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मंगलवार, 30 मई 2023

वनराज भाटिया


वनराज भाटिया

*🎂जन्म- 31 मई, 1927;*

*🕯️मृत्यु- 7 मई, 2021*

*भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार थे। उन्होंने अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर के अअभिनय से सजी फ़िल्म 'अजूबा' का संगीत दिया था। 'तमस', 'अंकुर', 'मंथन', 'मंडी', 'जुनून' और 'कलयुग' जैसी फिल्मों में भी वनराज भाटिया ने संगीत दिया।*

*भाटिया टेलीविजन फिल्म तमस (1988) के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार , रचनात्मक और प्रायोगिक संगीत के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1989) और भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री (2012) के प्राप्तकर्ता थे ।*

🔛प्रारंभिक जीवन और शिक्षा



कच्छी व्यवसायियों के परिवार में जन्मे, भाटिया ने बॉम्बे में न्यू एरा स्कूल में पढ़ाई की और देवधर स्कूल ऑफ़ म्यूज़िक में एक छात्र के रूप में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा। एक किशोर के रूप में त्चैकोव्स्की के पियानो कॉन्सर्टो नंबर 1 को सुनने पर , उन्हें पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में दिलचस्पी हो गई और उन्होंने चार साल तक डॉ मानेक भगत के साथ पियानो का अध्ययन किया।

1949 में एल्फिंस्टन कॉलेज , बॉम्बे विश्वविद्यालय से अपना एमए (अंग्रेजी ऑनर्स) अर्जित करने के बाद , भाटिया ने रॉयल एकेडमी ऑफ म्यूजिक , लंदन में हावर्ड फर्ग्यूसन , एलन बुश और विलियम अल्विन के साथ रचना का अध्ययन किया , जहां वे सर माइकल कोस्टा छात्रवृत्ति के प्राप्तकर्ता थे। (1951-54)। 1954 में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक होने के बाद, भाटिया ने एक रॉकफेलर छात्रवृत्ति (1954-58) और साथ ही एक फ्रांसीसी सरकार छात्रवृत्ति (1957-58) जीती, जिसने उन्हें पांच साल के लिए कंसर्वेटोएरे डे पेरिस में नादिया बूलैंगर के साथ अध्ययन करने की अनुमति दी। .

🔛आजीविका

1959 में भारत लौटने पर, भाटिया भारत में एक विज्ञापन फिल्म (शक्ति सिल्क साड़ियों के लिए) के लिए संगीत बनाने वाले पहले व्यक्ति बने, और लिरिल ,  गार्डन वरेली और 7,000 से अधिक जिंगल्स की रचना की। डुलक्स । इस दौरान वे 1960 से 1965 तक दिल्ली विश्वविद्यालय में पश्चिमी संगीतशास्त्र के रीडर भी रहे।

भाटिया की पहली फीचर फिल्म स्कोर श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी अंकुर (1974) के लिए थी, और उन्होंने बेनेगल के लगभग सभी कामों को स्कोर किया, जिसमें फिल्म मंथन (1976) का गीत "मेरो गाम कथा पारे" भी शामिल था। भाटिया ने मुख्य रूप से भारतीय न्यू वेव आंदोलन में फिल्म निर्माताओं के साथ काम किया , जैसे गोविंद निहलानी ( तमस , जिसने भाटिया को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता ), कुंदन शाह ( जाने भी दो यारो ), अपर्णा सेन ( 36 चौरंगी लेन ), सईद अख्तर मिर्जा ( मोहन जोशी हाजिर हो! ),कुमार शाहनी ( तरंग ), विधु विनोद चोपड़ा ( खामोश ), विजया मेहता ( पेस्टोंजी ) और प्रकाश झा ( हिप हिप हुर्रे )।

भाटिया ने जवाहरलाल नेहरू की द डिस्कवरी ऑफ इंडिया पर आधारित खानदान , यात्रा , वागले की दुनिया , बनेगी अपनी बात और 53-एपिसोड भारत एक खोज जैसे टेलीविज़न शो के साथ-साथ कई वृत्तचित्र बनाए हैं। उन्होंने म्यूजिक टुडे लेबल पर आध्यात्मिक संगीत के एल्बम भी जारी किए हैं, और एक्सपो '70, ओसाका और एशिया 1972, नई दिल्ली जैसे व्यापार मेलों के लिए संगीत तैयार किया है।

भाटिया भारत में पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रसिद्ध संगीतकार हैं। पियानो के लिए फंतासिया और फ्यूग्यू इन सी , स्ट्रिंग्स के लिए सिनफ़ोनिया कॉन्सर्टेंटे और गीत चक्र सिक्स सीज़न उनकी सबसे अधिक बार की जाने वाली रचनाएँ हैं । उनका रेवेरी जनवरी 2019 में मुंबई में एक संगीत कार्यक्रम में यो-यो मा द्वारा प्रदर्शित किया गया था , और गिरीश कर्नाड के इसी नाम के नाटक पर आधारित उनके ओपेरा अग्नि वर्षा के पहले दो कृत्यों का न्यूयॉर्क शहर में प्रीमियर हुआ था। 2012 में सोप्रानो जूडिथ केलॉक द्वारा प्रोडक्शन में।

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मौत


भाटिया का 7 मई, 2021 को वृद्धावस्था के कारण मुंबई में उनके घर पर निधन हो गया।

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🔛एकल पियानो के लिए संगीत

राग बहार में टोकाटा नंबर 1 (सी। 1950)
सोनाटा (1952)
परिचय और प्रतिगामी (1959)
फंटासिया और फ्यूग्यू इन सी (1999)
"अग्नि वर्षा" पर रैप्सोडी (2007)
गुजराती नर्सरी (2010

🔛टेलीविजन स्कोर
संपादन करना
खानदान (1985)
कथा सागर (1986) - चयनित एपिसोड
यात्रा (1986)
तमस (1987)
भारत एक खोज (1988)
नकाब (1988)
वागले की दुनिया (1988)
लाइफलाइन (1991)
बैंगन राजा (सी. 1990 के दशक)
बाइबिल की कहानियां (1993) - चयनित एपिसोड
बनेगी अपनी बात (1994)
संक्रांति (1997)

शनिवार, 6 मई 2023

प्रसिद्ध संगीतकार वनराज भाटिया की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि

31 मई जन्म
07 मई मृत्यु
प्रसिद्ध संगीतकार वनराज भाटिया की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि

वनराज भाटिया भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार थे। उन्होंने अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर के अअभिनय से सजी फ़िल्म 'अजूबा' का संगीत दिया था। 'तमस', 'अंकुर', 'मंथन', 'मंडी', 'जुनून' और 'कलयुग' जैसी फिल्मों में भी वनराज भाटिया ने संगीत दिया। वनराज भाटिया को 1988 में गोविंद निहलानी की फिल्म 'तमस' में सर्वश्रेष्ठ संगीत के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला और 2012 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। उन्होंने 60 के दशक में कई मशहूर ऐड फिल्मों का संगीत देते हुए अपने संगीतमय कॅरियर की शुरुआत की थी।

संगीत निर्देशक वनराज भाटिया का जन्म 31 मई, 1927 को बॉम्बे, ब्रिटिश भारत में हुआ था। उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा 2012 में उन्हें पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है। सन 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वनराज भाटिया ने लंदन स्थित रॉयल एकेडमी ऑफ म्यूजिक से वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक की शिक्षा ली थी।

कॅरियर

70 और 80 के दशक की समानांतर फिल्मों में सुमधुर संगीत देने के लिए वनराज भाटिया मशहूर रहे। एक समय सिनेमा जगत में उनका ऊंचा नाम था और उनके द्वारा संगीतबद्ध किए गए गाने खूब पसंद किए जाते हैं। कॅरियर की ऊंचाइयों को छूने वाले वनराज भाटिया ने जीवन के अंतिम वर्ष आर्थिक संकट भी देखा। गायकों, गीतकारों और संगीतकार के हितों का ख्याल रखने वाली 'इंडियन परफॉर्मिंग राइट्स सोसायटी' (आईपीआरेस) की‌ ओर से भी उनकी आर्थिक मदद की गई थी।

साल 1974 में रिलीज हुई श्याम बेनेगल निर्देशित फिल्म 'अंकुर' बतौर संगीतकार वनराज भाटिया की पहली फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने 'मंथन', '36 चौरंगीलेन', 'निशांत', 'भूमिका', 'कलयुग', 'जुनून', 'मंडी', 'हिप हिप हुर्रे', 'आघात' 'मोहन जोशी हाजिर हो' 'पेस्टनजी', 'खामोश', 'जाने भी दो यारों' जैसी फिल्मों में बतौर संगीतकार काम किया। कई फिल्मों में वनराज भाटिया ने पार्श्व संगीत दिया भी था। 'अजूबा', 'दामिनी' और 'परदेस' जैसी मुख्यधाराओं की फिल्मों से भी वह जुड़े रहे।

पुरस्कार व सम्मान

वनराज भाटिया को फ‍िल्‍म 'तमस' (1988) के लिए बेस्‍ट म्‍यूजिक डायरेक्‍शन का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।
इसके बाद उन्‍हें 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्‍मानित किया गया।
साल 2012 में भारत सरकार ने उन्‍हें चौथे सबसे प्रतिष्ठित नागर‍िक सम्‍मान 'पद्मश्री' से सम्‍मानित किया था।

आर्थिक तंगी

वनराज भाटिया अपने जीवन के अंत समय में आर्थिक तंगी से गुजरे। हिंदी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता आमिर ख़ान ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था कि "यह बताते हुए खुशी हो रही है कि म्यूजिक कंपोजर वनराज भाटिया की जिंदगी पर किताब लिखी जाएगी। किताब को खालिद मोहम्मद लिखेंगे। यह किताब मेरे दोस्त दलीप ताहिल की पहल पर लिखी जा रही है"। वनराज भाटिया घुटने में तकलीफ की समस्या से ग्रस्त थे। सुनने की क्षमता कम हो रही थी और धीरे-धीरे उनकी याददाश्त भी कमजोर होती जा रही थी। आमिर ख़ान से पहले वनराज भाटिया की मदद के लिए अभिनेता कबीर बेदी ने लोगों से अपील की थी कि वे वनराज की मदद करें। वहीं निर्देशक श्याम बेनेगल भी यह अपील कर चुके थे। वनराज भाटिया अपनी ज़िंदगीभर की कमाई साल 2000की शुरुआत में स्टॉक ट्रेडिंग में गंवा बैठे थे।

मृत्यु

हिन्दी सिनेमा के जाने माने संगीतकार वनराज भाटिया का निधन 7 मई, 2021 को हुआ। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे और 94 साल की उम्र में मुंबई के नेपियनसी रोड स्थित घर में उन्‍होंने तकरीबन 8.30 बजे अंतिम सांस ली।


प्रेम धवन

13 जून
07 मई
महान गीतकार,संगीतकार,नृत्य निर्देशक प्रेम धवन की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

प्रेम धवन हिंदी सिनेमा जगत् के मशहूर गीतकार थे। उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों के लिये कई मशहूर गीत लिखे। प्रेम धवन ना केवल गीतकार थे, वरन् इन्होंने हिन्दी फ़िल्मों के लिये कुछ फ़िल्मों में संगीत भी दिया, नृत्य निर्देशन भी किया और अभिनय भी किया। प्रेम धवन ने पं.रवि शंकर से संगीत एवं पंडित उदय शंकर से नृत्य की शिक्षा ली। भारत सरकार ने प्रेम धवन को 1970 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।

जीवन परिचय

हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर गीतकार प्रेम धवन का जन्म 13 जून 1923 को अम्बाला में हुआ और लाहौर के एफ़.सी. कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी की। मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी इनके सहपाठी थे और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल सीनियर छात्र थे। साहिर लुधियानवी और प्रेम धवन यूनियन के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। कॉलेज की पत्रिका में दोनों ने जमकर लिखा। साहिर लुधियानवी ग़ज़ल रचते थे और प्रेम धवन, गीत लिखते थे।

कैरियर

फ़िल्म वचन से मिली कामयाबी

वर्ष 1955 मे प्रदर्शित फिल्म वचन की कामयाबी के बाद प्रेम धवन बतौर गीतकार कुछ हद तक अपनी पहचान बनाने मे सफल हो गए। फिल्म वचन का गीत चंदा मामा दूर के श््रोताओं में आज भी लोकप्रिय है। वर्ष 1961 मे संगीत निर्देशक सलिल चौधरी के संगीत निर्देशन में फिल्म काबुली वाला की सफलता के बाद प्रेम धवन शोहरत की बुलंदियों पर जा पहुंचे। फिल्म काबुली वाला में पाश्र्वगायक मन्ना डे की आवाज में प्रेम धवन का यह गीत ए मेरे प्यारे वतन ऎ मेरे बिछड़े चमन आज भी श््रोताओं की आंखो को नम कर देता है। वर्ष 1965 प्रेम धवन के सिने कैरियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष प्रेम धवन ने फिल्म शहीद के लिये संगीत निर्देशन किया। फिल्म शहीद के बाद प्रेम धवन ने कई फिल्मों के लिये संगीत दिया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रेम धवन ने नृत्य निर्देशक के तौर पर भी काम किया।

नया दौर के गीत उड़े जब जब जुल्फे तेरी"

वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म नया दौर के गीत "उड़े जब जब जुल्फे तेरी" का नृत्य निर्देशन प्रेम धवन ने किया। इसके अलावा दो बीघा जमीन, सहारा और धूल का फूल में भी प्रेम धवन ने नृत्य निर्देशन किया। प्रेम धवन अपने सिने कैरियर के दौरान इप्टा (इंडियन पीपुल्स थिएटर) के सक्रिय सदस्य बने रहे। त्रिवेणी पिकचर्स के बैनर तले प्रेम धवन ने कई फिल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया। इन फिल्मों के जरिये प्रेम धवन ने परिवार नियोजन, राष्ट्रीयता और सामाजिक मुद्दे को दर्शकों के सामने पेश किया। देश भक्ति की भावना से परिपूर्ण प्रेम धवन ने सैनिकों के मनोरंजन के लिये लद्दाख और नाथुला में सुनील दत्त तथा नरगिस दत्त के साथ दौरा करके अपने गीत-संगीत से सैनिकों का मनोरंजन किया। वर्ष 1970 में फिल्म जगत में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। प्रेम धवन ने अपने सिने कैरियर में लगभग 300 फिल्मों के लिये गीत लिखे

प्रेम धवन आगे चलकर कांग्रेस पार्टी से भी जुड़े। शिक्षा के बाद ‘पीपुल्स थियेटर ग्रुप’ में शामिल हुए। जिसके द्वारा चार वर्षों तक नृत्य और संगीत का प्रशिक्षण लिया। कम लोग जानते हैं कि प्रेम धवन ने लगभग 50 फ़िल्मों में नृत्य निर्देशन किया। फ़िल्म ‘नया दौर’ का 'उड़े जब-जब जुल्फें तेरी'- प्रेम धवन के ही निर्देशन का कमाल था। फ़िल्म ‘दो बीघा ज़मीन’ के गीत ‘हरियाला सावन ढोल बजाता आया’ में तो प्रेम थिरके भी हैं। जब 'थिएटर ग्रुप' असमय ही बिखरा, तो लेखिका इस्मत चुगताई बॉम्बे टॉकीज ले गईं। जहाँ फ़िल्म ‘ज़िद्‍दी’ के लिए पहला ब्रेक मिला। गायिका लता मंगेशकर का ‘चंदा जा रे जा रे...’ पहला हिट इसी फ़िल्म में था। यहाँ से बॉम्बे टॉकीज ने गीत लेखन और नृत्य निर्देशन के लिए उन्हें अनुबंधित कर लिया। अनुबंध के बाद जब स्वतंत्र लेखन किया, तब संगीतकार अनिल बिस्वास, सलिल चौधरी, मदन मोहन और चित्रगुप्त के साथ अच्छा तालमेल रहा। आख़िरी बार प्रेम ने फ़िल्म ‘अप्पूराजा’ के लिए लिखा।

लोकप्रिय_गीत

बोल पपीहे बोल रे (आरजू)
सीने में सुलगते हैं अरमाँ (तराना)
चंदा मामा दूर के (वचन)
दिन हो या रात हम रहें तेरे साथ (मिस बॉम्बे)
ज़िंदगी भर गम जुदाई का (मिस बॉम्बे)
छोड़ो कल की बातें (हम हिन्दुस्तानी)
अँखियन संग अँखियाँ लागी (बड़ा आदमी)
ऐ मेरे प्यारे वतन (काबुलीवाला)
तेरी दुनिया से दूर चले हो के मजबूर (ज़बक)
महलों ने छीन लिया बचपन का (ज़बक)
ऐ वतन, ऐ वतन, हमको तेरी क़सम (शहीद)
मेरा रंग दे बसंती चोला (शहीद)
तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला (पवित्र पापी)

लेखन_शैली

प्रेम धवन भावुक इतने थे कि अपनी लोरी ‘तुझे सूरज कहूँ या चंदा...मेरा नाम करेगा रोशन’ को रचते हुए कई बार रो पड़े। फ़िल्म के किरदार को शिद्दत से महसूस करने के बाद वे लिखते थे। फ़िल्म ‘एक साल’ में नायिका, नायक अशोक कुमार को चाहती है। जब नायक महसूस करता है और लौटकर आता है तब वह कैंसर की मरीज़ होकर मृत्युशैया पर है। इसे अपने दिल की गहराई में उतारकर उन्होंने रचा-

सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया
दिन में अगर चिराग जलाए तो क्या किया
ले-ले के हार फूलों का आई तो थी बहार
नज़रें उठा के हमने ही देखा न एक बार...
आँखों से अब ये पर्दे हटाए तो क्या किया।

निधन

7 मई, 2001 को मुंबई के जसलोक अस्पताल में प्रेम धवन हृदयाघात (हार्ट अटैक) में चल बसे। दिल को छू लेने वाले गीतों में प्रेम की याद हमेशा बनी रहेगी।
📽️🎶
प्यार का सागर (1961)
Music By: रवि
Lyrics By: प्रेम धवन
Performed By: आशा भोसले, मो.रफ़ी

मुझे प्यार की ज़िन्दगी देने वाले
कभी ग़म ना देना ख़ुशी देने वाले
मुझे प्यार की ज़िंदगी...
मोहब्बत के वादे भुला तो न दोगे
कहीं मुझसे दामन छुड़ा तो न लोगे
मेरे दिल की दुनिया है तेरे हवाले
मुझे प्यार की ज़िंदगी...

ज़माने में तुमसे, नहीं कोई प्यारा
ये जाँ भी तुम्हारी, ये दिल भी तुम्हारा
जो ना हो यकीं तो कभी आज़मा ले
मुझे प्यार की ज़िंदगी...

भरोसा है हमको मोहब्बत पे तेरी
तो फिर हँस के देखो निगाहों में मेरी
ये डर है ज़माना जुदा कर ना डाले
मुझे प्यार की ज़िंदगी...

रोहन मेहरा

रोहन मेहरा एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं। वह बॉलीवुड फिल्म उद्योग में काम करता है। उनका पूरा नाम रोहन है  विनोद मेहरा . रोहन का जन्म 7 मई 1991 को हुआ था। उनका जन्म मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। वह 5 फीट, 11 इंच लंबा (1.75 एमएस) है। उनके पिता का नाम विनोद मेहरा और उनकी माता का नाम किरण मेहरा है। उनके पिता, विनोद मेहरा, एक अनुभवी बॉलीवुड फिल्म अभिनेता और निर्देशक थे।

उनकी एक बहन है जिसका नाम है  सोनिया मेहरा . उनकी बहन सोनिया मेहरा भी एक अभिनेत्री हैं। ऐसी अफवाह है कि वह बॉलीवुड अभिनेत्री को डेट कर रहे थे  तारा सुतारिया . रोहन ने यूनाइटेड किंगडम में नॉटिंघम विश्वविद्यालय से अर्थमिति और गणित में डिग्री के साथ स्नातक किया है। रोहन अपने पिता विनोद मेहरा के निधन के बाद केन्या चले गए। उन्हें बॉलीवुड टाउन में कभी स्टार किड का दर्जा नहीं मिला।

उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां उनके और उनकी बहन के साथ अपने नाना-नानी के पास रहने के लिए केन्या चली गईं। अब उसके पास केन्याई राष्ट्रीयता है। यूके में स्नातक होने के बाद वे केन्या लौट आए। फिर उन्होंने कुछ समय के लिए केन्या में काम करना शुरू किया। तब उन्होंने महसूस किया कि डेस्क जॉब उनके बस की बात नहीं है, और उन्हें अपने पिता की विरासत को जारी रखना है।

उन्होंने कुछ अभिनय पाठ्यक्रम लिए और बॉलीवुड उद्योग में अपनी किस्मत आजमाने लगे। रोहन 2012 में मुंबई चले गए। उन्होंने कुछ अभिनय कार्यशालाओं में भाग लिया और अपनी किस्मत आजमाई। उन्होंने आफ्टरवर्ल्ड (2013) नामक एक लघु फिल्म भी लिखी। इसके बाद उन्होंने सहायक निदेशक के रूप में काम किया संजय लीला भंसाली     उनकी फिल्म के लिए बाजीराव मस्तानी (2015)। रोहन के बारे में सुना  निखिल आडवाणी  की फिल्म, और उन्होंने एक भूमिका के लिए उनसे संपर्क किया। निखिल आडवाणी रोहन से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें अपनी फिल्म में मुख्य भूमिका दी। यह फिल्म बाज़ार (2018) रोहन के लिए पेशेवर अभिनय की शुरुआत के रूप में चिह्नित है। इस फिल्म में भी था और  चित्रांगदा सिंह   प्रमुख भूमिकाओं में। रोहन ओप्पो मोबाइल्स के साथ एक टीवी विज्ञापन में भी दिखाई दिए दीपिका पादुकोण  रोहन के पसंदीदा अभिनेता हैं   विक्की कोशल और राज कुमार राव


. उनकी पसंदीदा अभिनेत्री हैं श्रद्धा कपूर. उनकी पसंदीदा डिश पैनकेक है। उनका पसंदीदा खेल फुटबॉल है। उनका पसंदीदा फुटबॉल क्लब लिवरपूल एफसी है। उनकी पसंदीदा फिल्में खामोशी, कल हो ना हो, देवदास, कंपनी, गैंग्स ऑफ वासेपुर और कई अन्य हैं। उनके शौक गिटार बजाना, कीबोर्ड बजाना, यात्रा करना, फोटोग्राफी करना और फुटबॉल देखना है। वह एक कुत्ता प्रेमी है और उसके पास पुंबा नाम का एक कुत्ता है।

रोहन मेहरा का जन्म  8 अप्रैल 1990 को  अमृतसर  में हुआ था उसका बचपन से ही अभिनय और स्टोरिंग का बहुत बड़ा शौक था उसके  परिवार  में 5 सदस्य हैं जिनमें दो उसके माता-पिता और दो भाई बहन उसके साथ रहने वाले परिवार में कुल 5 सदस्य हैं 
बचपन से ही  अभिनय और फिल्मांकन  का अच्छा शौक उसे था इसलिए वह अपने अभिनय के दम पर पूरी  टीवी शो  की दुनिया में आज रोहन मेहरा बहुत ही जाने वाले चेहरे बन गए हैं रोहन कॉलेज के बाद ही  व्यूअर  शुरू कर दी थी, उस दौरान उन्होंने छोटा- बड़े मिलाकर लदान सौ से कई बड़े प्राधिकरण के एड्स हुए जिनमें  हीरो साइकिल , सैमसंग ,  रीबॉक ,  यू  जैसी कंपनियाँ भी थीं
रोहन मेहरा  2015 में उन को  ये रिश्ता है  टीवी शो में  नक्श  का रोल मिला और तभी से वह बहुत ही नाम कमा चुका है और अभी वह बहुत ही जाने-माने एक्टर बन गए हैं 
रोहन मेहरा ने 2016 में बिग बॉस सीज़न 10 में भी कंटेस्टेंट ने पार्टिसिपेट किया और  सुसुराल सिमर के टीवी शो  में भी उन्होंने  समीर धनराज कपूर  का रोल रोल किया

रोहन मेहरा ने 2016 में बिग बॉस सीज़न 10 में भी कंटेस्टेंट ने पार्टिसिपेट किया और  सुसुराल सिमर के टीवी शो  में भी उन्होंने  समीर धनराज कपूर  का रोल रोल किया
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पिता - रवींद्र मेहरा
माता - रश्मी मेहरा
बहन - रीतिका मेहरा
भाई - सिद्धार्थ मेहरा

आशा भोसले

आशा भोसले 🎂08 सितंबर 1933 ⚰️12 अप्रैल 2026 जन्म की तारीख और समय: 8 सितंबर 1933, सांगली मृत्यु की जगह और तारीख: 12 अप्रैल 2026 ब...