ताराचंद बड़जात्या
*🎂जन्म10 मई 1914*
राजश्री भवन, कुचामन सिटी , जोधपुर राज्य , ब्रिटिश भारत
*🕯️मृत21 सितंबर 1992*
*व्यवसाय राजश्री प्रोडक्शंस के निर्माता निदेशक*
उनका जन्म 1914 में राजस्थान के कुचामन शहर में एक मारवाड़ी जैन परिवार में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता के विद्यासागर कॉलेज में पढ़ाई की । उन्होंने 1947 में राजश्री पिक्चर्स (पी) लिमिटेड की स्थापना की। उनके द्वारा निर्मित कुछ उल्लेखनीय फिल्में हैं दोस्ती , जीवन मृत्यु , उपहार , पिया का घर , सौदागर , गीत गाता चल , तपस्या , चितचोर , दुल्हन वही जो पिया मन भये , अंखियों के झरोखों से , सावन को आने दो , तराना , नदिया के पार , और सारांश । 1992 में उनका निधन हो गया। उनके पोते सूरज आर. बड़जात्या एक सफल फिल्म निर्माता और निर्देशक हैं और उनकी पोती कविता के. बड़जात्या हैं ।
इन्होंने रखी थी राजश्री पिक्चर्स की नींव, 3 बेटों काे छोड़ बेटी के नाम शुरू की थी कंपनी
5 वर्ष पहले
जयपुर. 15 अगस्त, 1947 काे ताराचंद बड़जात्या ने 'राजश्री पिक्चर्स' की नींव रखी थी। उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन हाउस के तौर पर हिंदी सिनेमा का एक ऐसा एम्पायर खड़ा किया, जिसमें पिछले 70 साल से लगातार पारिवारिक और सामाजिक फिल्में आज भी बनाई जा रही हैं। राजश्री उनकी बेटी का नाम है, जो आज भी जयपुर में रहती है। राजस्थान के कुचामन सिटी में 14 मई, 1914 में जन्मे ताराचंद बड़जात्या ने 1933 में फिल्मों में प्रवेश किया, जब वे महज 19 साल के थे। उन्होंने 'मोती महल थियेटर्स' से अपना काम शुरू किया।
ऐसे पड़ा 'राजश्री' नाम
- ताराचंद बड़जात्या ने पहले अपने फिल्म प्रोडक्शन हाउस का नाम अपने बेटों 'राज' और 'कमल' के नामों को मिलाकर राजकमल रखा था, लेकिन तभी वी. शांताराम ने इस नाम से प्रोडक्शन हाउस खोल लिया। तब उन्होंने बेटी राजश्री के नाम पर संस्थान का नाम रखा।
- जयपुर रहीं ताराचंद बड़जात्या की बेटी राजश्री ने बताया कि जब भी नई फिल्म बनती तो पहले परिवार के सदस्यों और घर के ड्राइवर तक को दिखाया जाता था। उनसे फिल्म के बारे में राय ली जाती थी और जरूरी हुआ तो फिर संशोधन के बाद ही फिल्म रिलीज होती थी। परिवार के बच्चे भी इस रायशुमारी में शामिल होते थे। उनकी फिल्में हमेशा ऐसी होती थीं, जिन्हें लोग परिवार के साथ बैठकर देख सकें।
ऐसे शुरू किया था करियर
- ताराचंद बड़जात्या ने चेन्नई, हैदराबाद से अपना करियर शुरू किया और दक्षिण भारत से अनेक फिल्म निर्माताओं को बॉलीवुड में हिंदी फिल्मों की मुख्यधारा में लाने का श्रेय उन्हीं को जाता है।
- उन्होंने सबसे पहले फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन का काम शुरू किया और पहली बार इसके उत्तर और दक्षिण भारत में जालंधर से लेकर विशाखापट्टनम तक लगभग 20 प्रमुख शहरों में अपने कार्यालय खोले।
- उन्होंने अनेक ब्लॉक बस्टर फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन किया जिनमें 'शोले', 'धर्मवीर', 'अमर-अकबर-एंथनी', 'विक्टोरिया नं. 203', 'रोटी कपड़ा और मकान', 'कुली', 'खिलौना', 'बैजू बावरा', 'आनंद', 'गुड्डी', 'कभी खुशी कभी गम', 'देवदास' और 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' जैसी अपने समय की सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। बाद में, 1960 में ताराचंद बड़जात्या ने 'राजश्री प्रोडक्शन्स' की स्थापना की और हिंदी सिनेमा को एक से एक नायाब फिल्में दीं। उनकी पहली फिल्म 'आरती' ही सुपरहिट साबित हुई।
- इसके बाद 1964 में आई दूसरी फिल्म 'दोस्ती' ने तो धूम मचा दी। अपने समय की यह ब्लॉक बस्टर फिल्म थी, जिसे 6 फिल्म फेयर पुरस्कार मिले। इसके बाद फिल्मों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।
- भारत सरकार ने ताराचंद को उस फिल्म समिति का सदस्य भी बनाया, जिसकी अध्यक्ष तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री इंदिरा गांधी होती थीं। 21 सितम्बर, 1992 को मुंबई में उनका निधन हो गया।
जब 'राजश्री' में चमका 'सूरज'
- 'राजश्री' में ताराचंद बड़जात्या और उनकी 3 बेटों- राजकुमार, कमल कुमार और अजित कुमार फिल्म निर्माण और डिस्ट्रीब्यूशन का ही काम संभालते थे, लेकिन फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में किसी ने कदम नहीं रखा था।
- एक बार जब राज कुमार के बेटे सूरज आर. बड़जात्या ने फिल्म निर्देशन की इच्छा जताई तो परिवार के लोगों को इसमें हिचकिचाहट हुई। तब ताराचंद बड़जात्या ही उन्हें प्रोत्साहित किया और सूरज आर. बड़जात्या के निर्देशन में पहली फिल्म आई - 'मैंने प्यार किया'। यह ब्लॉक बस्टर फिल्म साबित हुई और इसे 6 फिल्म फेयर अवार्ड मिले।
- इसका अंग्रेजी वर्जन 'व्हेन लव कॉल्स' भी गुयाना, त्रिनिडाड जैसे कैरेबियन मार्केट में खूब चला। 'ते अमो' नाम से पहली बार स्पैनिश में भी यह फिल्म बनाई गई।
- सूरज आर. बड़जात्या के निर्देशन में दूसरी फिल्म आई - 'हम आपके हैं कौन' (1994)। यह वो दौर था जब सिनेमाघरों से दर्शक छिटक रहे थे। यह फिल्म फिर से दर्शकों को सिनेमा घरों तक लाई और 150 सिनेमाघरों में 25 सप्ताह तक चली। कई सिनेमाघरों में 50 और 100 सप्ताह तक भी चली।
राजश्री प्रोडक्शन्स की चर्चित फिल्में
- ताराचंद बड़जात्या की राजश्री प्रोडक्शन्स ने कई टीवी सीरियल भी बनाए हैं, जिनमें 'पेइंग गेस्ट' (दूरदर्शन-1985), 'वो रहने वाली महलों की' (सहारा वन-2005), और 'प्यार के दो नाम- एक राधा एक श्याम' (स्टार प्लस- 2006) हैं। 1998 में 'राजश्री म्यूजिक' की भी नींव रखी गई, जिससे कई प्राइवेट अल्बम आ चुके हैं।
-राजश्री प्रोडक्शन्स ने कोई 60 से ज्यादा फिल्मों का निर्माण किया और यह सिलसिला आज भी जारी है। इनमें 'जीवन-मृत्यु', 'गीत गाता चल', 'तपस्या', 'उपहार', 'पिया का घर', 'दुल्हन वही जो पिया मन भाए', 'सावन को आने दो', 'अंखियों के झरोखे से', 'नदिया के पार', 'सारांश', 'मैंने प्यार किया', 'हम आपके हैं कौन', 'हम साथ-साथ हैं' और 'प्रेम रतन धन पायो' (2015) जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।
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