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मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

*पुराने जमाने के गायक अभिनेता कांतिलाल की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि*

*पुराने जमाने के गायक अभिनेता कांतिलाल की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि*

पुराने जमाने के गायक अभिनेता कांतिलाल का जन्म 18 अप्रैल 1907 में सूरत गुजरात मे हुआ था उनका असली नाम कांतिलाल छगनलाल पच्चीगर था उनके परिवार में सुनार का काम होता था कांतिलाल का झुकाव बचपन से ही संगीत की तरफ था जब वह स्कूल में पढ़ते थे तभी उन्होंने ओंकारनाथ से संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी वह स्कूल में थिएटर में भाग लेते थे कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने बाद वह बम्बई गायक बनने के लिए आये
उनको पहला ब्रेक  1934 में फ़िल्म बुलबुल-ए-परिस्तान में अभिनेता के रूप में मिला इस फ़िल्म का निर्देशन धीरूभाई देसाई ने विष्णु सिनेटोन बैनर तले किया था इस फ़िल्म में कांतिलाल ने अभिनय के साथ साथ दो गाने भी गाये थे दुनिया एक मुसाफिरखाना है ऐ ख़ुदावंदे तल्लाह इन गानो के लिए संगीत दिया था किकुभाई याग्निक ने

1935 में रिलीज फ़िल्म प्रीत की रीत में उन्होंने अभिनय के साथ साथ 6 गाने भी गाये  
फ़िल्म प्रीत की रीत (1935) फ़िल्म पंजाब का सिंह (1936) फ़िल्म गुलबदन (1937)में उन्होंने संगीत भी दिया था

1937 में उन्होंने रंजीत मूवीटोन जॉइन कर लिया वहाँ उन्होंने 1941 तक काम किया इन चार वर्षों में उन्होंने रंजीत मूवीटोन के 16 फिल्मों में अभिनय किया एवं गाना गाया
जैसे फ़िल्म तूफानी टोली (1937) फ़िल्म बन की चिड़िया (1938) फ़िल्म बिल्ली (1938) फ़िल्म गोरख आया (1938) फ़िल्म नदी किनारे (1939) फ़िल्म आज का हिंदुस्तान (1940) फ़िल्म दीवाली (1940) फ़िल्म होली (1940) फ़िल्म मुसाफिर (1940) फ़िल्म परदेसी (1941) फ़िल्म ससुराल (1941) फ़िल्म उम्मीद (1941) इन सभी फिल्मों में उन्होंने जयंत देसाई ,ए आर कारदार ,चतुर्भुज देसाई जैसे लोगो के साथ काम किया इन 16 फिल्मों में से 6 फ़िल्म में खेमचंद प्रकाश ने बाकी 10 फिल्मों में ज्ञान दत्त ने संगीत दिया था कांतिलाल ने इन दोनों संगीतकारों के लिए 40 गाने गाये
उन्होंने सुप्रीम पिक्चर्स के लिए  गाज़ी सलाहुद्दीन (1939) हॉलिडे इन बॉम्बे (1941) और कंचन (1941) जैसी फिल्मों में काम किया बॉम्बे टाकीज़ के लिए 1939 में कंगन फ़िल्म में काम किया 
फ़िल्म गाज़ी सलाहुद्दीन में वह मुझको जाम दूर से दिखला के पी गया गाना काफी हिट हुआ
फ़िल्म गाज़ी सलाहुद्दीन संगीतकार खेमचन्द प्रकाश की डेब्यू फिल्म थी
फ़िल्म कंगन में उन्होंने मरण रे तू ही मेरो श्याम समान गाना गाया यह गाना रविन्द्र नाथ टैगोर के बंगला गाने पर आधारित था इस गीत में संगीत रामचन्द्र पाल ने दिया था

कांतिलाल ने 5 संगीतकारो के लिए 24 फिल्मों में लगभग 60 गाने गाये
कांतिलाल के सी डे से बहुत ज़्यादा प्रभावित थे यह उनके गीतों में भी झलकता है जैसे
मूरख क्या करता मनमानी फ़िल्म तूफानी टोली मन भाये री मोरे मन भाए फ़िल्म बन की चिड़िया
आराम कहाँ जो दिल लड़ा गैरों के पाले फ़िल्म नदी किनारे

1943 में उन्होंने उषा बेन से विवाह किया
इसके बाद उन्होंने खुद को थिएटर तक सीमित कर लिया उन्होने कुछ गुजराती फिल्मों में भी काम किया

17 जून 1971 में उनका निधन हो गया

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प्रीति गांगुली

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