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मंगलवार, 28 मार्च 2023

एस एन त्रिपाठी

प्रसिद्ध संगीतकाऱ एस एन त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
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आज हम एक ऐसे बिसरा दिए गए संगीतकार की यादों को लेकर आपसे मुखातिब हैं जिन्होंने पिछली सदी के पाँचवें और छठवें दशक में अपनी कुछ बेहद सुरीली धुनों से फ़िल्म संगीत प्रेमियों के दिलों में एक स्थाई जगह बनाई हुई थी.
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एस एन त्रिपाठी, का जन्म 14 मार्च 1913 में  वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था।  उनके पिता, दामोदर दत्त ठाकुर, एक स्कूल प्रिंसिपल थे इलाहाबाद से बीएससी करने के बाद, त्रिपाठी ने लखनऊ के पंडित वी एन भातखंडे की मॉरिस कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक से शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उन्होंने मशहूर महिला संगीतकार सरस्वती देवी के सहायक के रूप में भी एक समय काम किया था. यह एस. एन. त्रिपाठी ही थे जिन्होंने अशोक कुमार और देविका रानी को 'मैं बन की चिड़िया' जैसे अमर गीत को गाने का अभ्यास करवाया था.
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हिन्दी फ़िल्म संगीत के क्षेत्र में एक संगीत निर्देशक के तौर पर एस. एन. त्रिपाठी जी की मान्यता धार्मिक और पौराणिक फ़िल्मों के संगीतकार के रूप में ही होती है.
उनके खाते में दर्ज़ दर्जनों फ़िल्में ऐसी हैं जिनके नाम सुनकर एक बात का अन्दाज़ा लगता है कि त्रिपाठी जी किस तरह 'बी' और 'सी' ग्रेड की ढेरों धार्मिक फ़िल्मों के लिए अपने हुनर को धुनों के माध्यम से व्यक्त कर रहे थे.
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ऐतिहासिक_फ़िल्में
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'हनुमान पाताल विजय', 'दुर्गा पूजा', 'राम हनुमान युद्ध', 'सती नाग कन्या', 'लक्ष्मी-नारायण', 'बजरंगबली', 'रामलीला', 'श्री गणेश महिमा' और 'उत्तरा अभिमन्यु' ऐसे कुछ उदाहरण हैं जिन फ़िल्मों में त्रिपाठी जी के गीत गूँजे.
धार्मिक फ़िल्मों की ज़मीन से अलग, स्तरीय ढंग की कुछ बेहद कर्णप्रिय धुनों को एस. एन. त्रिपाठी ने ऐतिहासिक फ़िल्मों के माध्यम से भी रचा था. यह कहा जा सकता है कि यही वे फ़िल्में हैं जिनके कारण उनकी एक संगीतकार की हैसियत से एक प्रमुख उपस्थिति हिन्दी फ़िल्म संगीत की दुनिया में आज तक कायम है.
'लाल किला', 'कवि कालिदास', रानी रूपमती', 'नादिरशाह', 'जय चितौड़', 'दिल्ली दरबार' और 'संगीत सम्राट तानसेन' जैसी फ़िल्मों के गीतों के कारण आज भी त्रिपाठी जी को बहुत आदर से याद किया जाता है.
त्रिपाठी जी की संगीत के प्रति धैर्य और साधना की युक्तियों को उतने ही सरस ढंग से उनकी धुनों में टटोलना चाहिए जिसे उनके संगीतकार को आज तक संगीत प्रेमी भूल नहीं पाए हैं.
'शाम भई घनश्याम न आए', 'सखी कैसे धरूँ मैं धीर', 'रात सुहानी झूमे जवानी', 'नैनों से नैनों की बात हुई' और 'जरा सामने तो आओ छलिये' ऐसे ही श्रुति-मधुर गीत हैं.
इन गीतों से अलग एस. एन. त्रिपाठी की एक बड़ी खासियत उनके द्वारा कम्पोज़ की गई शास्त्रीय बन्दिशों जैसी धुनों को लेकर भी रही है जिसमें उन्हें महारत हासिल है.
ऐसे गीतों को सुनकर यह बात सहज ही समझ में आती है कि पिछले दौर में जिसे फ़िल्म संगीत का सुनहरा दौर भी कहा जाता है, वह बहुत कुछ ऐसे ही गीतों के कारण भी सम्भव हुआ होगा.
एक-दो उदाहरणों से इस बात को देख सकते हैं- 'बाट चलत नई चुनरी रंग डारी' (रानी रूपमती) और 'साँझ हो गई प्रभु तुम्हीं प्रकाश दो' (जय चित्तौड़) ऐसे ही उज्ज्वल उदहारण हैं.
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दर्द_भरे_गीत
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त्रिपाठी जी ने कुछ बेहद सुन्दर गीत लता मंगेशकर और मुकेश की आवाज़ों में भी संभव किए थे, जो विरह या दर्द-भरे गीतों के अप्रतिम मिसाल माने जाते हैं.
इन गीतों में स्वरों का लगाव, शास्त्रीय ढंग से बोलों को बरतने की कोशिश, ऑर्केस्ट्रेशन का बहुत हल्का-सा मन्थर प्रवाह अद्भुत ढंग से व्यक्त हुआ है, जो इन गीतों को किसी भी बड़े से बड़े संगीतकार के दर्द-भरे गीतों की श्रेणी में बराबर से स्थान देने लायक बना गया है.
इन्हें सुनकर आप सहज की एस. एन. त्रिपाठी की प्रतिभा को एस. डी. बर्मन, जयदेव, मदन मोहन और नौशाद के गीतों के बरक्स रखकर देख सकते हैं. ऐसे में मुकेश का गाया 'झूमती चली हवा याद आ गया कोई' (संगीत सम्राट तानसेन) मिसाल के तौर पर याद किया जाने वाला आदर्श गीत होगा.
एस. एन. त्रिपाठी का संगीत धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक फ़िल्मों के माध्यम से एक बिल्कुल अलग धरातल पर खड़ा नज़र आता है जिसमें फ़िल्मों के कथानक और परिवेश के अनुकूल ही पार्श्व ध्वनियों के साथ धुनों में लालित्य पैदा किया गया है.
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शास्त्रीय_और_लोक_रंग
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कई मर्तबा ऑर्केस्ट्रेशन संयोजन से, तो कई बार इसे उपयुक्त रागों के सुरों को लेकर रचा गया है, जिनमें दरबारी, मालकौंस, दरबारी कान्हड़ा, शिवरंजनी, हेमन्त और खमाज जैसे रागों की प्रधानता रही है.
एस. एन. त्रिपाठी ने राजस्थानी शैली का एक बेहद सुन्दर युगल-गीत 'थाने काजलियो बना लूँ' फ़िल्म 'वीर दुर्गादास' के लिए कम्पोज़ किया था, जो आज भी उतना ही लोकप्रिय है.
इसी तरह उन्होंने कुछ भोजपुरी फिल्मों में भी संगीत दिया, जिसमें 'बिदेसिया' की चर्चा बहुत सम्मान से आज भी होती है.
इतनी विविधता से भरा हुआ संगीत का कोमल और मर्मस्पर्शी संसार, एस. एन. त्रिपाठी जी की देन रहा है, जिन्होंने शास्त्रीय और लोक रंग के सारे सुन्दर सुर चुनकर हिन्दी और भोजपुरी फ़िल्मों को उपलब्ध कराए.
आज भी उनकी संगीतकार के रूप में उपस्थिति उतनी ही सदाबहार और नवोन्मेषी लगती है, जितनी कि पिछली शताब्दी के पाँचवें और छठे दशक में शिखर पर चमक रही थी.

28 मार्च 1988 को त्रिपाठी का मुम्बई, महाराष्ट्र में 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया
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लक्ष्मीक कांत प्यारे लाल

संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जोड़ी के प्यारेलाल के छोटे भाई संगीतकार गणेश की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
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गणेश रामप्रसाद शर्मा "गणेश गणेश एक लोकप्रिय (14 जनवरी 1945 को जन्म 28 मार्च 2000) संगीतकार थे उनका जन्म 14 जनवरी 1945 में हुआ था वह संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जोड़ी के प्यारेलाल के छोटे भाई थे, गणेश ने अपने संगीत जीवन की शुरुआत 1966 में युगल संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के सहायक के रूप में की थी

गणेश एक प्रसिद्ध trumpeter पंडित रामप्रसाद शर्मा (जिन्हें बाबाजी के नाम से जाना जाता है) के पुत्र थे, जिन्होंने उन्हें संगीत की मूल बातें सिखाईं।  गणेश प्यारेलाल, नरेश शर्मा, गोरख शर्मा, आनंद शर्मा और महेश शर्मा आपस मे भाई हैं 

गणेश हिंदी फिल्म संगीत के एक बेहतरीन संगीतकार थे  60 के दशक के गाने हम तेरे बिन जी ना सकेंगे ..., दिल ने प्यार किया है एक बेवफा से ..., बिछुआ ने डंक मारा ..., जाम से पीना बुरा है।  .., मान गए ये तराना... आज भी लोकप्रिय सबसे लोकप्रिय गाने हैं।

गणेश रामप्रसाद शर्मा का 28 मार्च 2000 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 58 वर्ष के थे और उनके परिवार में एक पत्नी और दो बच्चे हैं।

गणेश द्वारा संगीतबद्ध फिल्में

दोज़ख (1987)
बदनाम (1976)
धमकी (1973)
चालाक (1973)
एक नारी दो रूप (1973)
शरारत (1972)
कुंदन (1972)
सा रे गा मा पा (1972)
कहीं आर कहीं पार (1971)
एक नन्ही मुन्नी लड़की थी (1970)
अंजाम (1968)
सब का उस्ताद (1967)
स्मगलर (1967)
ठाकुर जरनैल सिंह (1966)
हुस्न और इश्क (1966)
शेरा डाकू (1966)

गणेश द्वारा संगीतबद्ध चुनिंदा गीत 

दिल का सुना साज़ तराना ढूढ़ेगा ... फ़िल्म एक नारी दो रूप (1973)
कल रात सपने में आए थे तुम...फ़िल्म शरारत (1972)
एक नन्ही मुन्नी लड़की थी... फ़िल्म एक नन्ही मुन्नी लड़की (1970)
मैं जो गले लग जाऊंगी मैं... फ़िल्म अंजाम (1968)
दिल का नज़राना ले.... फ़िल्म चालाक (1973)
दिल का लगाना इस दुनिया में... फ़िल्म स्मगलर(1967)
ऐ मेरे दिल तेरी मंजिल अभी आने वाली है ... फ़िल्म हुस्न और इश्क (1966)
हम तेरे बिन जी ना सकेंगे...फ़िल्म ठाकुर जनरैल सिंह (1966)
ऐ दिलरुबा कल की बात कल के साथ गई ...फ़िल्म अंजाम (1968)
बांका सिपाही आया मेरी गलियां... फ़िल्म कुंदन (1972)
कैसे कैसे काम करें... फ़िल्म स्मगलर(1966)
नदी का किनारा मेंढ़क...फ़िल्म शरारत (1972)
हम तो कोई भी नहीं ...फ़िल्म शरारत (1972)
दिल ने प्यार किया है ...फ़िल्म शरारत (1972)
तू प्यार मांगे प्यार दे दूं...फ़िल्म सा-रे-गा-मा-पा (1972)
तुम ऐसे बसे मोरे नैन...फ़िल्म सा-रे-गा-मा-पा (1972)
दिल देके दर्द-ए-मोहब्बत...फ़िल्म शेरा डाकू(1966)
मजा बरसात का चाहो तो...फ़िल्म हुस्न और इश्क (1966)
दिल की फरियाद से डर... फ़िल्म हुस्न और इश्क(1966)
ये जलते हुए लब... फ़िल्म एक नन्ही मुन्नी लड़की थी (1970)
हम ही जाने एक तोरे मनवा की पीर...फ़िल्म  एक नारी दो रूप (1973)
यारो मुझे पीने दो... फ़िल्म धमकी (1973)

और भी कई यादगार गाने गणेश ने कंपोज़ किये है

मुनमुन सेन

प्रसिद्ध अभिनेत्री मुनमुन सेन के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

मुनमुन सेन (जन्म 28 मार्च 1954)एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री हैं, जिन्हें हिंदी, बंगाली, मलयालम, कन्नड़, तेलुगु, तमिल और मराठी फिल्मों में उनके कामों के लिए जाना जाता है।  उन्होंने अंततः बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय किया।  वह 60 फिल्मों और 40 टेलीविजन श्रृंखलाओं में दिखाई दी हैं।  फिल्म सिरिवेनेला में उनकी भूमिका के लिए उन्हें 1987 में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए आंध्र प्रदेश राज्य नंदी पुरस्कार मिला।

मुनमुन सेन का जन्म कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में लोकप्रिय बंगाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन और दिबानाथ सेन के यहाँ हुआ था। उनके पिता दीनानाथ सेन बल्लीगंज प्लेस कोलकाता के सबसे धनी व्यापारियों में से एक थे उनके दादा आदिनाथ सेन  त्रिपुरा के महाराजा के दीवान या मंत्री थे।

उनकी शिक्षा लोरेटो कॉन्वेंट, शिलांग और लोरेटो हाउस, कलकत्ता में हुई थी।  उन्होंने सोमरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और जाधवपुर विश्वविद्यालय, कलकत्ता से तुलनात्मक साहित्य में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

बचपन में मुनमुन सेन ने भारत के महान कलाकारों में से एक, जैमिनी रॉय से ड्राइंग सीखी  उसे पेंटिंग करना और प्राचीन वस्तुओं का संग्रह करना पसंद है।  2000 में एक साक्षात्कार में, उसने कहा कि उसने एक साल के लिए बैलीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल में पढ़ाया  और फिर फिल्म की तकनीक सिखाने वाली स्कूल चित्राणी में ग्राफिक्स पढ़ाया।  वह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय थी और उसने शादी से पहले भी एक बच्चा गोद लेने के बारे में सोचा था। मुनमुन सेन ने फिल्मों में आने से पहले कोलकाता के एक जाने-माने बॉयज़ स्कूल (बैलीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल) में अंग्रेज़ी पढ़ाई।

मून मून सेन ने शादी और मातृत्व के बाद फिल्मों और टेलीविजन में अपना कैरियर शुरू किया।  उन्होंने फ़िल्म अंदर बाहर (1984) से अपनी कैरियर की शुरुआत की। उस फिल्म में उनकी साहसी भूमिका ने जाहिर तौर पर विवादों की आंधी पैदा कर दी।

उन्होंने माधुरी दीक्षित के साथ एक सस्पेंस थ्रिलर 100 डेज़ में अभिनय किया था।  ज़ख्मी दिल (1994) के बाद वह 2003 तक फिल्मों में नहीं दिखीं जब उन्होंने असफल थ्रिलर कुछ तो है में अभिनय किया।  वह अपनी मां की सफलता का मुकाबला नहीं कर सकी।  वह प्रसिद्ध तेलुगु निर्देशक के। विश्वनाथ द्वारा निर्देशित एक तेलुगु फिल्म सिरिवेनेला में अभिनय किया

फिल्म उद्योग में प्रवेश करने से पहले और बाद में, वह कुछ मॉडलिंग असाइनमेंट में अकेली (या अपनी बेटियों के साथ) दिखाई दीं।  उन्होंने साबुन के विज्ञापनों के लिए विशेष रूप से मॉडलिंग की जो 1980 के दशक में काफी विवादास्पद थे।  कुछ टेलीविज़न धारावाहिक करने के अलावा, उन्होंने कुछ बंगाली टेली-फ़िल्में भी कीं।

कोरक डे द्वारा निर्देशित उनकी फिल्म माई कर्मा (2004) ने उनको अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई फिल्म में उन्होंने एक "कठिन और प्यारी भारतीय पत्नी की भूमिका निभाई जो अपने पति के पीछे एक चट्टान की तरह खड़ी रहती है इस फ़िल्म ने उनको अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया

वह अब कम फिल्में ही कर रही हैं। वह बंगाली में एक रसोई की किताब भी लिख रही है, जिसे प्रकाशित किया जाना बाकी है।

मुनमुन सेन ने 1978 में त्रिपुरा राज्य के पूर्ववर्ती शाही परिवार के वंशज से शादी की।  उनकी दो बेटियाँ, अभिनेत्रियाँ राइमा सेन और रिया सेन हैं। अपने पेशेवर अभिनय कैरियर के लगातार समर्थन के लिए, उनके दिल मे अपने पति के लिए  बहुत सम्मान है।

उनकी दिवंगत सास, इंदिरा राजे की बेटी इला देवी, कूच बिहार की राजकुमारी और जयपुर की महारानी गायत्री देवी की बड़ी बहन थीं।

प्रसिद्ध फिल्में

2003 कुछ तो है 
2003 लव एट टाइम्स स्क्वैर 
2001 12 बी 
1994 ज़ख्मी दिल माला 
1992 वक्त का बादशाह 
1991 इरादा 
1991 विषकन्या 
1991 100 डेज़ रमा 
1990 पत्थर के इंसान 
1990 जीवन एक संघर्ष 
1990 लेकिन 
1989 तेरे बिना क्या जीना 
1989 मिल गयी मंज़िल मुझे 
1987 प्यार की जीत 
1986 शीशा
1986 मुसाफ़िर 
1986 जाल 
1984 अंदर बाहर

आशा भोसले

आशा भोसले 🎂08 सितंबर 1933 ⚰️12 अप्रैल 2026 जन्म की तारीख और समय: 8 सितंबर 1933, सांगली मृत्यु की जगह और तारीख: 12 अप्रैल 2026 ब...