ब्लॉग आर्काइव

गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

मुहम्द अजीज

प्रसिद्ध पार्श्वगायक मोहम्मद अज़ीज़ की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

सैयद मोहम्मद अज़ीज़-अन-नबी भारत के प्रसिद्ध पार्श्वगायकों में से एक थे, जिन्होंने मुख्यतः बंगाली, ओड़िया और हिन्दी फ़िल्मों में गाने गाये। उन्होंने कोलकाता के गालिब रेस्टोरेंट में एक गायक के तौर पर अपना कॅरियर शुरू किया था। साल 1984 में वे मुंबई आए थे। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘अम्बर’ थी, जो 1984 में रिलीज हुई। मोहम्मद अज़ीज़ ने पहली बार अमिताभ बच्चन की फिल्‍म ‘मर्द’ के लिए ‘मर्द टांगे वाला…’ गीत गाया था। उन्हें 80 और 90 के समय में मोहम्मद रफ़ी का उत्तराधिकारी कहा जाता था। मोहम्मद अज़ीज़ ने अलग-अलग भाषाओं में 20 हजार से अधिक गाने गाए। 'खुदगर्ज' फिल्‍म का मशहूर गाना आपके आ जाने से... अज़ीज़ सहाब ने ही गया था, जिसे अभिनेता गोविंदा और अभिनेत्री नीलम पर फिल्‍माया गया था। मोहम्मद अज़ीज़ ने लता मंगेशकर, आशा भोंसले, कविता कृष्णमूर्ति जैसी मशहूर गायिकाओं के साथ युगल गीतों में भी अपनी आवाज़ दी।

मोहम्मद अज़ीज़ का जन्म 2 जुलाई, सन 1954 को पश्चिम बंगाल में हुआ था। उनका वास्तविक नाम 'सैयद मोहम्मद अज़ीज़-अन-नवी' था। हिंदी फिल्मों में उन्हें बड़ा ब्रेक तब मिला, जब संगीतकार अनु मलिक ने अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म ‘मर्द’ में ‘मर्द तांगे वाला...’ गाना उनको दिया। ये गीत बहुत हिट हुआ। उसके बाद उन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। मोहम्मद अज़ीज़ ने हर सफल कंपोजर के लिए गाया। प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने भी उनको अपनी कई फिल्मों में मौका दिया। जब लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी का उतार आया तो मोहम्मद अज़ीज़ का कॅरियर भी उतर गया और तब संगीत निर्देशल लोग उदित नारायण और कुमार सानू जैसे नए गायकों को ज्यादा लेने लगे थे

मोहम्मद अज़ीज़, अपने समय बेहद प्रसिद्ध गायक मोहम्मद रफ़ी के गानों के बहुत बड़े फैन थे। वे उनको अपना गुरु मानते थे। हालांकि मोहम्मद अज़ीज़ ने रफ़ी से कोई प्रशिक्षण नहीं लिया था, लेकिन सुन-सुन कर सीखा और कॅरियर में एक समय ऐसा भी आया था, जब लोग उनको मोहम्मद रफ़ी का उत्तराधिकारी कहने लगे थे। एक बार मोहम्मद अज़ीज़ ने कहा भी था कि- मुझे लगता है कि अगर कोई मोहम्मद रफ़ी का 5 परसेंट भी गाने के लायक हो जाता है तो उसे देश का बेस्ट सिंगर माना जा सकता है।

मोहम्मद रफ़ी साहब उनकी कितनी बड़ी प्रेरणा थे, इसे लेकर मोहम्मद अज़ीज़ ने कहा था- उन्होंने मुझे इस हद तक प्रेरित किया था कि मैं अपनी पूरी आत्मा लगाकर उन्हें आत्मसात कर सकता हूं। हालांकि मैंने अपनी फॉर्मल ट्रेनिंग एक टीचर से ली है, लेकिन मैं रफ़ी साहब को अपना गुरु मानता हूं। मैंने आज कई भाषाओं में और दुनिया भर में परफॉर्म किया है और मैं अपनी इस सक्सेस का श्रेय उनको देता हूं। मोहम्मद अज़ीज़ ने कहा कि- फिल्म इंडस्ट्री में ये अफवाह हुआ करती थी कि मैं रफ़ी साहब का शिष्य था और उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहा हूं।

एक बार रफ़ी साहब ने मोहम्मद अज़ीज़ के गाने सुने तो कह उठे- "अरे ये तो मेरे जैसा गाता है।"

माना जाता है कि अलग-अलग भाषाओं में मोहम्मद अज़ीज़ ने करीब 20,000 से ज्यादा गाने गाए थे। इनमें से ‘आप के आ जा ने से...’, ‘इमली का बूटा बेरी का पेड़...’, ‘काग़ज कलम दवात ला...’, ‘दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए...’, ‘मेरे दो अनमोल रतन...’, ‘माई नेम इज़ लखन...’, ‘तुझे रब ने बनाया होगा...’ जैसे कई गाने अविस्मरणीय हैं।

हिंदी फिल्मों को कई बेहतरीन और सुपरहिट गाने देने वाले गायक मोहम्मद अज़ीज़ का निधन 27 नवंबर, 2018 को दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उस समय वे 64 वर्ष के थे

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

प्रीति गांगुली

●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●   ꧁ *जन्म की तारीख और समय: 17 मई 1953, मुम्बई* *मृत्यु की जगह और तारीख: 2 दिसंबर 2012, मुम्बई* *भाई: भारती जाफ़री, ...