जब नरगिस ने आरके फिल्म्स के लिए बेचे अपने गहने
नरगिस और राजपूर को एक-दूसरे से कितना लगाव था. इसका एक उदाहरण मधु जैन की किताब ‘फर्स्ट फैमिली ऑफ इंडियन सिनेमा- द कपूर्स’ में मिलता है. अपनी किताब में मधु जैन लिखती हैं, नरगिस ने अपना दिल, अपनी आत्मा और अपना पैसा भी राज कपूर की फिल्मों में लगाना शुरू कर दिया था. फ्लॉप फिल्मों के दौर में जब आर के स्टूडियो पैसों की तंगहाली से जूझ रहा था तो पैसों की भरपाई के लिए नरगिस ने अपने गहने बेचे. दूसरे निर्माताओं की अदालत, घर-संसार और लाजवंती जैसी फिल्मों कीं, ताकि आरके फिल्म्स की मदद की जा सके.
मां के मना करने पर महाबलेश्वर को बनाना पड़ा कश्मीर
राजकपूर को अपनी पहली फिल्म ‘आग’ के लिए नरगिस को कास्ट करना आसान नहीं रहा. इसके लिए कई शर्तें रखी गईं. नरगिस की मां जद्दनबाई ने शर्त रखी कि फिल्म के पोस्टर में बेटी का नाम कामिनी कौशल और निगार सुल्ताना के ऊपर रखा जाए. उनके लिए मेहनताना 10 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपए देने की शर्त भी रखी गई.
जब राजकपूर ने नरगिस को बरसात की शूटिंग के लिए कश्मीर ले जाने की बात कही, तो उनकी मां जद्दनबाई ने साफ इंकार कर दिया. नतीजा महाबलेश्वर में कश्मीर का सेट बनाया गया.
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