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सोमवार, 3 अप्रैल 2023

N.CHANDRA


*प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता निर्देशक एन चंद्रा के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं*

बॉलीवुड में एन.चंद्रा को एक ऐसे फिल्मकार के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने सामाजिक पृष्ठभूमि पर फिल्में बनाकर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनायी है। एन.चन्द्रा का मूल नाम चंद्रशेखर नार्वेकर था। उनका जन्म 04 अप्रैल 1952 को मुंबई में हुआ था। उनकी मां मुंबई नगर निगम में लिपिक के पद पर कार्यरत थीं जबकि उनके पिता फिल्म सेंटर में लैबोरेटरी प्रभारी के रूप में काम किया करते थे। एन.चंद्रा ने स्नातक की पढ़ाई मुंबई विश्वविद्यालय से पूरी की। इसके बाद वह निर्माता-निर्देशक सुनील दत्त के साथ बतौर सहायक एडिटर काम करने लगे । बतौर एडिटर उन्होंने अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1969 में प्रदर्शित फिल्म ..रेशमा और शेरा ..से की।

इस बीच उन्होंने प्राण मेहरा,वमन भोंसले के साथ भी बतौर सहायक संपादक काम किया ।इसके बाद वह निर्माता-निर्देशक गुलजार के साथ जुड़ गये और बतौर सहायक निर्देशक काम करने लगे। एन चंद्रा ने बतौर निर्माता -निर्देशक अपने सिने कैरियर की शुरूआत वर्ष 1986 में प्रदर्शित फिल्म अंकुश से की। सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म की कहानी कुछ ऐसे बेरोजगार युवकों पर आधारित थी जो काम नहीं मिलने पर समाज से नाराज हैं और उल्टे सीधे रास्ते पर चलते है। ऐसे में उनके मुहल्ले में एक महिला अपनी पुत्री के साथ रहने के लिए आती है जो उन्हें सही रास्ते पर चलने के लिये प्रेरित करती है। फिल्म अंकुश बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुयी ।

वर्ष 1987 में एन.चंद्रा के सिने कैरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म ..प्रतिघात ..प्रदर्शित हुयी ।आपराधिक राजनीति की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म भ्रष्ट राजनीति को बेनकाब करती है। फिल्म की कहानी अभिनेत्री सुजाता मेहता के इर्द गिर्द घूमती है जो समाज में फैले भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नही करती है और गुंडे काली का अकेले मुकाबला करती है हालांकि इसमें उसे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है लेकिन अंत में वह विजयी होती है।

वर्ष 1988 में प्रदर्शित पिल्म ..तेजाब ..एन.चंद्रा के सिने कैरियर की सर्वाधिक सुपरहिट फिल्म में शुमार की जाती है ।फिल्म की कहानी में अनिल कपूर ने एक सीधे सादे नौजवान की भूमिका निभायी जो देश और समाज के प्रति समर्पित है लेकिन समाज के फैले भ्रष्टाचार की वजह से वह लोगों की नजर में तेजाब बन जाता है जो सारे समाज को जलाकर खाक कर देना चाहता है। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने न सिर्फ एन.चंद्रा को बल्की अभिनेता अनिल कपूर और अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को भी शोहरत की बुंलदियों पर पहुंचा दिया। आज भी इस फिल्म के सदाबहार गीत दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।

वर्ष 1991 में प्रदर्शित फिल्म ..नरसिम्हा ..एन चंद्रा के सिने कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है ।फिल्म की कहानी एक ऐसे युवक नरसिम्हा के इर्द गिर्द घूमती है जो अपनी जिंदगी से हताश है और प्रांत के सरगना बापजी के इशारे पर आपराधिक काम करता है लेकिन बाद में उसे अपनी भूल का अहसास होता है और वह बाप जी के विरूद्ध आवाज उठाता है और उसमें विजयी होता है। फिल्म में नरसिम्हा की भूमिका सन्नी देओल ने निभाई थी जबकि बापजी की भूमिका ओमपुरी ने ।

वर्ष 1992 से 2000 तक का वक्त एन .चन्द्रा के सिने कैरियर के लिये बुरा साबित हुआ। उनकी हमला, युगांधर, तेजस्वनी, बेकाबू, वजूद, शिकारी जैसी कई फिल्में बॉक्स आफिस पर असफल हो गयी लेकिन वर्ष 2002 में प्रदर्शित फिल्म स्टाईल.की कामयाबी के बाद एन.चन्द्रा एक बार फिर से अपनी खोई हुयी पहचान बनाने में सफल रहे ।वर्ष 2003 में एन .चन्द्रा ने अपनी फिल्म स्टाइल का सीक्वल.एक्सक्यूज मी ..बनाया जिसमें उन्होंने एक बार फिर से फिल्म में शरमन जोशी और साहिल खान की सुपरहिट जोड़ी को रिपीट किया।लेकिन कमजोर पटकथा के अभाव में इस बार फिल्म टिकट खिड़की पर असफल हो गयी ।

बहुमखी प्रतिभा के धनी एन.चंद्रा ने फिल्म निर्माण और निर्देशन की प्रतिभा के अलावा अपने लेखन संपादन से भी सिने दर्शकों को अपना दीवाना बनाया है। उन्होंने बेजुबान,वो सात दिन,धरम और कानून, मोहब्बत, मेरा धर्म, प्रतिघात, तेजाब जैसी फिल्मों का संपादन किया। इसके अलावा उन्होंने अंकुश,प्रतिघात तेजाब,.नरसिम्हा जैसी हिट फिल्मों में बतौर लेखक काम किया ।

प्रेमा नारायण






*अभिनेत्री प्रेमा नारायण के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं*

प्रेमा नारायण (जन्म 4 अप्रैल 1955) एक मॉडल और बॉलीवुड अभिनेत्री एवं डांसर है।  उन्होंने हिंदी और बंगाली सिनेमा में अभिनय किया है।  वह फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 1971 थीं।   और मिस वर्ल्ड 1971 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 

प्रेमा नारायण का जन्म 4 अप्रैल 1955 में  कलिम्पोंग, पश्चिम बंगाल में हुआ था।  वह अभिनेता अनीता गुहा की भतीजी हैं।

प्रेमा नारायण एक कॉन्वेंट स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका थीं।  बाद में उसने मॉडलिंग का विकल्प चुना।  1971 में, उन्होंने फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लिया और उन्हें फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 1971 का ताज पहनाया गया। उन्होंने मिस वर्ल्ड 1971 में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन जीत नहीं पाई।  उसी वर्ष उसे ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पैसिफिक पेजेंट की रानी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया था जहाँ उसे 1 रनर-अप का ताज पहनाया गया था।

फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता जीतने के बाद उनको फिल्मों में आने के प्रस्ताव मिलने लगे उन्होंने बॉलीवुड में काम करने का निर्णय लिया  मंज़िलें और भी हैं (1973) और माँ बहन और बीवी (1973) जैसी फ़िल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया बाद में वह खुद को मुख्य अभिनेत्री के रोल में संभाल नही पायी  उन्हें बाद में ज्यादातर डांसर/ वैम्प या सहायक भूमिकाओं के लिए चुना गया  उत्तम कुमार-शर्मिला टैगोर अभिनीत फिल्म अमानुष (1975) में एक कामुक गांव की बेले डांसर धन्नो के रूप में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर अवार्ड में 1976 में नामांकित किया इस रोल से उनको पहचान मिली अपने अभिनय कौशल के अलावा, उन्हें अपने पश्चिमी शैली के डांस नंबरों के लिए भी सराहा गया।  वह नियमित रूप से निम्न श्रेणी की हॉरर फिल्मों में दिखाई दीं, जिनमें होटल, मंगलसूत्र, सात साल बाद और घबराहट जैसी फिल्में शामिल हैं।

उनकी अंतिम फ़िल्म ये बस्ती बदमाशों की (1999) थी।

उसकी शादी एक वकील राजीव से हुई है।  इस जोड़े के दो वयस्क बेटे हैं।

प्रवीन बॉबी


*अभिनेत्री परवीन बॉबी के जन्मदिन पर हार्दिक श्रधांजलि*

परवीन बॉबी हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री हैं, जिन्हें 1970 के दशक के शीर्ष नायकों के साथ ग्लैमरस भूमिकाएं निभाने के लिए याद किया जाता है। उन्होने 1970 और 1980 की ब्लोकबस्टर फिल्मों मे भी काम किया है, जैसे दीवार, नमक हलाल, अमर अकबर एन्थोनी और शान। उन्हें भारत की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में एक माना जाता है।

परवीन बाबी का जन्म 4 अप्रैल 1954 को जूनागढ़, गुजरात में हुआ था।  वह एक महान जूनागढ़-आधारित परिवार में एक अकेली बच्ची थी, जो पश्तूनों की बाबी जनजाति से संबंधित थी, जिन्हें गुजरात के पठानों के रूप में जाना जाता था, जो लंबे समय तक गुजरात में बस गए थे।  अपने माता-पिता की शादी के चौदह साल बाद परवीन का जन्म हुआ, उनके पिता, वली मोहम्मद खान बाबी, जूनागढ़ के नवाब के साथ  सिस्टम प्रशासक थे और उनकी माँ जमाल बख्त बाबी (2001 की मृत्यु) थी।  उसने 1959 में अपने पिता को खो दिया जब वह पाँच साल की थी।  उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई माउंट कार्मेल हाई स्कूल, अहमदाबाद से की और बाद में उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, अहमदाबाद में पढ़ाई की, जहाँ उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में मास्टर डिग्री की उपाधि प्राप्त की। 

परवीन ने कभी शादी नहीं की। लेकिन उनका कई विवाहित पुरुषो से संबंध रहे। जैसे निर्देशक महेश भट्ट, अभिनेता कबीर बेदी और डैनी डेनजोगपा। उनके और अमिताभ बच्चन के बीच भी चक्कर चलने की अफवाहें थी। उन्होंने बाद मे अमिताभ पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने उन्हे मारने की कोशिश की है, हालाकि इसके कुछ साल बाद पता चला कि यह उनका वहम था। महेश भट्ट ने बाद में बॉबी और उनके बीच के रिश्ते पर आधारित एक आत्मकथात्मक फिल्म अर्थ (1982) बनाई, जिसके लेखक और निर्देशक वे स्वयं थे। उन्होंने उनके और परवीन बॉबी के बीच के रिश्ते के तथ्यो पर आधारित एक अन्य फिल्म, लम्हे (2006) बनाई, जिसके लेखक और निर्देशक भी वे ही थे।

परवीन का मॉडलिन्ग कैरियर 1972 मे शुरू हुआ और जल्द ही उन्हें क्रिकेटर सलीम दुरानी के साथ चरित्र (1973) नामक एक फिल्म करने का मौका भी मिला। हालांकि यह फिल्म एक फ़्लॉप थी, परवीन को इसके बाद कई फिल्मे करने के प्रस्ताव मिले। उनकी पहली बडी हिट अमिताभ बच्चन के सामने मजबूर (1974) था। जीनत अमान के साथ साथ, परवीन बॉबी भारतीय फिल्म नायिका की छवि को बदलने में मदद की। वह जुलाई 1976, उस समय के किसी मैगज़ीन के पहले पन्ने पर प्रदर्शित करने वाली पहली बॉलीवुड स्टार थीं। अपने कैरियर के दौरान, वह एक गंभीर अभिनेत्री की तुलना में एक ग्लैमरस हीरोइन के रूप में अधिक प्रसिद्ध थीं। वह एक फैशन आइकन के रूप में भी जानी जाती थी। मशहूर डिजाइनर मनीष मल्होत्रा कहते हैं,"परवीन बॉबी फैशन में आधुनिकता लाईं। वह एक बार भी चूकती, हमेशा खूबसूरत रहती थी।"

परवीन, हेमा मालिनी, रेखा, जीनत अमान, जया बच्चन, रीना रॉय और राखी के साथ साथ, उस युग के सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती थी। अमिताभ बच्चन के साथ आठ फिल्मों में अभिनय किया, जो हिट या सुपर हिट हुए। वह शशि कपूर के साथ सुहाग (1979), काला पत्थर (1979) और नमक हलाल (1982) में अभिनय किया था। धर्मेंद्र के साथ जानी दोस्त (1983) और फिरोज खान के साथ काला सोना (1975) मे भी अभिनय कर चुकी थी। अपने कैरियर के अंत में वह मार्क जुबेर के साथ "दूसरी औरत" की भूमिका निभाई, विनोद पांडे के साथ नजदीकीया (1982) जैसी लीग से हटकर फिल्मों में दिखाई गई थी।

अक्सर समकालीन जीनत अमान के साथ उनके सेक्स प्रतीकों के साथ तुलना की जाती थी। वह जीनत और शबाना आजमी द्वारा निभाई तीसरे भूमिका के साथ अशांति (1982), जो अमेरिकी टेलीविजन शो चार्ली एन्जिल्स से प्रेरित एक फिल्म भी कर चुकी हैं। दीवार (1975), शान (1980) और नमक हलाल (1982) जैसी फिल्मों में उनकी स्क्रीन उपस्थिति कम से कम हो गई, लेकिन बॉबी द्वारा भूमिकाओं और गानों में एक निश्चित आकर्षण लाई गई थी। बड़ी हिट फिल्म क्रांति (1981) में वह हेमा मालिनी (जो फिल्म की मुख्य नायिका थी), से अपनी सहायक की भूमिका में होते हुए भी हीरोइन से बढ़कर नाम कमा चुकी हैं।

परवीन बॉबी के दरवाजे पर तीन दिन के दूध व अखबार पड़े देख उनकी आवासीय सोसायटी के सचिव ने पुलिस को सूचित किया। जिसके बाद पुलिस द्वारा 22 जनवरी 2005 को मुंबई के अपने अपार्टमेंट में उनके मृत पाने की सूचना पूरे भारत को मिली थी।

परवीन ने जीवन के अंतिम काल में ईसाई धर्म अपना लिया था, यह बात उन्होंने एक साक्षात्कार में कही थी. उन्होंने यह इच्छा भी व्यक्त की थी कि उन्हें ईसाई धर्मानुसार दफनाया जाय. लेकिन उनकी मृत्य के बाद उनके मुस्लिम रिश्तेदारों ने उनके शव को अपने कब्जे में ले लिया और उनकी माता की कब्र के पास ही उन्हें मुस्लिम रीती-रिवाज से शांताक्रुज में दफनाया.

गुड्डी मारुति

*प्रसिद्ध हास्य अभिनेत्री गुड्डी मारुति के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं*

गुड्डी मारुती Guddi Maruti वो शख्सियत हैं, जिन्हें आज की पीढ़ी भले ही कम पहचानती हो, लेकिन 90 के दशक की फिल्मों में गुड्डी की कॉमेडी का सिक्का चलता था। मेल एक्टर्स में अगर जॉनी लीवर का कॉमेडी के क्षेत्र में दबदबा था, तो वहीं गुड्डी का नाम बॉलीवुड Bollywood की उन एक्ट्रेसेस में शुमार होता था, जो अपनी कॉमेडी से लोगों को हंस कर लोट-पोट होने के लिए मजबूर कर देती थीं। अपने लाजवाब 

एक्टिंग टैलेंट और कॉमिक टाइमिंग से गुड्डी ने ऑडिएंस के दिलों में खास मुकाम बनाया। आज गुड्डी मारूती अपना 62वां जन्मदिन सैलीब्रेट कर रही हैं। 

4 अप्रैल 1959 को मुंबई में गुड्डी का जन्म हुआ। गुड्डी मारुती के पिता मारुतीराव परब (Maruti Rao Parab) भी एक फेमस कॉमेडी एक्टर और डायरेक्टर थे।

आपको बता दें कि गुड्डी मारुती का असली नाम गुड्डी नहीं बल्कि ताहिरा परब(Tahira Parab) है, जबकि गुड्डी उनका घर में प्यार से पुकारा जाने वाला नाम है। मशहूर फिल्ममेकर मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) ने ही ताहिरा का उनका ऑनस्क्रीन नाम गुड्डी दिया।

गुड्डी मारुती के फिल्मी करियर की शुरुआत महज़ दस साल की उम्र में हो गई थी। ‘जान हाज़िर हैं’ फिल्म में गुड्डी पहली बार बतौर बाल कलाकार नज़र आईं। जिसके बाद गुड्डी ने 100 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया। 

गौर करने वाली बात तो ये है कि गुड्डी का मोटापा भी कभी उनकी पॉपुलैरिटी के आड़े नहीं आया। बल्कि उनकी लम्बीं और मोटी कद काठी ने उन्हें फिल्मों में ‘टुनटुन’ की पहचान भी दिलवाई।

दूल्हे राजा, बीवी नंबर वन, बरसात की एक रात, खिलाड़ी, शोला और शबनम और आशिक अवारा जैसी फिल्मों में गुड्डी मारुती ने लोगों को खूब हंसाया।

फिल्मों के अलावा गुड्डी ने छोटे पर्दे का भी रुख किया। और वहां भी अपनी अलग पहचान बनाई। 1985 में गुड्डी मारुती पहली बार सीरियल ‘इधर उधर’ में नज़र आई थीं। दूरदर्शन पर प्रसारित हुई इस सीरियल में गुड्डी मारुती ने मोटी शबनम का रोल प्ले किया था। जिसके बाद गुड्डी मारुती ने 2011 में मिसेज़ कौशिक की पांच बहुंए, और 2013 में डोली अरमानों की जैसे सीरियल्स में भी काम किया। जिसके बाद गुड्डी ने एक्टिंग से एक लम्बा ब्रेक ले लिया। और फिर कमबैक किया 2018 में। 

सोनी टीवी पर ऑनएयर हुए सीरियल ‘ये उन दिनों की बात है’ में गुड्डी मारुती कॉलेज़ प्रीसिंपल के रोल में नज़र आई थीं। सीरियल में उनके किरदार को काफी पसंद भी किया गया था।

शशि कला

अभिनेत्री शशिकला के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

शशिकला का नाम भारतीय हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध खलनायिकाओं में से एक के रूप में लिया जाता है। हिंदी सिनेमा की ग्लैमरस खलनायिकाओं का ज़िक़्र होते ही ज़हन में उभरने वाला पहला नाम शशिकला का था। सन 1960 के दशक के हिंदी सिनेमा में अपनी एक ख़ास जगह बनाने वाली ख़ूबसूरत, चुलबुली और खलनायिका शशिकला को उस दौर के दर्शक आज भी भूले नहीं हैं। शशिकला न सिर्फ़ एक उम्दा अभिनेत्री थीं, बल्कि मौक़ा मिलने पर उन्होंने ख़ुद को एक बेहतरीन डांसर के तौर पर भी साबित किया था। बॉलीवुड में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली शशिकला का पूरा नाम 'शशिकला जावलकर' था। फिल्मों के साथ-साथ शशिकला ने टीवी में भी काम किया। वह मशहूर सीरियल 'सोन परी' में फ्रूटी की दादी के रोल में नजर आई थीं। साल 2007 में उन्हें भारत सरकार ने 'पद्मश्री' से नवाजा था।

परिचय

अभिनेत्री शशिकला का *जन्म 4 अगस्त, 1933* को शोलापुर, महाराष्ट्र के एक परंपरावादी मराठी ‘जवळकर’ परिवार में हुआ था। उनके पिता कपड़े के कारोबारी थे और तीन भाई और तीन बहनों में वह माता-पिता की 5वीं संतान थीं। शशिकला के अनुसार, "वक़्त बदला, पिता जी ने मेरे चाचा के बेटे को पढ़ने के लिए इंग्लैंड भेजा, जिसकी वजह से ख़र्चे बेतहाशा बढ़ गए। उधर कारोबार में ज़बर्दस्त घाटा हो गया और हम सड़क पर आ गए। मैं सार्वजनिक गणेशोत्सव के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थी और एक अच्छी अभिनेत्री मानी जाती थी। इसलिए लोगों की सलाह पर हमारा परिवार मुंबई चला आया ताकि मैं फ़िल्मों में काम करके पैसा कमा सकूं।" ये आज़ादी से कुछ साल पहले की बात है। शशिकला की उम्र उस वक़्त क़रीब 11 साल थी।

कैरियर

फ़िल्म 'ज़ीनत' साल 1945 में प्रदर्शित हुई थी। सैयद शौक़त हुसैन रिज़वी की अगली फ़िल्म 'जुगनू' (1947) में शशिकला हीरो दिलीप कुमार की बहन की भूमिका में नज़र आयीं। शशिकला के मुताबिक़़ फ़िल्म 'जुगनू' में उनके काम से सैयद शौक़त हुसैन रिज़वी इतने ख़ुश हुए कि उन्होंने अपनी अगली फ़िल्म में शशिकला को हिरोईन बनाने का फ़ैसला कर लिया। लेकिन तभी मुल्क़ का बंटवारा हुआ और शौक़त और नूरजहां पाकिस्तान चले गए। नतीजतन शशिकला के लिए संघर्ष का दौर फिर से लौट आया। 'ऑल इंडिया पिक्चर्स' की 'डोली' (1947) और 'पगड़ी' (1948) और अमेय चक्रवर्ती की 'गर्ल्स स्कूल' (1949) जैसी की कुछ फ़िल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं करने के बाद शशिकला 'रणजीत मूवीटोन' की फ़िल्म 'नज़ारे' (1949) में पहली बार हिरोईन बनीं। इस फ़िल्म में उनके हीरो आगा थे।

मानसिक_दबाव_और_निराशाएं

दो बेटियों की मां शशिकला के अनुसार, "पति से काफ़ी पहले उनका अलगाव हो चुका था। आम लोगों के बर्ताव में 'बुरी औरत' की अपनी इमेज की वजह से झलकता असर भी उन्हें बेहद खलने लगा था। उधर इंडस्ट्री के बदले हुए माहौल में ख़ुद को ढाल पाना उनके लिए मुश्किल हो चला था। मानसिक दबाव और निराशाएं इतनी बढ़ गयी थीं कि वो विपश्यना के लिए इगतपुरी आश्रम जाने लगीं। उनका झुकाव आध्यात्म की ओर होने लगा।" शशिकला का कहना है, "साल 1988 में बनी फ़िल्म 'घर घर की कहानी' के दौरान घटी कुछ घटनाओं ने मुझे ऐसी चोट पहुंचाई कि मैंने फ़िल्मों से अलग हो जाना ही बेहतर समझा। मैंने मुंबई छोड़ दिया और शांति की तलाश में जगह जगह भटकने लगी। चारधाम यात्रा की, ऋषिकेश के आश्रमों में गयी। लेकिन सिर्फ़ द्वारकापुरी और गणेशपुरी के रमन महर्षि के आश्रम में जाकर मुझे थोड़ी-बहुत शांति मिली वरना बाक़ी सभी जगहों पर धर्म को एक धंधे के रूप में ही पाया।"

शशिकला की छोटी बेटी शैलजा उन दिनों कोलकाता में रहती थीं। एक रोज़ बेटी के एक पारिवारिक मित्र के ज़रिए शशिकला मदर टेरेसा के आश्रम तक जा पहुंचीं। शशिकला का कहना था, "एक तो अभिनेत्री, ऊपर से 'बुरी औरत' की इमेज। पहले तो सभी ने मुझे शक़ की नजर से देखा। कई-कई इंटरव्यू हुए। शिशु भवन और फिर पुणे के आश्रम में मानसिक रोगियों, बीमार बुज़ुर्गों, स्पास्टिक बच्चों और कुष्ठ रोगियों की सेवा में रखकर कुछ दिन मेरा इम्तहान लिया गया। मरीज़ों की गंदगी साफ़ करना, उन्हें नहलाना, उनकी मरहम-पट्टी करना, इस काम में मुझे इतनी शांति मिली कि मैं भूल ही गयी कि मैं कौन हूं। मैं इम्तहान में पास हो गई। और फिर तीन महिने बाद कोलकाता में मदर से जब पहली बार मुलाक़ात हुई तो उनसे लिपटकर देर तक रोती रही। मदर के स्पर्श ने मुझे एक नयी ऊर्जा दी। अब फिर से वो ही दिनचर्या शुरू हुई। शिशु भवन, मुंबई और गोवा के आश्रम, सूरत और आसनसोल के कुष्ठाश्रम, निर्मल हृदय-कालीघाट में मरणासन्न रोगियों की सेवा, लाशें तक उठाईं। उस दौरान मदर के कई चमत्कार देखे। मैं वहां पूरी तरह से रम चुकी थी

साल 1993 में शशिकला घर वापस लौटीं तो पता चला उनकी बड़ी बेटी को कैंसर है। बेटी के बच्चे छोटे थे। दो साल बाद बेटी गुज़र गयी। शशिकला के अनुसार- "मदर ने हालात से लड़ने की ताक़त दी। सीरियल 'जुनून' और 'आह' के ज़रिए मैंने फिर से अभिनय की शुरुआत की। 'सोनपरी' और 'किसे अपना कहें' जैसे सीरियलों के अलावा फ़िल्मों में भी मैं काफ़ी व्यस्त हो गयी।" शशिकला के मुताबिक़़ पति के साथ भी उनके सम्बंध एक बार फिर से काफ़ी हद तक सामान्य हो चले थे, जो नैनीताल में बस चुके थे।

मृत्यु

88 साल की आयु में शशिकला का *निधन 4 अप्रॅल, 2021* को मुंबई, महाराष्ट्र के कोलाबा में दोपहर 12 बजे हुआ।

पल्लवी जोशी

प्रसिद्ध अभिनेत्री पल्लवी जोशी के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

पल्लवी जोशी (जन्म 4 अप्रैल 1969) एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेत्री हैं।  वह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में स्पेशल जूरी अवार्ड की प्राप्तकर्ता हैं।

पल्लवी ने कम उम्र में ही स्टेज पर परफॉर्म करना शुरू कर दिया था।  उन्होंने बाल कलाकार के रूप में बिल्ला और आदमी सड़क का जैसी फिल्मों में अभिनय किया।  उन्होंने फ़िल्म दादा (1979) में  एक अंधे बच्चे की भूमिका निभाई जो एक कुख्यात गैंगस्टर में सुधार करता है।

1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में उन्होंने रुक्मावती की हवेली, सूरज का सातवां घोड़ा, त्रिशाग्नि(1988), वंचित, भुजंगयना दशावतारा (1991)और रिहाई  जैसी कलात्मक फिल्मों में अभिनय किया।  उन्होंने सौदागर, पनाह, तहलका और मुजरिम सहित कई कामर्शियल फिल्मों में बहन या नायिका की सहेली के रूप में सहायक भूमिकाएँ निभाईं।  उन्हें अंधा युध (1988) में एक विकलांग लड़की के रूप में उनकी भूमिका के लिए फिल्मफेयर अवार्ड्स में 'सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री' के लिए नामांकित किया गया था।  उन्होंने वोह छोकरी (1992) के लिए 41 वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में विशेष जूरी पुरस्कार भी जीता।  वह 7 वें ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल, नोएडा में एक्सीलेंस इन सिनेमा अवार्ड के प्राप्तकर्ता भी हैं।
बाद में उन्होंने ज़ी मराठी पर एक टेलीविज़न गायन प्रतियोगिता सा रे गा मा पा मराठी लील चैंप्स की मेजबानी की।  वह श्याम बेनेगल की द मेकिंग ऑफ द महात्मा (1995) में कस्तूरबा गांधी के रूप में दिखाई दीं।

उनके टीवी शो में मिस्टर योगी, भारत एक खोज, जुस्तुजू अल्पविराम, मृगनयनी, तलाश और इम्तिहान है और उनका सबसे प्रसिद्ध दूरदर्शन धारावाहिक आरोहण है, जो नौसेना पर आधारित  धारावाहिक था  जुस्तजू 2002 में ज़ी टीवी पर एक साप्ताहिक धारावाहिक था, जिसमें हर्ष छाया और अर्पिता पांडे ने अभिनय किया था। माधवन के साथ उन्होंने ये कहाँ आ गये हम, नामक एक थ्रिलर फ़िल्म में अभिनय किया, जिसे अचानक रोक दिया गया 

उन्होंने रेणुका शहाणे द्वारा निर्देशित एक मराठी फिल्म रीता में भी मुख्य भूमिका निभाई है।  वह मराठी धारावाहिकों की निर्माता भी हैं और ज़ी मराठी पर असम्भव और अनुबंध सहित धारावाहिकों का निर्माण किया है

उन्होंने समीक्षकों द्वारा प्रशंसित मलयालम फिल्म इलियम मुल्लुम में केंद्रीय किरदार शांता का किरदार निभाया है, जिसे 1994 में के पी सासी द्वारा निर्देशित किया गया था और कन्नड़ फिल्म भुजंगयना दशावतारा (1991) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसे लोकेश द्वारा निर्देशित किया गया था

वह ज़ी अंताक्षरी और ज़ी सा रे गा मा पा लील चैंप्स के लिए एक एंकर के रूप में दिखाई दीं।  उन्होंने 1999 और 2001 के दौरान ज़ी टीवी पर प्रसारित रिश्ते के कुछ एपिसोड भी किए।

पल्लवी जोशी को फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सोसाइटी के सदस्य के रूप में नामित किया गया था, लेकिन उन्होंने संस्थान के गवर्निंग काउंसिल के प्रमुख के रूप में अभिनेता और भाजपा सदस्य गजेन्द्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ छात्रों के विरोध को देखते हुए यह पद लेने से इनकार कर दिया। 

उन्होंने भारतीय फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री से शादी की है और उनके दो बच्चे हैं।  वह बाल अभिनेता मास्टर अलंकार (जोशी) की बहन हैं।

सोफा बेड

हवा भर कर बनाए जाने वाले सोफे और गद्दे (Inflatable Sofas & Air Mattresses) छोटे घरों, मेहमानों के आने पर अतिरिक्त जगह बनाने,...