सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

पंजाबी फिल्मों का नुकसान पंजाबी को

पोस्टर को देखे 
"पिंड अमरीका"
क्या अमरीका पिंड (गांव)या अमरीका का गांव निर्माता ही निर्णय नही ले सकता अपने लक्ष को कि क्या दिखाए क्या विषय बनाए ?
ऐतिहासिक घटना या अमेरिका काल्पनिक उड़ान "उड़ दा पंजाब या उड़ दा पंजाबी संस्कार" 
क्या अब अच्छे अभिनेताओं और अच्छी कहानियों की कमी नहीं है?
अब हमें सोचना और विचार करना होगा.?.पंजाबी गणित की पंजाबी फिल्में सफल क्यों नहीं हो रही हैं?
 1. क्या पटकथा पर मेहनत नहीं हो रही?
  2 क्या अनुभवहीन निर्देशक हैं? 
 3. क्या प्रोड्यूसर बिना समझे काम ले रहे हैं और आंखें बंद करके पैसे दे रहे हैं?  
4. क्या फिल्म बनाने के बहाने कबूतरबाज़ी की जाती है?
  5. क्या भारत के काले धन को सफेद करने का कोई तरीका है?
 कहीं कोई समस्या तो जरूर है, जिस पर विचार करना जरूरी है?
 हमें पता चला है कि पंजाबी फिल्म उद्योग में 80% जुआरी हैं, जो नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं, न ही उनके पास कोई शिक्षा है, लेकिन वे चीजें बेच सकते हैं, हर बार उन्हें नए "एनआरआई निर्माता" मिल जाते हैं, जो फिल्में बनाते हैं। कोशिश करते हैं, अपनी जेबें भरते हैं, फिल्म फ्लॉप होने के बाद निर्माता फिल्मों से तौबा कर लेते हैं, और जुगरू लोग फिर नये निर्माता की तलाश में लग जाते हैं, बस यही क्रम लगातार चलता रहता है?  इसलिए नहीं आ रही अच्छी फिल्में?  यदि इससे नए निर्माताओं को मदद मिलती है तो आप यहां लिखकर अपना अनुभव हमारे साथ साझा कर सकते हैं..!!
 केवल 20% लोग ही अनुभवी, मेहनती और अच्छा काम करने वाले हैं और केवल उन्हीं की फिल्में सफल हो रही हैं?  पंजाबियत के बारे में सोचने के लिए कुछ किसी के पास कुछ नही..!!
जैसे पंजाबी पिंड को प्रवासी भारतीय बना रहे या समझ रहे है कनेडा,अमरीका,।
वहीं अपनी मिट्टी से जुड़े पंजाबी उसी पिंड को अमरीका , कनेडा नही नर्क गिन ने लगे है जैसे महत्त्व पूर्ण विषयों पर पंजाबी सिनेमा जगत की कोई रुचि ही नही लगती।
जिस पंजाब  के भारत ने चंद्र यान , सूर्य यान बनाए उससे अच्छी कौनसी शिक्षा है जैसे प्राप्त करने को पूरा पंजाब ही अमेरिका कनेडा को भाग रहा है जैसे मुद्दों से भटक कर आज "पंजाबी फिल्मों" के सत्र को मुद्दे हीन फिल्मे बनानी ही क्यों पड़ रही है क्या पंजाब के "सामाजिक" मुद्दों पर फिल्मे बन ना बनद नही हो गई और अपने स्तर से नीचे की श्रेणी की फिल्मे हमे नही परोस रहा आज का "पंजाबी सिनेमा"  अच्छे अभिनेताओं और अच्छी कहानियों की कमी नहीं है, अब हमें सोचना और विचार करना होगा.?.  गणित की पंजाबी फिल्में सफल क्यों नहीं हो रही हैं?
 1. क्या पटकथा पर मेहनत नहीं हो रही?  2 क्या अनुभवहीन निर्देशक हैं?  3. क्या प्रोड्यूसर बिना समझे काम ले रहे हैं और आंखें बंद करके पैसे दे रहे हैं?  4. क्या फिल्म बनाने के बहाने कबूतरबाज़ी की जाती है?  5. क्या भारत के काले धन को सफेद करने का कोई तरीका है?
 कहीं कोई समस्या है, जिस पर विचार करना जरूरी है?
 हमें पता चला है कि पंजाबी फिल्म उद्योग में 80% जुआरी हैं, जो नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं, न ही उनके पास कोई शिक्षा है, लेकिन वे चीजें बेच सकते हैं, हर बार उन्हें नए एनआरआई निर्माता मिल जाते हैं, जो फिल्में बनाते हैं। कोशिश करते हैं, अपनी जेबें भरते हैं, फिल्म फ्लॉप होने के बाद निर्माता फिल्मों से तौबा कर लेते हैं, जुगरू लोग फिर नये निर्माता की तलाश में लग जाते हैं, बस यही क्रम लगातार चलता रहता है?  इसलिए नहीं आ रही अच्छी फिल्में?  यदि इससे नए निर्माताओं को मदद मिलती है तो आप यहां लिखकर अपना अनुभव हमारे साथ साझा कर सकते हैं..!!
 केवल 20% लोग ही अनुभवी, मेहनती और अच्छा काम करने वाले हैं और केवल उन्हीं की फिल्में सफल हो रही हैं?  के बारे में सोचने के लिए कुछ..!!
अच्छे अभिनेताओं और अच्छी कहानियों की कमी नहीं है, अब हमें सोचना और विचार करना होगा.?.  गणित की पंजाबी फिल्में सफल क्यों नहीं हो रही हैं?
 1. क्या पटकथा पर मेहनत नहीं हो रही?  2 क्या अनुभवहीन निर्देशक हैं?  3. क्या प्रोड्यूसर बिना समझे काम ले रहे हैं और आंखें बंद करके पैसे दे रहे हैं?  4. क्या फिल्म बनाने के बहाने कबूतरबाज़ी की जाती है?  5. क्या भारत के काले धन को सफेद करने का कोई तरीका है?
 कहीं कोई समस्या है, जिस पर विचार करना जरूरी है?
 हमें पता चला है कि पंजाबी फिल्म उद्योग में 80% जुआरी हैं, जो नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं, न ही उनके पास कोई शिक्षा है, लेकिन वे चीजें बेच सकते हैं, हर बार उन्हें नए एनआरआई निर्माता मिल जाते हैं, जो फिल्में बनाते हैं। कोशिश करते हैं, अपनी जेबें भरते हैं, फिल्म फ्लॉप होने के बाद निर्माता फिल्मों से तौबा कर लेते हैं, जुगरू लोग फिर नये निर्माता की तलाश में लग जाते हैं, बस यही क्रम लगातार चलता रहता है?  इसलिए नहीं आ रही अच्छी फिल्में?  यदि इससे नए निर्माताओं को मदद मिलती है तो आप यहां लिखकर अपना अनुभव हमारे साथ साझा कर सकते हैं..!!
 केवल 20% लोग ही अनुभवी, मेहनती और अच्छा काम करने वाले हैं और केवल उन्हीं की फिल्में सफल हो रही हैं?  के बारे में सोचने के लिए कुछ..!!

शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2023

बेगम अख़्तर

*🎂जन्म: 07 अक्टूबर*
*🕯️मृत्यु: 30 अक्टूबर*

वह प्रसिद्ध गजल और ठुमरी गायिका थीं, जिन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1968 में पद्म श्री और सन 1975में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। बेगम अख़्तर को मल्लिका-ए-ग़ज़ल भी कहा जाता है।

*पुराने जमाने की पार्श्वगायिका नसीम अख़्तर की पुण्यतिथि हार्दिक श्रद्धांजलि*
1920 में पेशावर के एक नवाब परिवार में जन्मे नसीम अख्तर सरदार अख्तर (प्रसिद्ध भारतीय निर्देशक महबूब खान की पत्नी) और बहार अख्तर (ए आर कारदार की पत्नी) की छोटी बहन है इस भारतीय निर्देशक को लाहौर फिल्म उद्योग की स्थापना का श्रेय दिया जाता है

वह विभाजन से पहले एक स्थापित पार्श्व गायिका थीं और उन्होंने उस समय के प्रमुख संगीत निर्देशकों के लिए गाया, जिसमें खुर्शीद अनवर, नौशाद और खेमचंद प्रकाश शामिल थे।  विभाजन के बाद, वह पाकिस्तान चली गईं।  पाकिस्तानी निर्माता रफीक मौला से तलाक लेने के बाद, उन्होंने अपने अंतिम दिन दयनीय गरीबी में बिताए और 1952 के आसपास गंभीर रूप से बीमार बीमारी के बाद अंतिम सांस ली।

उनके कुछ यादगार गीतों में आग लगी दिल में वो प्यारी (शाहजहाँ, 1946) और किसी के मधुर प्यार में मेरा दिल खो गया  सुशील साहू के साथ (सिंदूर, 1947) शामिल हैं।

प्रसिद्ध फ़िल्में

  • अमीना (1934)
  • मुमताज बेगम (1934)
  • रूप कुमारी (1934)
  • जवानी का नशा (1935)
  • नसीब का चक्कर (1936)
  • अनारबाला (1940)
  • रोटी (1942)
  • दानापानी (1953)
  • एहसान (1954)
  • जलसा घर (1958)
30 अक्तूबर को उनका निधन हो गया

प्रीति गांगुली

●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●   ꧁ *जन्म की तारीख और समय: 17 मई 1953, मुम्बई* *मृत्यु की जगह और तारीख: 2 दिसंबर 2012, मुम्बई* *भाई: भारती जाफ़री, ...