बुधवार, 19 जुलाई 2023

जसपाल सिंह

जसपाल सिंह 

🎂जन्म 23 मार्च, 1943

एक भारतीय गायक हैं जिन्होंने 1970 और 1980 के दशक के विभिन्न बॉलीवुड अभिनेताओं को अपनी आवाज दी। उनका जन्म अमृतसर में हुआ था और अपने स्कूल और कॉलेजों के दिनों में, वह विभिन्न गायन प्रतियोगिताओं में गाते थे। गायन के अपने जुनून को आगे बढ़ाने के लिए वह मुंबई गए जहां उनकी बहन रहती थी। उनकी प्रतिभा सबसे पहले और सबसे प्रसिद्ध महिला गायक ऊषा खन्ना द्वारा 1968 के दौरान मान्यता प्राप्त थी। उन्हें व्यावसायिक स्तर पर गाने का मौका प्रदान किया गया था, हालांकि उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसके वह हकदार थे। उन्होंने गायन में अपना करियर बनाने के लिए संघर्ष किया और वे बार-बार अमृतसर, दिल्ली और मुंबई आए। अपने पिता के दबाव के कारण उन्होंने कानून का अभ्यास शुरू किया और मुंबई में रहने लगे। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। और फिर, एक प्रसिद्ध संगीत संगीतकार, रवींद्र जैन ने उन्हें 1975 में 'गीत गाता चल' नामक फिल्म में एक गीत के लिए बड़ा ब्रेक दिया। इस गीत के बाद, वे एक घरेलू नाम बन गए। उनकी आवाज़ अद्वितीय थी और किसी भी अन्य के विपरीत थी और उन्होंने 'नदिया के पार', अंखियां के झरोखों से ',' सावन को जाने करो 'जैसी हिट फिल्मों के लिए गाया। 

जिन वक़्तों मे उनके पास सबसे अधिक काम होने चाहिए उनही दिनो  फिल्मी संगीत के पतन का दौर शुरू हुआ। फिल्मों में बढ़ती हिंसा ने संगीत के लिए मौके बहुत कम कर दिए, साथ ही किसी भी तरह के गाने गाना इनको पसंद नहीं था  ऐसे में जसपाल के लिये काम मिलना  मुश्किल हो गया और ये हिन्दी सिनेमा से दूर होते चले गए ,पर अपनी अलग आवाज के मालिक जसपाल को आज भी स्टेज के माध्यम से सुना जा रहा है

यहां भारतीय फिल्मों के जसपाल सिंह के हिट गानों की सूची दी गई है

देखो लोगो, ये कैसा जमाना, संभालो संभालो


बेटा खेल मत मटकाओ


धरती मेरी माता पिता आसमान

गीत गाता चल ओ साथी गुनगुनाता चल

मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सुदसरथ अजर बिहारी

चौपाइयां रामायण
श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम


मोहे छोटा मिला भरतार


आंगन में आई बहार भौजी


बड़े ना करे ना बोले बोल


बस एक यही वरदान आज हम मांग रहे करतार से

गगन ये समझे चाँद सुखी है
जब जब तू मेरे सामने आये
जिनखोजा तिन पाइयां घरे पानी पैठा 
कौन दिसा में लेके चला रे बटुहिया

ओ साथी दुख में ही सुख है छिपा रे
अरे रे बबुआ


रंग लेके दीवाने आ गये रंगों में
साथी रे कभी अपना साथ ना छूटे
 
सावन को आने दो

तेरी पलकों के तले ये जो दीपक जले

जमुना किनारे बाजे श्याम की बांसुरिया

जोगी जी धीरे धीरे

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