रविवार, 31 मार्च 2024

कपिल शर्मा

🎂जन्म 2 अप्रैल 1981 को अमृतसर में हुआ था।
कपिल शर्मा एक भारतीय कॉमेडी कलाकार है, वास्तविक जन्म 2 अप्रैल 1981 को अमृतसर में हुआ था। यह भारत का प्रसिद्ध हास्य कलाकार है। सोनी टीवी पर प्रचलित हास्य कार्यकर्म द कपिल शर्मा शो भारत का नंबर वन कॉमेडी शो है। एक बेहतरीन हास्य कलाकार की वजह से कपिल शर्मा को कॉमेडी का बादशाह कहा जाता है। करोडो लोगों के चेहरे पर मुस्कान आने वाले कपिल शर्मा को 2014 में आईटीए किंग ऑफ कॉमेडी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

कपिल शर्मा की जीवनी

नाम/नाम कपिल शर्मा
डीओबी / जन्म तिथि 2 अप्रैल 1981
पेशा / पेशा भारतीय कॉमेडी कलाकार
माता-पिता / माता - पिता जितेंद्र कुमार/ जनक रानी
पत्नी / पत्नी गिन्नी शर्मा
आयु/उम्र 40 साल (2021)
नेट-वर्थ/कुल मूल्य $ 38 मिलियन
शो / शो कपिल शर्मा शो और अन्य
राष्ट्रीयता/राष्ट्रीयता भारतीय
कपिल शर्मा की जीवन कहानी हिंदी में
कॉमेडी का झटका पिक्चर शर्मा का जन्म 2 अप्रैल 1981 को पंजाब में स्थित अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। इनके पिता जीतेंद्र कुमार पंजाब पुलिस में एक हेड कांस्टेबल में शामिल थे। और उनकी माँ जनक रानी एक हाउस वाइफ है।

कपिल शर्मा से ही एक दुष्ट और अन्य लोगों की नक़ल करने में पकड़े हुए थे, लेकिन उस दौरान पिता की मृत्यु के कारण कपिल के परिवार में मानो दुखों का संकट आ खड़ा हो। इससे पहले कपिल शर्मा ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पीसीओ (पब्लिक कॉल ऑफिस) में काम किया था, बाद में कपिल ने हिंदू कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई की।

🔛कॉमेडी करियर की शुरुआत –
जैसा कि बताया गया है कि, बचपन के बचपन से लोगों की नकल करने में यादगारी हासिल हुई थी। अपनी जूनून को आगे ले जाते हुए कपिल शर्मा ने अपना करियर कॉमेडी के क्षेत्र में बनाने का फैसला लिया और सपोर्ट के लिए कपिल के साथ उनके परिवार ने खूब दिया। अब बारी थी सिर्फ कॉमेडी के क्षेत्र में गिरने का।

इस दौरान कपिल शर्मा ने हंसीते नई हंसीते जैसे एक कॉमेडी शो में काम किया। इसके बाद उन्होंने उस समय का प्रमुख शो द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में अपना हाथ आगे बढ़ाया, दुर्भाग्य से उन्हें अस्वीकार कर दिया गया, लेकिन कपिल शर्मा कहा गया था, कपिल ने दुबारा उसी शो में अपना हाथ अलग किया और चुना। कहते हैं की, किसी का आज देखकर उनका कल डिसाइड नहीं करते, कुछ ऐसा ही हुआ कपिल शर्मा के साथ।

द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में न का चयन किया बल्कि फाइनल भी अपना नाम किया, जिसके लिए कपिल शर्मा को 10 लाख रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया गया। इसके बाद कपिल शर्मा ने 2011 में कॉमेडी सर्कस में एक कॉम्पटमेंट के रूप में भाग लिया, जहां उन्होंने साल 2011 और 2012 के विनर की घोषणा की। और अपना नाम और काम को लोगों के बीच लाये।

🔛सभी शो (2011 – 2021)
साल (वर्ष) शो (शो) रोल (रोल)
2007 द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज प्रतियोगी
2011 कॉमेडी सर्कस प्रतियोगी
2013 कॉमेडी नाइट्स विद कपिल मेज़बान
2016 द कपिल शर्मा शो सीजन 1 मेज़बान
2018-वर्तमान द कपिल शर्मा शो सीजन 2 मेज़बान
पुरस्कार और उपलब्धियों -
साल (वर्ष) पुरस्कार (पुरस्कार) श्रेणी (श्रेणी) परिणाम (नतीजा)
2014 ITA किंग ऑफ़ कॉमेडी अवार्ड भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार विजेता
2013-2021 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए ITA अवार्ड - कॉमेडी भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार विजेता
2014 कॉमिक रोल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए इंडियन टेली अवार्ड इंडियन टेली अवार्ड्स विजेता
2014-2013 बिग स्टार सबसे मनोरंजक टेलीविजन रियलिटी शो बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवार्ड्स विजेता
2016 सर्वश्रेष्ठ पुरुष पदार्पण के लिए गिल्ड अवार्ड गिल्ड अवार्ड्स विजेता
2013 मनोरंजन में सीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर सीएनएन-न्यूज18 इंडियन ऑफ द ईयर विजेता
2013 सर्वश्रेष्ठ मेजबान के लिए गोल्डन पेटल अवार्ड गोल्डन पेटल अवार्ड्स विजेता
2013 गोल्डन पल के लिए गोल्डन पेटल अवार्ड्स गोल्डन पेटल अवार्ड्स विजेता
2014 सर्वश्रेष्ठ एंकर के लिए इंडियन टेली अवार्ड इंडियन टेली अवार्ड्स विजेता
2014 बिग स्टार मोस्ट एंटरटेनिंग जूरी/होस्ट (टीवी) बिग स्टार एंटरटेनमेंट अवार्ड्स विजेता
2021 लोकप्रिय टीवी शो के लिए ITA अवार्ड भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार विजेता


कपिल शर्मा शो देखे यहां

सोमवार, 18 मार्च 2024

गीत कार योगेश

#29may
#19marche 
प्रसिद्ध गीतकार योगेश 

 🎂19 मार्च, 1943, लखनऊ, उत्तर प्रदेश; 

⚰️मृत्यु- 29 मई, 2020, मुम्बई, महाराष्ट्र) 

प्रसिद्ध भारतीय गीतकार और लेखक थे। उन्हें विशेष रूप से फ़िल्म 'आनंद' के गीत 'कहीं दूर जब दिन ढल जाये' और 'ज़िन्दगी कैसी है पहेली हाए'; 'रिमझिम गिरे सावन' (फ़िल्म- मंज़िल), 'रजनीगंधा फूल तुम्हारे' (फ़िल्म- रजनीगंधा) जैसे सुपरहित गीतों के लिए प्रसिद्धि प्राप्त है। भारतीय हिंदी सिनेमा में उनके दिये योगदान के लिए उन्हें 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' के अलावा 'यश भारती पुरस्कार' भी दिया गया।

जीवन परिचय

हिन्दी फ़िल्मों के सुपरिचित गीतकार योगेश गौड उर्फ़ योगेश का जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। आरंभिक शिक्षा लखनऊ के संस्कृति संपन्न माहौल में हुई, इस तरह योगेश का बचपन और किशोरावस्था यहीं बीते। पिता की असामयिक मृत्यु के कारण पढाई बीच में ही रोक कर रोज़गार की तलाश में लग गए। परिवार, मित्रों की सलाह पर मायानगरी मुंबई का रुख किया, मकसद इतना था कि जल्द-से-जल्द कोई काम मिले। मुंबई फ़िल्म उद्योग में पहला लक्ष्य नहीं था, महानगर की परिस्थितियों में योगेश को समझ में नहीं आ रहा था कि किस तरह एक शुरुआत होगी। इस क्रम में उन्होंने कहानी लेखन को चुना और सफ़र पर निकल पड़े, धीरे-धीरे पटकथाएं और संवाद लिखकर सिने-जीवन का आगाज़ किया

गीत एवं पटकथा लेखन

योगेश जी के मुंबई में आरंभिक संघर्ष को मित्र व सहयोगी सत्यप्रकाश ने साथ दिया, दोनों में सच्ची दोस्ती सा रिश्ता बना। भाई सत्यप्रकाश योगेश के सलाहकार, प्रेरक और संकट-मोचक रहे। मित्र के साथ ‘चाल’ में गुज़रा यह वक्त प्रेरणा का वरदान सा बन गया। आत्म-निर्भर पहचान के लिए अपने नाम से ‘गौड’ हटाने का फ़ैसला उनके व्यक्तित्व विकास के लिए अवसरों के नए द्वार लेकर आया, कहानी, पटकथा, संवाद के बाद कविता और गीत-लेखन की ओर उन्मुख हुए। यहां पर बचपन में कविता लिख कर याद करने का अभ्यास काम आया। लखनऊ का साहित्य-सांस्कृतिक सांचा और आत्मबल योगेश को कवि-गीतकार रूप दे गया।

योगेश जी को सगीत निर्देशक की ‘धुनों’ पर गीत लिखना पसंद नहीं था। गीत-लेखन की तकनीकी मांगों से अपरिचित होकर फ़िल्मकार रोबिन बैनर्जी के पास काम मांगा। उस समय सगीत धुनों पर ही गीत लिखने का चलन था। रोबिन बैनर्जी उन दिनों फ़िल्म ‘मासूम’ (1963) पर काम कर रहे थे। योगेश को रोबिन जी ने इस फ़िल्म के गीत लिखने को कहा। इस अनुभव ने उनकी आँखें खोल दी। अब वह संगीत धुनों पर लिखने को समझ चुके थे। रोबिन बैनर्जी-योगेश का सफ़र सखी रौबिन, मारवेल मैन, फ़्लाइंग सर्कस, रौबिनहुड समेत लगभग दर्जन भर फ़िल्मों तक रहा।

फ़िल्म 'आनंद' से मिली सफलता

प्रसिद्ध संगीत निर्देशक सलिल चौधरी बहु-चर्चित फ़िल्म ‘आनंद’ (1971) पर काम कर रहे थे, उन्हें इस फ़िल्म के लिए एक सुलझे हुए गीतकार की तलाश थी। मशहूर शैलेन्द्र की कमी में योगेश का चयन किया। आनंद की सफ़लता से ‘योगेश’ देशभर में विख्यात होकर सलिल चौधरी के साथ अपने कैरियर की ‘सफ़लतम’ यात्रा पर निकल पड़े। सलिल दा-योगेश ने आनंद के अलावे ‘अनोखादान’, ‘अन्नदाता’, ‘आनंद महल’, ‘रजनीगंधा’ और ‘मीनू’ जैसी फ़िल्मों में साथ काम किया। सलिल दा की जलेबीदार, कठिन संगीत धुनों के लिए गीत लिखना योगेश के लिए बहुत ही ‘चुनौतीपूर्ण’ कार्य रहा। निस दिन, रजनीगंधा फूल तुम्हारे, प्यास लिए मनवा जैसे गीतों में गीतकार की ‘कविताई’ निखर कर सामने आई। इस तरह सलिल दा के मापदंडों पर एक गीतकार ‘कवि’ भी बन सका।

योगेश ने अपने कैरियर में संगीतकार घरानों के ‘पिता-पुत्र’ संगीतकारों के साथ काम किया, इस परम्परा में सलिल एवं संजय चौधरी और सचिन देव एवं राहुल देव बर्मन के लिए गीत लिखे। जाने-माने संगीतकार सचिन देव बर्मन की ‘उसपार’ तथा ‘मिली’ योगेश के यादगार ‘प्रोजेक्ट’ रहे, इन फ़िल्मों का जीवंत गीत-संगीत इस साथ की सुनहरी याद है। 'मिली' अभी पूरी भी न हुई थी कि सचिन देव बीच में ‘बीमार’ पड़ गए, पिता की आधी फ़िल्म को राहुल देव बर्मन ने ‘बडी सूनी-सूनी है ज़िंदगी’ और ‘मैने कहा फूलों से’ रिकार्ड कर पूरा किया। संगीतकार राहुल की ‘लिस्ट’ में योगेश का नम्बर पाँचवीं पायदान पर आता था, फिर भी राहुल देव-योगेश की जोड़ी 8 से 10 फ़िल्मों में साथ आई।

फ़िल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन मे बनी ‘आनंद’ (1971) के बाद योगेश को सिने जगत् में उचित सम्मान मिला, फ़िल्म के कभी ना भुलाए जा सकने वाले गीत आज भी लोकप्रिय बने हुए हैं। कहा जाता है कि ऋषिकेश जी को ‘आनंद’ बनाने की प्रेरणा मूलत: एक जापानी फ़िल्म से मिली, कहानी से इस क़दर प्रोत्साहित हुए कि केन्द्र में ‘महिला’ को रखकर ‘मिली’ भी बनाई। योगेश जी ने दोनों फ़िल्मों के गीत लिखकर ऋषिकेश दा की ‘सबसे बड़ा सुख’, ‘रंग-बिरंगी’ और ‘किसी से ना कहना’ के गीत समेत अनेक फ़िल्मों के गीत लिखे।[1]

प्रसिद्ध गीत

कहीं दूर जब दिन ढल जाये (आनंद)
रिमझिम गिरे सावन (मंज़िल)
रजनीगंधा फूल तुम्हारे (रजनीगंधा)
ज़िन्दगी कैसी है पहेली (आनंद)
ना बोले तुम, ना मैने कुछ कहा (बातों बातों में)
कई बार यूँ भी देखा है (रजनीगंधा)
कहा तक ये मन को अंधेरे छलेंगे (बातों बातों में)
आए तुम याद मुझे, गाने लगी हर धडकन (मिली)
न जाने क्यों होता है, ये जिंदगी के साथ (छोटी सी बात)

मृत्यु

गीतकार तथा लेखक योगेश का निधन 29 मई, 2020 को बसई, मुम्बई में हुआ।

हिंदी सिनेमा की महान कलाकार लता मंगेशकर ने उनके निधन पर लिखा- "मुझे अभी पता चला कि दिल को छूने वाले गीत लिखने वाले कवि योगेश जी का आज स्वर्गवास हो गया है। ये सुनकर मुझे बहुत दु:ख हुआ। योगेश जी के लिखे गीत मैंने गाए। योगेश जी बहुत शांत और मधुर स्वभाव के इंसान थे। मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पण करती हूं"। योगेश के साथ लता मंगेशकर ने कई फिल्मों में काम किया था।
🎥
  • (1993)चोर और चांद
  •  (1994)दुलारा
  • (1995) बेवफा सनम 

शनिवार, 16 मार्च 2024

नकीतिन धीर


#17march 
निकितिन धीर
🎂: 17 मार्च 1980 (आयु 44 वर्ष), मुम्बई
पत्नी: कृतिका सेंगर (विवा. 2014)
लंबाई: 1.93 मी
माता-पिता: पंकज धीर, अनीता धीर

निकितिन धीर एक भारतीय अभिनेता हैं जो बॉलीवुड फिल्मों और हिंदी शो में काम करते हैं।
उन्होंने व्यावसायिक रूप से सफल पीरियड रोमांस जोधा अकबर (2008) में मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में अपनी फिल्म की शुरुआत की।
इस सफलता के बाद उन्होंने रेडी (2011), दबंग 2 (2012), चेन्नई एक्सप्रेस (2013), और हाउसफुल 3 (2016) सहित कई सर्वाधिक कमाई करने वाली एक्शन कॉमेडी में खलनायक की भूमिका निभाई।
धीर ने रियलिटी-स्टंट आधारित शो फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 5 (2014) में भी भाग लिया है।
उन्होंने कई टेलीविजन शो में भी काम किया, जिनमें फंतासी नाटक नागार्जुन - एक योद्धा (2016-17) और इश्कबाज़ (2017-18) शामिल हैं।
2019 से, वह बालाजी टेलीफिल्म्स की अलौकिक/फंतासी थ्रिलर नागिन 3 में हुकुम के रूप में काम कर रहे हैं।

धीर ने 3 सितंबर 2014 को कृतिका सेंगर से अरेंज मैरिज की । दंपति की एक बेटी है। 

🎥
2008 जोधा अकबर 
2008मिशन इस्तांबुल
2011 तैयार 
2012 दबंग 2
2013 चेन्नई एक्सप्रेस 
2015 कांचे 
2016 हाउसफुल 3 
2016अजीब अली 
2017 गौतम नंदा 
2017श्रीमान
2018 पाक 
2018 शेरशाह
2022एंटीम: द फाइनल ट्रुथ दया बगारे 
2022 खिलाड़ी 
2022 सर्कस

प्रीति गांगुली

●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●   ꧁ *जन्म की तारीख और समय: 17 मई 1953, मुम्बई* *मृत्यु की जगह और तारीख: 2 दिसंबर 2012, मुम्बई* *भाई: भारती जाफ़री, ...