*🎂जन्म- 11 मई, 1933*
*🕯️मृत्यु- 22 मार्च, 2021*
11मई 1933 - 22 मार्च 2021
प्रसिद्ध पटकथा लेखक सागर सरहदी के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि
सागर सरहदी का नाम उन लेखकों में शुमार है, जिन्होंने अपनी लेखनी से एक बदलाव लाने की कोशिश की। उन्होंने जो भी पहचान बनाई वो अपने दम पर बनाई। उनकी लेखनी का जादू कुछ इस तरह था कि जाने-माने निर्देशक यश चोपड़ा ने अपनी सभी बड़ी फ़िल्मों की कहानी उन्हीं से लिखवाई। उन दोनों की ये जोड़ी उस दौर में बेहद कामयाब मानी जाती थी।
सागर सरहदी साहब की फ़िल्मों में औरतों को ताक़तवर रूप में ही दिखाया गया है। वे इस बात पर यकीन भी किया करते थे। उनके नाटक 'तन्हाई', 'दूसरा आदमी' में भी यही दिखाया गया है। उनके नज़रिए से समाज को बदलने के लिए महिलाओं का आगे आना ज़रूरी है। 'बाज़ार', 'कभी-कभी' और 'दूसरा आदमी' ये तीन फ़िल्में थीं जो उन्हें बेहद पसंद थीं और वे हमेशा से ही कुछ ऐसा ही नया लिखना चाहते थे।
सागर सरहदी को न बड़े घर का शौक था और न ही गाड़ियों का। साइन में उनका एक घर था। उसी में वे अकेले रहा करते थे क्योंकि वे शादीशुदा नहीं थे। उन्होंने खुद ये फ़ैसला लिया था कि वे कभी शादी नहीं करेंगे। यह फ़ैसला उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में ही कर लिया था। उन्होंने कहा था कि वे शादी इसलिए नहीं करना चाहते क्योंकि उन्हें अपने काम के साथ किसी तरह का समझौता न करना पड़े। वे कहते थे कि मैं वही लिखूंगा जो मैं चाहूंगा। इसके लिए मुझे अगर ज़्यादा पैसे भी मिले तो नहीं चाहूंगा। घर पर न बीवी थी, न बच्चे लेकिन वे कभी अकेले हुए नहीं। उनकी किताबें और नाटक से जुड़े लोग अक्सर उनके पास रहा करते थे। उन्हें अंत तक नाटक लिखने का शौक था और वो लिखते भी थे। थिएटर ग्रुप के लोग अक्सर उनके साथ रहे।
घर या पुस्तकालय
जाने माने निर्देशक और निर्माता रमेश तलवार सागर सरहदी के भतीजे हैं। वे 'इत्तेफ़ाक़', 'त्रिशूल', 'कभी कभी', 'काला पत्थर', 'दीवार' जैसी फ़िल्म के सहायक निर्देशक रहे और उन्होंने 'दो आदमी', 'बसेरा', 'दुनिया' जैसी फ़िल्मों का निर्देशन किया है। रमेश तलवार के अनुसार- "उन्हें किसी भी तरह का कष्ट नहीं था, वो अपनी ज़िंदगी में बेहद खुश रहा करते थे। बढ़ती उम्र के कारण घर पर ही रहते थे। मेरे सगे चाचा थे। शुरू से ही मैं उनसे बहुत प्रभावित रहा हूँ। उन्होंने जब फ़िल्मों में क़दम रखा, तब एक जैसी फ़िल्में लिखी जा रही थीं। लेकिन वे उस दौर में भी अलग काम कर रहे थे। जब भी किसी फ़िल्म की कहानी लिखनी होती, वे एकांत में जाना पसंद करते थे। कभी खंडाला तो कभी किसी और जगह पर। उन्हें किताबों से बेहद प्यार रहा है। उनका घर किताबों से ही भरा हुआ था। उनका घर ऐसा लगता है जैसे किसी कॉलेज की लाइब्रेरी। उनके घर पर 70 फ़ीसद किताबें और 30 फ़ीसद वे रहा करते थे। उन्हें अंत तक भी लिखना पढ़ना पसंद था। रोज़ सुबह 5 बजे उठकर किताबे पढ़ा करते थे।"
सागर सरहदी (11मई 1933 - 22 मार्च 2021) एक भारतीय लघु कहानी और नाटक लेखक थे, और फिल्म के लिए एक लेखक, निर्देशक और निर्माता थे। बफ्फा (तब ब्रिटिश भारत और अब पाकिस्तान में) में जन्मे, उन्होंने उर्दू लघु कथाएँ लिखना शुरू किया और फिर एक नाटककार के रूप में जारी रखा। सागर सरहदी को आईसीए में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था - अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक फिल्म समारोह 2019 में असगर वजाहत द्वारा।
वह यश चोपड़ा की कभी कभी (1976), अमिताभ बच्चन और राखी अभिनीत फिल्म से लोकप्रिय हुए। उन्होंने नूरी (1979) सहित कई हिट फिल्मों के लिए लेखन किया जैसे शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी और रेखा अभिनीत सिलसिला (1981)फ़िल्म चांदनी में (1989) ऋषि कपूर, श्रीदेवी और विनोद खन्ना ने अभिनय किया फ़िल्म फासले में सुनील दत्त, रेखा, फारुख शेख और दीप्ति नवल ने अभिनय किया फ़िल्म रंग (1993), कमल सदाना और दिव्या भारती द्वारा अभिनीत एवं तलत जानी द्वारा निर्देशित फ़िल्म अनुभव संजीव कुमार और तनुजा अभिनीत बासु भट्टाचार्य द्वारा निर्देशित फ़िल्म ज़िन्दगी (1976); दूसरा आदमी कर्मयोगी; कहो ना प्यार है करोबार; बाजार; चौसर जैसी फिल्मों को लिख कर एक पटकथा लेखक के रूप में जाना-पहचाना नाम बन गए।
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