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बुधवार, 10 मई 2023

सदाशिव अमरापुरकर

*🎂जन्म 11मई*
*🕯️मृत्यु 25 अक्तूबर*

*प्रसिद्ध अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि*
सदाशिव की पहली फिल्म '22 जून 1897' थी, यह एक मराठी फिल्म थी और इस फिल्म में उन्होंने बाल गंगाधर तिलक का रोल निभाया था। तो वहीं अभिनेता की पहली हिंदी फिल्म थी 'अर्धसत्य'। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया। सिर्फ यही नहीं उन्हें फिल्म 'सड़क' के लिए भी फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया था। सदाशिव ने फिल्म 'सड़क' में 'किन्नर' का रोल निभाया था, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया था।
अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'आखिरी रास्ता' में भी सदाशिव के किरदार की दर्शकों ने खूब तारीफ की थी। सदाशिव ने बॉलीवुड के लगभग सभी सुपरस्टार्स के साथ काम किया। इनमें धर्मेंद्र, गोविंदा, अमिताभ बच्चन से लेकर आमिर खान, संजय दत्त और सलमान खान तक के नाम शामिल हैं। 
सुपरस्टार धर्मेंद्र को उनका अंदाज इतना पसंद आया कि सदाशिव अपने अपोजिट उनके पसंदीदा विलेन हो गए। जानकार कहते थे कि धर्मेंद्र उन्हें अपने लिए ‘लकी’ मानने लगे थे। यही कारण है कि सदाशिव अमरापुरकर उनके साथ दो-चार नहीं बल्कि 11 फिल्मों में नजर आए।
अमरापुरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक में 11 मई 1950 को हुआ था। अमरापुरकर का बचपन का नाम गणेश कुमार नोरवाडे था लेकिन 1974 में इन्होंने अपना नाम सदाशिव रख लिया। महाराष्ट्र के ब्राहमण परिवार में जन्में अमरापुरकर को करीबी मित्र तत्य कहकर पुकारते थे। हमेशा से ही उनका झुकाव समाज के वंचित तबके की ओर रहा। सदाशिव का विवाह सुनंदा करमाकर के साथ हुआ। दोनों के बीच हाई स्कूल में ही प्रेम की शुरूआत हो गई थी। पुणे कॉलेज से इतिहास में एमए कर चुके अमरापुरकर ने कॉलेज के दिनों से ही थियटर और फिल्मों के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

1981 में मराठी नाटक हैंड्स अप में अभिनय के दौरान अमरापुरकर की मुलाकात डायरेक्टर गोविंद निहालनी से हुई। गोविंद उस समय अपनी फिल्म अर्द्धसत्य के लिए कलाकारों का चयन कर रहे थे। फिल्म अर्ध सत्य में सदाशिव अमरापुरकर ने डॉन रामा शेट्टी का किरदार निभाया। इसी फिल्म के लिए अमरापुरकर को 1984 में सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार का अवॉर्ड मिला। अमरापुरकर को हिंदी फिल्मों के ही मैन के लिए लकी माना गया। 1987 में आई फिल्म हुकूमत उन्होंने धर्मेद्र के साथ काम किया। इस फिल्म में सदाशिव ने मुख्य खलनायक का किरदार निभाया और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही। अर्द्धसत्य के बाद अमरापुरकर ने पुराना मंदिर, नासूर, मुद्दत, वीरू दादा, जवानी, और फरिश्ते जैसी फिल्मों में रोल किए लेकिन 1991 में आई सड़क उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई।

अमरापुरकर ने हिंदी और मराठी के अलावा कुछ बंगाली और उडिया फिल्मों में भी काम किया। 1991 में रिलीज हुई फिल्म सड़क के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला। महेश भट्ट ने फिल्मसिटी में सदाशिव को महारानी के किरदार के बारे में बताया। उन्होंने सदाशिव को यह भी बताया कि यह कैरक्टर नाकाम भी हो सकता है। इसके बावजूद, सदाशिव ने यह ऑफर स्वीकर कर लिया। अपने विलेन और कॉमिडी के किरदार के साथ सदाशिव अमरापुरकर ने सिर्फ सिनेमा के लिए ही नहीं बल्कि सोसायटी के लिए भी काफी काम किया। सदाशिव अमरापुरकर फिलैन्ट्रॉफिस्ट, सोशल ऎक्टिविस्ट तो थे ही, साथ में वह कई सामाजिक संगठनों के साथ जुड़े भी हुए थे। अंदश्रद्धा निर्मूलन समिति, स्नेहालय, लोकशाही प्रबोधन व्यासपीठ, अहमदनगर ऎतिहासिक वास्तु संग्रहालय जैसे संगठनों से वह प्रमुखता से जुड़े हुए थे।

ग्रामीण युवकों के विकास के लिए वह निरंतर प्रयास करते रहे। सदाशिव अमरापुरकर फिल्मों के अलावा छोटे पर्दे पर भी नजर आए। टीवी शो शोभा सोमनाथ की में उनके काम को खूब सराहा गया। उनकी बेटी रीमा भी बॉलिवुड में निर्देशन की बारीकियां सीख रही हैं और अब तक एक शॉर्ट फिल्म का डायरेक्शन कर चुकी हैं। सदाशिव की बेटी अब टीवी के लिए एक शो प्रड्यूस करने की तैयारी कर रही हैं। सदाशिव अमरापुरकर आखिरी बार मीडिया में उस वक्त दिखाई दिए जब होली के मौके पर पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश के बाद उनके साथ मारपीट हुई। वर्सोवा में स्थित अपने घर के पड़ोस चल रही रेन डांस पार्टी में लोगों से पानी बचाने की अपील करने पहुंचे सदाशिव से 5 लोगों ने मारपीट की। 25 अक्टूबर 2014 से सदाशिव फेफड़ों में इंफेक्शन के चलते मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद तीन नवबंर को अमरापुरकर का निधन हो गया।

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