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शनिवार, 29 अप्रैल 2023

दीपिका चिलखिया

टी वी सीरियल रामायण की सीता फ़िल्म अभिनेत्री दीपिका चिखलिया के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
जन्म की तारीख और समय: 29 अप्रैल 1965 (आयु 58 वर्ष), मुंबई
पति:  हेमंत टोपीवाला
बच्चे:  निधि टोपीवाला ,जूही टोपीवाला
दल: BJP 
पिछला कार्यकाल:लोकसभा की सदस्य (1991–1996)
लंबाई: 1.47 मी
दीपिका चिखालिया  भारतीय अभिनेत्री हैं, जिन्होंने रामानन्द सागर के टीवी सीरियल 'रामायण' में सीता की भूमिका निभाकर प्रसिद्धि पाई और दर्शकों के दिलों में अपनी एक ख़ास जगह बना ली। उनके साथ सीरियल रामायण में राम की भूमिका अरुण गोविल ने तो लक्ष्मण की भूमिका सुनील लहरी ने निभाई थी। दीपिका चिखालिया ने विभिन्न पौराणिक कथा आधारित धारावाहिकों में अभिनय किया है। उन्होंने अभिनेता राज किरन के साथ फ़िल्म 'सुन मेरी लैला' (1986) में अभिनय करके फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण किया था। गुजरात के बिजनेसमैन हेमन्त टोपीवाला से विवाह के बाद उनका नाम अब दीपिका टोपीवाला है। 
दीपिका चिखालिया रामानन्द सागर के कैंप में 'विक्रम बेताल' का हिस्सा रह चुकी थीं और इस शो की शूटिंग सागर जी के बंगले पर ही हुआ करती थी। दीपिका चिखालिया के अनुसार- "एक रोज जब मैं बंगले पर पहुंची तो देखा कि बहुत सारे बच्चे वहां आए हुए हैं। मेरी समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है। मैंने पूछा कि क्या घर की कोई भाभीजी ने नर्सरी शुरू की है? पता चला कि रामायण की शूटिंग करने जा रहे हैं और लव-कुश की कास्टिंग चल रही है।
मैंने पूछा कि क्या राम-सीता की कास्टिंग हो गई? तो उन्होंने कहा कि नहीं राम-सीता हमें करना है, पहले हम लव-कुश की कास्टिंग कर रहे हैं। फिर एक दिन मुझे पापा जी का फोन आया कि कुड़ी तू भी आजा चल सीता के लिए टेस्टिंग कर लेते हैं। मैंने कहा कि मैं 'विक्रम बेताल' और 'दादा दादी की कहानियां' में काम कर रही हूं और अभी भी आप टेस्ट करना चाहते हैं? मैं तो राजकुमारी का ही किरदार करती रहती हूं। मैं पूरे वक्त मुकुट वैगरह पहन कर सेट पर घूमती रहती थी।"

उन्हें कहा गया था कि सीता ऐसी होनी चाहिए कि जब वह परदे पर आए तो बताना नहीं पड़े। दर्शक बताए कि ये सीता है। दीपिका ने कहा कि उनके 4-5 स्क्रीन टेस्ट हुए और आखिरकार वह थक गईं और उन्होंने कहा कि लेना है तो लो वरना कोई बात नहीं; तो आखिरी स्क्रीन टेस्ट में उन्होंने कहा कि ठीक है। ये हमारी सीता होगी।

25 जनवरी, 1987 को सीरियल 'रामायण' का पहला एपिसोड प्रदर्शित हुआ था। यह उस समय का सबसे महंगा शो हुआ करता था। धारावाहिक की लोकप्रियता और बने इतिहास पर दीपिका चिखालिया का कहना था कि- "धारावाहिक की लोकप्रियता का अहसास तब हुआ, जब पांच-छह महीने में देश विदेश से फोन आने लगे, इंटरव्यूज होने लगे। उसके बाद हमें एहसास हुआ कि हमने इतिहास रचा है। मुझे याद है कि एक प्रशंसक मेरे लिए रोज बेलपत्र लेकर आता था, क्योंकि मैं महादेव की पूजा करती थी। वह करीब चार-पांच साल तक दरवाजे के पास रखकर चले जाते थे। एक ने मेरी पेंटिंग बनाई थी। लोग हमें देख श्रद्धा से भर जाते थे।"
दीपिका चिखालिया का कहना था कि- "मुझे कृत्रिम जवाहरात (आर्टिफीशियल ज्वेलरी) से एलर्जी थी। बड़ी ज्वैलरी पहनने पर त्वचा में घाव उभर आते थे। ज्वैलरी निर्माता उसमें पीछे स्पंज लगाकर देते थे, ताकि वह मेरे शरीर से स्पर्श न हो। रामायण धारावाहिक में वनवास का शूट सबसे मुश्किल था। वनवास का दृश्य शुरू होता है नदी को पार करने से। उसके लिए तपती धूप में रेत पर हमें बिना चप्पल 45 डिग्री तापमान में खड़े रहना पड़ता था। कहीं कोई छाया नहीं थी। पूरे पैर जल गए थे। उस जमाने में अभिनय करने वालों को सपोर्ट करने के लिए कुछ था ही नहीं। सही मायनों में हमने परिश्रम किया है।"

दीपिका चिखालिया ने राज किरन के साथ फ़िल्म 'सुन मेरी लैला' (1986) में अभिनय करके फ़िल्मी दुनिया में पदार्पण किया। उन्होंने 'रुपये दस करोड़' (1991), 'घर का चिराग' (1989) और 'खुदाई' (1994) में संजय के साथ अभिनय किया। उन्होंने एक मलयाली फ़िल्म 'इतिले इनियम् वरु' (1986) में मामूट्टी के साथ अभिनय किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कन्नड़, तमिल और बंगाली फ़िल्मों में भी काम

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प्रीति गांगुली

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