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मंगलवार, 11 अप्रैल 2023

मोहम्मद अली ताज

प्रसिद्धि उर्दू शायर एवं फिल्मी गीतकार ताज भोपाली की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

ताज भोपाली एक सुप्रसिद्ध शायर थे।
ताज भोपाली का असली नाम मोहम्मद अली ताज था ।
उनका जन्म भोपाल में 1926 में हुआ।
कभी अपनी मोहब्बत से, कभी अपनी शायरी से और कभी-कभी अपनी बातों से ताज भोपाली जी लोगों को जलाया करते थे।शक्लो-सूरत की परवाह उन्होने कभी नहीं की फिर भी उनका धुर काला रंग यूं दमकता रहता था। उनको अपनी इस फक़ीराना तबियत से इस क़दर आशनाई थी कि जब 60 के दशक में उन्हें अशोक कुमार के सेक्रेटरी जनाब एस.एम.सागर ज़िद कर फ़िल्मों में गीत लिखने को बम्बई ले गए तो थोड़ा-बहुत वक़्त ही वहाँ रह पाए। भोपाल की गलियों सदा उनके कानो में ऐसी गूंजती रही कि काम-धाम छोड़-छाड़ वापस लौट आए।
;ताज भोपाली द्वारा लिखी 1969 की फ़िल्म ‘आंसू बन गए फूल’ में यह गीत -. ‘इलेक्शन में मालिक के लड़के खड़े हैं / इन्हें कम न समझो ये खुद भी बड़े हैं’ किशोर कुमार की आवाज़ में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत के साथ चुनाव और नेताओं पर खूबसूरत व्यंग किया गया था। इसी गीत की लाईने है कि – ‘इस शहर में जितने हैं, अखबार इनके हैं / काले-सफेद सैकड़ों व्यापार इनके हैं / ...सब अस्पताल इनके हैं, बीमार इनके हैं / परनाम लाख बार करो / इनको वोट दो / वादों पे ऐतबार करो इनको वोट दो’।
इसी फ़िल्म का दूसरा गीत आशा भोंसले ने क्या खूब गाया है –‘ महरबां, महबूब, दिलबर, जानेमन / आज हो जाए कोई दीवानापन’

यह ताज साहब का एक रूप है। दूसरे रूप में उन्हें देखिए तो पहचानना मुश्किल हो जाए।

नुमाइश के लिए जो मर रहे हैं
वो घर के आइनों से डर रहे हैं
बला से जुगनूओं का नाम दे दो
कम-से-कम रोशनी तो कर रहे हैं

तुम्हे कुछ भी नहीं मालूम लोगो
फरिश्तों की तरह मासूम लोगो
ज़मीं पर पांव आंखें आस्मां पर
रहोगे उम्र भर मग़मूम लोगो
रहोगे कब तलक मज़लूम लोगो

निर्वाण घर में बैठ के होता नहीं कभी
बुद्ध की तरह कोई मुझे घर से निकाल दे
पीछे बन्धे हैं हाथ मगर शर्त है सफर
किससे कहें कि पांव के कांटे निकाल दे

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प्रीति गांगुली

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