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🎂जन्म की तारीख और समय: 13 जुलाई 1939,🎈 बिजनौर
🕯️मृत्यु की जगह और तारीख: 17 मई 2009, मुम्बई💐
बच्चे: अमित मेहरा, पुनीत मेहरा, सुमित मेहरा
भाई: बब्बू मेहरा
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*🎂जन्म की तारीख और समय: 13 जुलाई 1939, बिजनौर*
*🕯️मृत्यु की जगह और तारीख: 17 मई 2009, मुम्बई*
*बच्चे: अमित मेहरा, पुनीत मेहरा, सुमित मेहरा*
*भाई: बब्बू मेहरा*
*नामांकन: फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म,
प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
आज बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक प्रकाश मेहरा की पुण्यतिथि है. वो एक ऐसे निर्देशक हैं जिन्होंने इंडस्ट्री को न केवल कई सुपरहिट फिल्में दीं, बल्कि अमिताभ बच्चन के रूप में महानायक भी दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि जब एक के बाद एक अभिनेता अमिताभ बच्चन की फिल्में फ्लॉप होती जा रही थीं और वो मुंबई छोड़ने का मन बनाने लगे थे, तब उनकी जिंदगी में प्रकाश मेहरा एक उम्मीद बनकर आए थे. प्राण के कहने पर उन्होंने अमिताभ बच्चन को 'जंजीर' फिल्म दी और उसके बाद सब जानते हैं यह फिल्म एक इतिहास बना गई.
यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर बिग बी को 'जंजीर' न मिली होतो तो उनका कैरियर आज कुछ अलग तरह का होता! इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन रातों रात स्टार बन गए थे. इस फिल्म से ही उनकी एंग्री यंग मैन की छवि बनी. एक बार महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा था कि प्रकाश मेहरा बॉक्सिंग चैंपियन मुहम्मद अली और उन्हें लेकर एक फिल्म बनाना चाहते थे लेकिन यह सपना अधूरा ही रह गया
मशहूर निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले थे, लेकिन उनका बचपन पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में बीता. जहां वो अपनी चाची के साथ रहते थे. काम की बात करें तो प्रकाश मेहरा ने 21 साल की उम्र में 1950 के दशक में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर अपने काम की शुरुआत की थी. उन्होंने 'उजाला' (1959) और 'प्रोफेसर' (1962) आदि में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर कार्य किया था.
साल 1968 में जाकर उनकी मेहनत रंग लाई और 'हसीना मान जाएगी' से बतौर निर्देशक उनके कैरियर की शुरुआत हुई. इसी साल उन्होंने शशि कपूर की फिल्म 'हसीना मान जाएगी' का निर्देशन किया, जिसमें शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी. इसके बाद 1971 में उन्होंने 'मेला' का निर्देशन किया जिसमें फिरोज और संजय ख़ान ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इसके एक साल बाद आई फिल्म 'समाधि' भी सफल रही. प्रकाश मेहरा की फिल्मों में एक गजब की रवानी दिखती है जो देखने वाले को बरबस अपनी और खींच कर रखती है. इसके अलावा संगीत भी उनके फिल्मों की एक बड़ी ताकत रही है.
उन्होंने बॉलीवुड को तमाम सुपरहिट फिल्में दीं, जिसमें हसीना मान जाएगी, हाथ की सफाई, समाधि, जंजीर, मुकद्दर का सिकंदर, घुंघरू, दलाल, शराबी, खून पसीना, जादूगर, हिमालय से ऊंचा और हेरा फेरी आदि फिल्में शामिल हैं. इनमें से कई में अमिताभ बच्चन ने काम किया और आज भी ये फिल्में बहुत याद की जाती हैं. प्रकाश मेहरा ने 1996 में मशहूर अभिनेता राजकुमार के बेटे पुरू राजकुमार को लेकर 'बाल ब्रह्मचारी' फ़िल्म बनाई, लेकिन उनकी यह फिल्म नाकाम रही. बतौर निर्देशक यह उनकी आखिरी फिल्म थी
मेहरा ने 50 के दशक में अपने फ़िल्मी जीवन की शुरूआत एक प्रोडक्शन कंट्रोलर की हैसियत से की थी। 1968 में उन्होंने शशि कपूर की फ़िल्म हसीना मान जायेगी का निर्देशन किया जिसमें शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी। इसके बाद 1971 में उन्होंने में मेला का निर्देशन किया जिसमें फिरोज खान और संजय खान ने मुख्य भूमिका निभाई थी। 1973 में उन्होंने जंजीर का निर्माण और निर्देशन किया। यह फ़िल्म जबरदस्त हिट रही और इस फ़िल्म ने अमिताभ के डवांडोल कैरियर को पटरी पर ला दिया. इस फ़िल्म से अमिताभ के साथ प्रकाश मेहरा का रिश्ता गहरा हो गया और दोनों ने लगातार सात सुपरहिट फ़िल्में थी। फ़िल्म जादूगर में उनका तिलिस्म टूटता हुआ नजर आया। प्रकाश मेहरा ने बाद में जिंदगी एक जुआ फ़िल्म बनाई. अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित जैसे स्टारों के बावजूद यह फ़िल्म कमाल नहीं दिखा पाई. 1996 में उन्होंने राजकुमार के बेटे पुरू राजकुमार को फ़िल्म ब्रह्मचारी के जरिए फ़िल्मी परदे पर लाया, लेकिन यह फ़िल्म भी असफल रही. यह उनके निर्देशन की आखिरी फ़िल्म थी। बाद में उन्होंने दलाल फ़िल्म का निर्माण किया। जो एक सफल फ़िल्म साबित हुई. इंडिया मोशन पिक्चर्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने 2006 में उन्होंने लाइफ टाइम्स अवार्ड से सम्मानित किया। 2008 में इसी संस्था ने उन्हें प्रोडूसर से रूप में लाइफ टाइम अवार्ड से सम्मानित किया। प्रकाश मेहरा बॉलीवुड के प्रथम निर्देशकों में से थे जिन्होंने हॉलीवुड में भी हाथ आजमाया. लेकिन भारी बजट के कारण उनका प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सका. 17 मई 2009 को निमोनिया और दूसरी बीमारियों के कारण मुंबई में उनकी मृत्यु हो गई।
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