी और वह लंबे-लंबे संवाद बिना किसी मदद के दर्शकों के सामने बखूबी पेशकर देते थे। दर्शक उनकी इस अदा से भाव विभोर हो जाते थे बाद में जब वह बड़े पर्दे की दुनिया में आ गए तो यहां भी उन्हें इस प्रतिभा का काफ़ी फायदा हुआ और उनका यह अंदाज़विशेष रूप से लोकप्रिय हुआ।

फ़िल्मी_सफर

शिवाजी गणेशन ने अपने क़रीब पांच दशक के लंबे फ़िल्मी सफर में लगभग 300 फ़िल्मों में काम किया। उन्होंने तमिल के अलावा तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और हिंदी फ़िल्मों में भी काम किया। 1970 में प्रदर्शित हिंदी फ़िल्म 'धरती' में भी उन्होंने अभिनय किया। यह फ़िल्म उनकी मूल फ़िल्म 'सिवांध मान' की रीमेक थी। उनकी कई फ़िल्मों का रीमेक अन्य भाषाओं में भी हुआ। ऐसी ही एक फ़िल्म नवरातिरि थी जिसमें उन्होंने नौ किरदार निभाए थे। बाद में हिंदी में इसी आधार पर 'नया दिन नयी रात' फ़िल्म बनी जिसमें संजीव कुमार ने नौ भूमिकाएँ की थी। उनकी फ़िल्मों का सिंघली भाषा में भी रीमेक हुआ है।

राजनीति_में

शिवाजी गणेशन अपने फ़िल्मी सफर में व्यावसायिक, पौराणिक और प्रयोगधर्मी फ़िल्मों के बीच संतुलन स्थापित करने में काफ़ी हद तक कामयाब रहे। बाद में वह राजनीति में भी आए और द्रमुक से जुड़ गए। लेकिन द्रमुक के साथ उनका सफर लंबा नहीं चला और वह कांग्रेस समर्थक हो गए। उन्हें राज्यसभा के लिए भी चुना गया। उन्होंने अपनी एक पार्टी भी बनायी थी।  

सम्मान_और_पुरस्कार

शिवाजी गणेशन को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने के अलावा दो बार राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा गया था। इनको भारत सरकार द्वारा सन 1984 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था

निधन

तमिल फ़िल्मों के सुपरस्टार शिवाजी गणेशन का 21 जुलाई 2001 को 74 साल की उम्र में निधन हो गया।

बुधवार, 19 जुलाई 2023

अमर सिंह चमकिला

अमर सिंह चमकीला 
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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
 🎂21 जुलाई 1960 
⚰️08 मार्च 1988 दुपहर 02 बजे 🔫खालिस्तान मूमेंट में गोलियों से भून कर 🎤पंजाबियत गायकी की हत्या करदी गई😭
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पंजाबी संगीत के एक भारतीय गायक और संगीतकार थे। चमकिला और उनकी पत्नी अमरजोत की उनके बैंड के दो सदस्यों के साथ 8 मार्च 1988 को एक हत्या में हत्या कर दी गई थी, जो अनसुलझी है।

अमर सिंह चमकिला को पंजाब के अब तक के सबसे अच्छे लाइव स्टेज परफॉर्मर्स में से एक माना जाता है और वे गांव के दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी मासिक बुकिंग नियमित रूप से महीने में दिनों की संख्या से अधिक हो गई। चमकिला को आमतौर पर अब तक के सबसे महान और प्रभावशाली पंजाबी कलाकारों में से एक माना जाता है।

उनका संगीत पंजाबी गाँव के जीवन से काफी प्रभावित था, जिससे वे बड़े हुए थे। उन्होंने आमतौर पर विवाहेतर संबंधों, उम्र बढ़ने, शराब पीने, नशीली दवाओं के उपयोग और पंजाबी पुरुषों के गर्म मिजाज के बारे में गीत लिखे। उन्होंने अपने अश्लील संगीत के बारे में अपने विरोधियों और पंजाबी संस्कृति और समाज पर एक सच्ची टिप्पणी के बारे में अपने समर्थकों के साथ एक विवादास्पद प्रतिष्ठा अर्जित की।

उनकी सबसे प्रसिद्ध हिट में "पहले ललकरे नाल" और उनके भक्ति गीत "बाबा तेरा ननकाना" और "तलवार मैं कलगीधर दी" शामिल हैं। हालाँकि उन्होंने इसे खुद कभी रिकॉर्ड नहीं किया, लेकिन उन्होंने व्यापक रूप से लोकप्रिय "जट दी दुश्मनी" लिखी, जिसे कई पंजाबी कलाकारों ने रिकॉर्ड किया है। वह अपने पहले रिकॉर्ड किए गए गीत "ताकुए ते तकुआ" के परिणामस्वरूप प्रसिद्ध हुए।
मेहसमपुर, पंजाब में प्रदर्शन करने के लिए आने के बाद, चमकिला और अमरजोत दोनों को 8 मार्च 1988 को लगभग 2 बजे अपने वाहन से बाहर निकलते ही गोलियों से भून दिया गया था। मोटरसाइकल सवारों के एक गिरोह ने कई राउंड फायरिंग की, जिससे दंपती और उनके दल के अन्य सदस्य घायल हो गए। हालांकि, शूटिंग के सिलसिले में कभी कोई गिरफ्तारी नहीं की गई और मामला कभी सुलझा नहीं पाया गया।

आशा भोसले

आशा भोसले 🎂08 सितंबर 1933 ⚰️12 अप्रैल 2026 जन्म की तारीख और समय: 8 सितंबर 1933, सांगली मृत्यु की जगह और तारीख: 12 अप्रैल 2026 ब...