ब्लॉग आर्काइव

रविवार, 23 अप्रैल 2023

दीनानाथ मंगेशकर

*दीनानाथ मंगेशकर' (29 दिसंबर 1900 -24 अप्रैल 1942) एक प्रसिद्ध मराठी थिएटर अभिनेता, प्रसिद्ध नाट्य संगीत संगीतकार और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीतज्ञ एवं गायक थे। वे जाने-माने गायकों लता मंगेशकर, आशा भोसले ,मीणा खड़ीकर ,उषा मंगेशकर और संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर के पिता भी थे।*
दीनानाथ मंगेशकर पांच साल की उम्र में श्री बाबा माशेलकर से गायन और संगीत की शिक्षा लेने लगे थे तथा ग्वालियर संगीत विद्यालय के छात्र भी रहे। वे ज्ञानाचार्य पंडित रामकृष्ण बुआ वझे की विविधता पूर्ण और आक्रामक गायन शैली से मोहित हुए और उनके शागिर्द बन गए। अपनी जवानी में उन्होंने बीकानेर की यात्रा की और किराना घराना के पंडित सुखदेव प्रसाद,पंडित मणि प्रसादके पिता ,से शास्त्रीय संगीत में औपचारिक प्रशिक्षण लिया। व वे 11 साल की उम्र में किर्लोस्कर संगीत मंडली और किर्लोस्कर नाटक मंडली में शामिल हो गए थे कालांतर में उन्होंने किर्लोस्कर मंडली छोड़ दी और अपने दोस्तों ,चिंतामन राव कोल्हटकर और कृष्णराव कोल्हापुरे के साथ बलवंत मंडली का गठन किया। इस नए समूह था गडकरी का आशीर्वाद प्राप्त था , लेकिन समूह के गठन के कुछ ही समय बाद गडकरी की मृत्यु (जनवरी 1919) हो गई।

दीनानाथ अपने सौंदर्य और मधुर आवाज से मराठी रंगमंच में लोकप्रियता के शिखर तक पहुचे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी की तब के विशाल मराठी मंच, बाल गंधर्व ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि वह अपने संगठन में प्रवेश के समय दीनानाथ का स्वागत "उनके पैरों के नीचे रुपया व सिक्कों के एक कालीन से" करेंगे 1935 की अवधि के दौरान उन्होंने 3 फिल्मों का निर्माण किया , उनमें से एक कृष्णार्जुन युद्ध भी थी। यह दोनों ,हिन्दी और मराठी,भाषा में बनाई गई थी और इसका एक गीत दीनानाथ द्वारा गाया और उन्ही पर फिल्माया गया था। दीनानाथ ने पंडित रामकृष्ण वझे के सानिध्य में भारतीय शास्त्रीय संगीत का अध्ययन किया। उन्होंने ज्योतिष का भी अध्ययन किया।

अपने ज्योतिष और अंक ज्योतिष ज्ञानानुसार उनका मानना था कि ५ अक्षर का नाम एवं तीसरे अक्षर पर अनुस्वार वाला नाटक उन के लिए भाग्यशाली था। उदाहरण: Ranadundubhi (रणदुंदुभी), Rajsanyas (राजसंन्यास), Deshkantak (देशकंटक)।

वे पहले संगीतकार थे जिन्होंने शिमला में ब्रिटिश वायसराय की उपस्थिति में ,खुले तौर पर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा लिखे गीत का गायन और प्रदर्शन किया जो ब्रिटिश साम्राज्य की अवहेलना करने के लिए किया गया था।

दीनानाथ द्वारा निर्देशित एवं वझे बुआ की देशभक्ति सामग्री द्वारा रचित गीत एवं नाटक ,अपनी विलक्षण प्रस्तुति के कारण जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थे।

दीनानाथ 1930 के दशक में ,वित्तीय कठिनाई के दिनों के दौरान ,शराब का सेवन करने लगे थे। कुछ हफ्तों के लिए बीमार रहने के बाद, वह अप्रैल 1942 में पुणे में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के समय उनकी उम्र केवल 41 थी। उनके परिवार द्वारा , पुणे में उनके नाम पर दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र बनवाया गया है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सोफा बेड

हवा भर कर बनाए जाने वाले सोफे और गद्दे (Inflatable Sofas & Air Mattresses) छोटे घरों, मेहमानों के आने पर अतिरिक्त जगह बनाने,...